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Bhalka Tirth / History full information in Hindiभालका तीर्थ  द्वापर युग के महा नायक श्री कृष्ण के आखरी लम्हो की गवाही देता है। भालका तीर्थ गुजरात के सौराष्ट्र मै आया हुआ है।

Bhalka Tirth / History full information in Hindi

भालका तीर्थ गुजरात के सौराष्ट्र मै आया हुवा है। भालका तीर्थ तीर्थ द्वापर युग के महा नायक श्री कृष्ण के आखरी लम्हो की गवाही देता है। इसी स्थान पे ही संसार को सत्य समझाने वाले और गीता का अमूल्य ज्ञान देने वाले श्री कृष्ण ने अपना देह त्यागा था।

भालका तीर्थ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से महज 4 किमी की दूरी पर आया हुवा है। इस मंदिर में बनी भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा उनके आखिरी वक्त को बयां करती है।

Bhalka tirth- पौराणिक महत्व :

Bhalka Tirth / History full information in Hindi

महाभारत मै एक शिकारी की जो श्री कृष्ण का इस दुनिया से प्रस्थान के लिए निमित माना जाता है।

एक बार की बात है।

श्री कृष्ण जंगल में पीपल के पेड़ के निचे ध्यान मुद्रा में लेटे हुवे थे। तब जंगल में शिकार की खोज में निकले जरा नाम के एक शिकारी को भगवन के पैर में पहनी हुई मणि दूर से हिरन की आँख लगी और उसने शिकार हेतु अपने धनुष से बान चलाया।

बाण पैर में लगा तब शिकारी को अपनी गलती का अहसास हुवा और उसने रोते हुवे भगवन से छमा मांगी।

लेकीन दुनिया को सत्य का ज्ञान देने वाले भगवान को मालूम था की ऐसा होगा इस लिए उन्होंने उस शिकारी निमित बताते हुवे उस को तुरंत माफ़ कर दिया।

यह घटना कृष्ण के प्रस्थान और द्वापर युग के अंत का संकेत देती है।

भगवान के निजधाम प्रस्थान लीला के बारे में महाभारत,विष्णु पुराण,श्रीमद भागवत और अन्य कई धार्मिक पुस्तकों में उल्लेख मिलता है।

वो पीपल का पेड़ आज भी वहां पर मौजूद है और उसे मंदिर के परिसर में अच्छे से सरंक्षित रखा गया है। 5  हजार साल पुराना होने के बावजूद यह पीपल का पेड़ सूखा नहीं है और आज भी वैसे का वैसा है।

बाण लगने की वजह से भगवान घायल हो गए और वह भालका से थोड़ी ही दूरी पर आयी हुई हिरण नदी के किनारे पहुंचे। वह नदी सोमनाथ से करीब डेढ़ से दो किमी की दूरी पर है। कहा जाता है की भगवान वहीँ पंचतत्व में विलीन हो गए थे। भगवान वहां से सीधे वैकुण्ठ धाम चले गए थे।

Bhalka tirth - बाणगंगा /देहोत्सर्ग तीर्थ :

हिरण नदी के किनारे आज भी श्री कृष्ण के चरणों के निशान मौजूद है। यह जगह देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से जनि जाती है।

वह जगह भी बहुत अहमियत रखती है जहाँ से उस शिकारी ने श्री कृष्ण पर बान चलाया था। आज उस जगह को बाणगंगा के नाम से जाना जाता है और वहां पर अब समुद्र के पास एक शिवलिंग बना हुवा है।

भालका तीर्थ में भले भगवान ने अपने प्राणों का त्याग किया था लेकिन आज भी ये पवित्र तीर्थ स्थान भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला एक धार्मिक केंद्र है। माना जाता है की सच्चे मन से मांगी जनि वाले हर मुराद यहाँ पूरी होती है।

हजारों की संख्या में हर रोज लोग यहाँ आते है और अपने दुखों से छुटकारा पाते है। आज भी भगवान की मौजूदगी का लोग अनुभव करते है और 5 हजार सालों से खड़ा पीपल का पेड़ उस बात की गवाही देता है जो आज भी नहीं सूखा है।

Bhalka tirth- दर्शन का समय :

सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 9 बजे तक।

प्रवेश : फ्री

फोटोग्राफी : पूजा विधि दरमियान मंदिर के अंदर फोटो लेना मना है।

देख रेख संस्था : श्री सोमनाथ ट्रस्ट

Link : श्री सोमनाथ ट्रस्ट

Bhalka Tirth / History full information in Hindi

भालका तीर्थ कैसे पहुंचे ?

सोमनाथ से भालका तीर्थ महज 4 किमी की दूरी पर है जिसकी वजह से यहाँ आने के लिए सोमनाथ से कई लोकल वेहिकल मिल जायेंगे।

सोमनाथ कैसे पहुंचे,कहाँ पर रुके उसके बारे मैं मैंने एक अलग से पोस्ट बनाई हुवी है जिसकी लिंक निचे दी हुई है आप उसे पर क्लिक कर के उसे पढ़ सकते हो।

link : सोमनाथ कैसे पहुंचे

दोस्तों मैंने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में आलरेडी एक पोस्ट लिखी हुई है और सोमनाथ में देखने लायक जगह के बारे मैं पोस्ट लिख रहा हूँ।

आप उस लिंक पर जेक उसे जरूर से पढ़ें।

अगर आप के पास इस भालका तीर्थ स्थान के बारे मैं और भी जानकारी हो तो कमेंट बॉक्स में शेयर कर सकते हो।

आप का समय इस ब्लॉग को देने के लिए धन्यवाद।


dharmesh

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