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Adalaj Ni Vav – यह आर्टिकल आप को अडालज नी वाव के बारे में पूरी जानकारी देगा। आप जब भी अडालज की वाव देखने जाने की सोचे उससे पहले यह आर्टिकल जरूर से पढ़ें।

इस आर्टिकल में आप को अडालज नी वाव की हिस्ट्री, टाइमिंग्स, एंट्री फीस, घूमने जाने के लिए सबसे अच्छा समय, नजदीक में देखने लायक अच्छी जगहें वगैरे के बारे में पूरी जानकारी मिलेंगी।

तो आओ फ्रेंड्स जल्दी से शुरू करते है।

Adalaj ni vav

Image Credit : flickr (Kandukuru Nagarjun)

अडालज की वाव जिसे गुजराती में अडालज नी वाव के नाम से जाना जाता है। इस वाव को यहाँ पर लोग रुड़ाबाई वाव के नाम से भी जानते है। 

यह वाव भारत की पश्चिम दिशा में आए हुवे गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर के पास अडालज गांव में बनी हुवी है।

यह एक स्टेपवेल प्रकार की संरचना है। 

इसे सन 1498 में राणा वीरसिंह ( वाघेला वंश ) की याद में उनकी पत्नी रानी रुड़ाबाई द्वारा बनवाया गया था। जिसका निर्माण सन 1499 में पूरा हो गया था।

अडालज की वाव भारतीय स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है।

भारत सरकार द्वारा इस वाव को हेरिटेज साइट घोसित किया हुवा है।

StepWell

अगर आप स्टेपवेल किसे कहते है वह नहीं जानते तो आइये संक्षिप्त में उसके बारे में जान लेते है।

स्टेपवेल एक ऐसी संरचना होती है जिसमे इंसान सीढ़ियों द्वारा कुवें तक पहुंचकर पानी भर सकता है। साथ में बने कॉरिडोर में विश्राम भी कर सकता है।

पहले के ज़माने में लोगों के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बैल गाड़ियों का उपयोग होता था। तब लोग ऐसी संरचनाओं में पानी पिने के बाद थोड़ा विश्राम भी किया करते थे। 

जमीं के निचे बनी होने के कारण यहाँ पर ठंडक रहती है। इस लिए मुसाफिरों के लिए सफर के दौरान विश्राम करने के लिए ऐसा बांधकाम बहोत ही उपयोगी साबित हुवा था।

उत्तर भारत के दूसरे क्षेत्रों में इसे बावड़ी,बावरी या वर्तनी के नाम से भी जाना जाता है। उसी तरह गुजरात में इसे वाव के नाम से जाना जाता है।

यह कुवें त्योहारों और पवित्र अनुस्थानो में विशेष रूप से अपना महत्व रखते थे।

5 वीं से 19 वीं शताब्दी के बिच में बनी ये स्टेपवेल पश्चिमी भारत में आम तौर पर पायी गयी है। जो पाकिस्तान तक फैली हुवी है।

गुजरात की आर्किओलॉजिकल साइट धोलावीरा में भी इस प्रकार की संरचना पायी गयी है।

अकेले गुजरात में ही 120 से ज्यादा ऐसी स्टेपवेल बनी हुवी है। जिसमे अडालज की वाव और पाटण की रानी की वाव एक विशेष महत्त्व रखते है। इसकी संरचना को देखने लोग देश-विदेश से आते है।

इन कुवों में मौसमी मानसून के दौरान जल इक्कठा करने के लिए बनाया गया था।

स्टेपवेल को पत्थर काट के बनाया जाता है। भारत में पहला ऐसा रॉक-कट कुवां करीब इसा पूर्व 200 – 400 में पाया गया है। इसके बाद (550-625) में कुवें और (850-950) में तालाबों का निर्माण हुवा था।

सिंधु घाटी सभ्यता मोनजोदारो शहर में कुछ कुवें पाए गए है जो शायद ऐसे स्टेपवेल के पूर्ववर्ती हो सकते है। शहर में करीब 700 से अधिक कुवों की खोज की गयी है।

तीसरी और दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के बीच, ‘महान स्नान’ में, हड़प्पा सभ्यता के मोहनजोदड़ो के स्थल पर, भवन के खुले प्रांगण के सामने एक कमरे में स्थित एक बड़े कुएँ से पानी का भराव प्राप्त किया गया था।

शुरुआती दौर में बने स्टेपवेल पत्थर के बने थे जो बाद में इंसानो में ज्ञान और विज्ञान के बढ़ते मोर्टार,प्लास्टर,मलबे और लामिना पत्थर से बनना शुरू हो गए।

Adalaj Ni Vav Information - जानकारी

Image Credit : Wikimedia Shahil Gupta

अडालज की वाव जटिल रूप से बनी हुवी है जो पांच मंजिला गहरी है।

इसे सन 1498 में बनाया गया था। जिसका इतिहास संस्कृत भाषा में एक शिलालेख में लिखा हुवा है। जो वाव की पहेली मंजिल पर एक संगेमरमर की स्लेब पर पाया गया है।

इसका निर्माण दंडाई देश के वाघेला वंश के राणा वीरसिंह द्वारा शुरू किया गया था। लेकिन निर्माण पूरा होने से पहले ही वह एक युद्ध में मारे गए।

जिसके बाद पडोसी राज्य के मुस्लिम शाशक महुम्मद बेगड़ा ने इसे 1499 में इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली में पूरा करवाया था।

स्टेपवेल में संस्कृत शिलालेख वर्णन करता है…..

“संवत 1555 (1498 ई।), माघ का महीना, महमूद पडशाह का राजा होना।

“विनायक (गणेश) को प्रणाम, जिनकी जाति दण्डही देश के प्रमुख राजा मोकला से थी। उनसे कर्ण का जन्म हुआ, जिनका पुत्र मूलराज था। 

महीप मुलराज का पुत्र था, और वीरसिंह और नाइशा, महीप के पुत्र थे। वीरसिंह की रानी। जिसका नाम रूडा है, ने इस कुएं का निर्माण किया है।

“यह इस समय पर समर्पित है – जब सूर्य उत्तर में होता है, महीना माघ, उज्ज्वल अर्ध (शुक्ल पक्ष), 5 वां दिन, सप्ताह का दिन, बुधवार, चंद्र हवेली – उत्तरा, करण-बावा , योग – सिद्धि। “

Adalaj ni vav

Image Credit : Wallpaper Flare

Adalaj Ni Vav History in Hindi- इतिहास

Image Credit : Pixabay (Banita Tour) 

15 वीं शताब्दी में वाघेला राजवंश के राणावीर सिंह जो एक हिंदू शाशक थे उन्होंने इस क्षेत्र जिसे दंडाई देश के नाम से जाना जाता था उस पर शाशन किया था।

उनका यह राज्य छोटा था और वहां पर अक्सर पानी की कमी रहती थी। इस लिए यह राज्य बारिश के पानी पर अत्याधिक निर्भर रहता था।

अपने राज्य की प्रजा की पानी की समस्या को कुछ हद तक कम करने हेतु राणा वीरसिंह ने इस स्टेपवेल का निर्माण सन 1498 में शुरू करवाया था।

इससे पहले की इस वाव का निर्माण कार्य पूरा होता उससे पहले ही पडोसी राज्य के मुस्लिम शाशक मोहम्मद बेगड़ा ने राज्य पर हमला कर दिया। राणा वीरसिंह इस युद्ध में मारे गए और उनके इस राज्य पर मोहम्मद बेगड़ा ने कब्ज़ा कर लिया।

रुड़ाबाई की वाव नाम के पीछे की कहानी..

राणा वीरसिंह की विधवा रानी रूपबा जिनको रुड़ाबाई के नाम से भी जाना जाता था उन्होंने अपने पति की याद में सती बनने का प्रयास भी किया लेकिन बेगड़ा ने उसे खुद की जान देने से रोक लिया और उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा।

वह इस शर्त पर शादी के प्रस्ताव पर सहमत हुई की पहले इस कुवें का निर्माण कार्य पूरा हो जाये उसके बाद में शादी करुँगी।

मुस्लिम राजा रानी के रूप से अत्याधिक प्रभावित थे इस कारण वश उन्होंने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दर्शायी और जल्दी से इस कुवें का निर्माण कार्य पूर्ण करवाया। जो सन 1499 में पूरा हो गया।

कुवें का कार्य पूरा होते ही बेगड़ा ने रानी रुड़ाबाई को अपनी शर्त याद दिलाई। अब अपने पति द्वारा शुरू करवाए गए इस कुवें का निर्माण कार्य पूर्ण करवाने का उद्देश्य रूडाबाई का पूर्ण हो चूका था।

इस लिए रानी ने बेगड़ा से शादी करने के बजाये अपना जीवन समाप्त करने का निर्णय लिया। और इसी कुवें में कूद कर अपने पति की याद में अपनी जान देदी। 

इस लिए इस वाव को रुड़ाबाई वाव से भी जाना जाता है।

Adalaj ni vav Lokvayka - लोकवायका

प्रथम लोकवायका..

स्वामीनारायण संप्रदाय के 200 साल पुराने धर्मग्रंथों में एक संस्करण बताया गया है की मरने से पहले रानी रूपबा ने धार्मिक संतो से इस कुवें में स्नान करने का अनुरोध किया था ताकि कुवें का पानी उनके मृत्यु के बाद शुद्ध हो जाये और उसे उसके पापों से मुक्ति मिल जाये।

दूसरी लोकवायका..

कुवें के पास कुछ कब्रें मिली है उसकी भी एक अलग स्टोरी बताई गई है।

कुवें का निर्माण करने वाले छह राजमिस्त्री की कब्रें वाव के पास मिली है। बेगड़ा ने उनसे पूछा की क्या वह एक और ऐसे ही कुवें का निर्माण कर सकते है? जब वह सहमत हुवे तो बेगड़ा ने उसे मौत की सजा सुनादि। 

वह इस वाव की वास्तुकला से उतना प्रभावित हुवा की वह नहीं चाहता था की इसकी प्रतिकृति बनें।

Adalaj ni vav Architect - बांधकाम

Adalaj Stepwell: Plan and Elevation (Only Reference Diagram for knowledge Purpose) / Image Credit : Flickr (Santanu Sen)

Adalaj ni vav

Image Credit : Wikipedia

अडालज की वाव पांच मंजिला गहरी है जो सोलंकी स्थापत्य शैली में बलुआ पत्थरों से बनी है। 

उपरकी और यह वाव अष्टकोणीय है और बहोत सारे खंभो पर खड़ी है।

प्रत्येक मंजिल पर कॉरिडोर बने हुवे है जहाँ पर लोग बैठ सके।

यह वाव बलुआ ( चुने ) के पत्थरों से बनी हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। 

इस वाव के अंदर पहुँचने के लिए तीन मुख्य प्रवेशद्वार है जो इस वाव को गुजरात की दूसरी वाव से अलग करता है।

उत्तर-दक्षिण धरी पर बनी हुवी यह वाव की कुल लंबाई 251 फ़ीट है।

इस वाव में उत्तर दिशा में बने कुवां करीब 50 फ़ीट ऊंडा है। 

पांच मंजिला ऊंडी यह ईमारत जमीं में मिलने वाले पानी के प्रथम स्तर पर बनी हुवी है। 

जिसकी वजह से गर्मियों में पानी का बास्पीभावन कम से कम मात्रा में होता है।

पानी की कमी वाले प्रदेश में सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होने वाले इस प्रकार के स्थापत्य विश्व में सिर्फ गुजरात और राजस्थान में ही ज्यादातर पाए गए है।

जमीं में ऊंडी खुदाई के दौरान मिटटी में सब कुछ दब न जाये उसकी वजह से पत्थर की दिवार बनायीं हुवी है जिसको सिर्फ पत्थर के ब्लॉक से खड़ी की हुवी है। 

करीब 500 साल पहले बनी यह ईमारत धरतीकंप और पुर की स्थिति में भी अड़ीखम खड़ी हुवी है वह उसके बांधकाम के इंजिनयरिंग कौशल का ख्याल देती है।

इस वाव में दूसरी वाव की तरह ही कुवें की तलहटी तक पहुँचने के लिए सीढियाँ अच्छी तरह बनी हुवी है जो सीधा आप को पानी की सतह तक पहुंचा देती है।

जबकि पशु पानी पिलाने और सिंचाई की आपूर्ति के लिए १७ फुट व्यास वाले कुवें के ऊपर से पानी खिंच सके ऐसी व्यस्था भी की हुवी है।

कुवें की और जाती सीढ़ियों के दोनों और गैलेरी स्वरुप में पत्थर के जरोखे बने हुवे है जहाँ पर यात्रिक पानी पाइक थोड़ा आराम भी कर सकें।

भारत सरकार द्वारा इस वाव को हेरिटेज साइट घोसित किया हुवा है।

इंजीनिरिंग कौशल के उपरांत यह वाव एक आध्यात्मिक भाव भी देने वाली इस वाव के ऊपर माताजी का स्थापन भी किया हुवा है।

जिसमे कुवें की और जाते रास्ते में वाव के झरोखों में माता का त्रिशूल, शेर और गणेशजी का शिल्प भी देखने को मिलता है।

Best time to visit Adalaj ni vav - घूमने के लिए सबसे अच्छा समय

सर्दियों का समय यहाँ आने के लिए ज्यादा बहेतर है। वैसे तो वाव के अंदर का तापमान बहार से काफी ठंडा होता है लेकिन अगर आप यहाँ तक ए हो तो आस पास की जगहें भी देखना जरूर पसंद करोगे। 

अब गर्मियों में यह विस्तार बहोत गर्म हो जाता है। कभी कभी तो तापमान 45 डिग्री तक पहुँच जाता है।

इस लिए यहाँ घूमने आने के लिए सबसे अच्छा समय नवंबर से लेकर मार्च का है।

Atmospher - वातावरण

कहीं भी घूमने जाने से पहले आप को उस जगह का और आने वाले कुछ दिनों का वातावरण जान लेना अत्यंत आवश्यक है जिससे आप को किन किन चीजों की जरुरत रहेगी उसकी तयारी कर सको। जिससे आप अपनी यात्रा को ज्यादा सुखद कर सको।

में यहाँ पर आप को इस जगह का लाइव वातावरण जानने के लिए एक लिंक दे रहा हूँ जिससे आप यहाँ का वातावरण जान सकते हो।

Adalaj Ni Vav Timings - टाइमिंग्स

Open :

Everyday : 6 Am – 6 Pm

Adalaj Ni Vav Entry Fees, Parking & Photography - एंट्री फीस,पार्किंग & फोटोग्राफी

Entry Fees :

  • भारतीय पर्यटक : 25/-
  • विदेशी पर्यटक : 300/-

Photography : Allowed

Parking : Available

How to Reach Adalaj Ni Vav - कैसे पहुंचे?

By Air..

सबसे नजदीकी एयरपोर्ट अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई एयरपोर्ट है। जो यहाँ से सिर्फ 15 किमी की दूरी पर है। अहमदाबाद एयरपोर्ट इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जहाँ पर डायरेक्ट युएसऐ,यूके,सिंगापुर,दुबई और दुनिया के दूसरे देशो से फ्लाइट्स आती है।

आप को यहाँ से अडालज वाव जाने के लिए लोकल व्हीकल आसानी से मिल जायेंगे। आप टैक्सी या कैब का भी उपयोग कर सकते है। जो आप को सीधे वाव तक पहुंचा देगी।

By Rail..

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अहमदाबाद का कालूपुर रेल्वे स्टेशन है जो यहाँ से करीब 18 किमी की दूरी पर आया हुवा है। 

अहमदाबाद का यह रेल्वे स्टेशन देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। आप को यहाँ से अडालज वाव जाने के लिए लोकल व्हीकल आसानी से मिल जायेंगे। आप टैक्सी या कैब का भी उपयोग कर सकते है। जो आप को सीधे वाव तक पहुंचा देगी।

By Road..

गुजरात के पास देश का सबसे अच्छा रोड नेटवर्क है। अहमदाबाद शहर गुजरात के प्रमुख शहरों में से एक है इस लिए राज्य और देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है।

आप यहाँ से लोकल व्हीकल, टैक्सी या कैब का इस्तेमाल करके आसानी से अडालज की वाव तक पहुँच सकते है।

Where to stay near Adalaj ni vav - कहाँ पर रुकें?

अडालज एक गांव है इस लिए वहां पर तो उतनी अच्छी होटल्स नहीं है लेकिन पास में ही अहमदाबाद और गांधीनगर आते है तो वहां पर आप को बहोत सारी अच्छी होटल्स मिल जाएगी।

में यहाँ पर आप की जानकारी के लिए निचे कुछ लिंक दे रहा हूँ। आप यहाँ आने से पहले एक बार जरूर से चेक कर लीजिये।

Note : मुझे निचे दी गयी कोई भी होटल्स की लिंक से किसी भी प्रकार की आय नहीं हो रही। यहाँ सिर्फ में उसे आप की अनुकूलता के लिए दे रहा हूँ।

मेरी दूसरी एक वेबसाइट www.Besttravelproducts.in है जिसमे घूमने जाने की लिए जरुरी सारी चीजें मिलती है जो एक Amazon एफिलिएट वेबसाइट है। 

अगर आप चाहे तो उसे एक बार विसिट कर सकते है।

Places to visit Near Adalaj Ni Vav - नजदीक में घूमने वाली जगहें..

अडालज की वाव की नजदीक में कई दूसरी अच्छी देखने लायक जगहे आयी हुई है। जैसेक..

  • त्रिमंदिर दादाभगवान / अडालज 
  • अक्षरधाम स्वामीनारायण मंदिर / गांधीनगर 

पास में आये अहमदाबाद में देखने लायक कुछ अच्छी जगहें…

  • वैष्णो देवी मंदिर
  • इस्कॉन मंदिर
  • इसरो एक्सिबिशन
  • साइंस सिटी
  • साबरमती आश्रम – महात्मा गाँधी का घर
  • श्री केम्प हनुमान मंदिर
  • साबरमती रिवरफ्रंट
  • लॉ गार्डन नाइट मार्केट
  • कांकरिया झील
  • हठिसिंग नी वाड़ी
  • सीदी सैय्यद की जाली
  • मानेक चौक फूड मार्केट
  • जामा मस्जिद
  • भद्र दुर्ग
  • दादा हरिर नी वाव

Adalaj ni vav – यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

अगर आप अडालज नी वाव के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को अडालज नी वाव के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

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dharmesh

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