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अगर आप हिस्टोरिकल जगहें देखने के सौखीन है तो राजस्थान में आयी हुई यह स्टेपवेल आप के लिए एक बेहद खूबसूरत जगह बनने वाली है।

आज हम यहाँ पर इस आर्टिकल में जिस कदम कुवें यानि की स्टेपवेल की बात करने वाले है वह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सुंदर स्टेपवेल में से एक है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसकी देखभाल की जाती है और यह सुंदर संरचना आज उपयोग में नहीं है।

यहां पर कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है, जिनमें भूल भुलैया, द फॉल, द डार्क नाइट राइज़ और दूसरे भी कुछ नाम शामिल है।

जो लोग वास्तुकला प्रेमी हैं वो इस सुंदर बनावट को देखने के लिए देश और विदेश से आते हैं।

तो आइये फ्रेंड्स आज हम इस चाँद बाउरी के बारे में विस्तार से जानते है।

What is a Stepwell? - स्टेपवेल किसे कहते है ?

दोस्तों आइये चाँद बाउरी के बारे में ज्यादा जानने से पहले स्टेपवेल किसे कहते है उसके बारे में संक्षिप्त में जान लेते है।

स्टेपवेल पानी संग्रह करने के लिए बनायीं गई एक संरचना है जिसमे व्यक्ति कुवें के जलस्तर तक पहुँच कर पानी भर सकता है।

जिसमे कुवें के अंदर सीढियाँ बनाई होती है जिसका उपयोग करके कुवें की तलहटी पर जाया जा सकते है। जो कई मंजिला निचे होता है।

जब की सामान्य कुवें की संरचना में व्यक्ति को कुवें के ऊपर से ही किसी रस्सी या दूसरे माध्यम से पानी को भरना पड़ता है।

स्टेपवेल जैसी संरचना पश्चिमी भारत में ज्यादा पायी गई है।

मौसमी चढाव उतार के समय पानी की जरूरियात को संभाले रखने के लिए मुख्य तौर से स्टेपवेल निर्माण करवाया जाता था।

जो आकर में कुवें से बड़ी होती है और कुवें के मुकाबले ज्यादा पानी संग्रह करने की क्षमता रखती है।

मैं भारत में आयी सारी स्टेपवेल के बारे में एक आर्टिकल विस्तार से लिखने की सोच रहा हूँ जिसमें सारी स्टेपवेल के बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा।

जैसे ही वह आर्टिकल पूरा हो जायेगा तो उसकी लिंक में यहाँ पर जरूर दे दूंगा।

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अब आइये दोस्तों चाँद बाउरी के बारे विस्तार से जानते है

Where is Chand Baori Stepwell? - चाँद बाउरी स्टेपवेल कहाँ पर आयी हुई है ?

यह स्टेपवेल भारत के पश्चिम में आये हुवे राज्य राजस्थान के आभानेरी गांव में आयी हुवी है। 

जो भारत में बने हुवे अदभुत बांधकामों में से एक है।

यह आभानेरी गांव राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 93 किमी की दूरी पर आया हुवा है।

Chand Baori History - चाँद बाउरी इतिहास

राजस्थान के पूर्वी दिशा में आयी हुई इस चाँद बाउरी को राजा चाँद द्वारा 8 वीं और 9 वीं शताब्दी में बनाया गया था।

गुजरात के प्रतिहार वंश के राजा चाँद दवारा बनाये जाने के कारण उनके नाम से ही इस बाउरी का नाम चाँद बाउरी रखा गया था। 

करीब 6 से 10  वीं शताब्दी AD के दौरान प्रतिहार वंश अपने चरम पर था और राजस्थान के बहोत सारे हिस्से पर उनका शाशन हुवा करता था। 

उन्होंने अपनी राजधानी जोधपुर के पास आये हुवे मंडोर में हुवा करती थी। 

यह स्टेपवेल लगभग 1000 साल पुराना है। 

इसका निर्माण इसलिए किया गया है ताकि स्थानीय लोगों को पूरे साल साफ़ जल मिल सके। 

इसके अलावा, इस भव्य संरचना को आभानेरी के स्थानीय लोगों के लिए एक सभा स्थल कहा जाता है, जहां वे कुएं के चारों ओर बैठते हैं। 

गर्मी के दिनों में सीढ़ियों के नीचले हिस्से ठंडे हो जाते है और इस दौरान इस स्टेप वेल का तापमान 7-8 डिग्री तक ठंडा होता है।

Chand Baori Architecture - चाँद बाउरी बनावट

Chand Baori Stepwell

Image Credit : Flickr (Brando)

पहले के ज़माने में इस स्टेपवेल को बावड़ी या बाउरी कहा जाता था। 

जिसमे ऐसी संरचना की जाती थी की इंसान कुवें के तल तक सीढियाँ उतरकर जा सकता है। 

इस लिए इसे कदम कुवें भी कहा जाता है।

चाँद बाउरी का निर्माण एक अलग ही तकनिकी से किया गया था। 

जिसमें करीब 3500 संकरी सीढिया बनाई गयी थी। 

जो सतह से कुवें तक करीब 20 मीटर गहराई तक जाती है। 

सदियों पहले सुस्क प्रदेशों में पानी का संग्रह करने के लिए ऐसी स्टेपवेल बनाई जाती थी।

यह कदम कुवां करीब 64 फ़ीट गहरा है और जमीं के निचे 13 मंजिलों जितना गहरा है। 

चाँद बाउरी की यह बनावट उसे भारत का सबसे बड़ा और सबसे गहरा स्टेपवेल बना देता है।

चाँद बाउरी में एक सटीक और अदभुत ज्यामितीय पैटर्न है जो उस समय में बनवाना बहोत ही मुश्किल था। 

निचे उतरती सीढियाँ एक भूलभुलैया का निर्माण करती है। 

जिसपे गिरता प्रकाश उसे और भी सुंदर बना देता है।

इसमें एक संलग्न आयताकार आंगन की संरचना है। 

प्रवेश करने पर आप एक झरोखा (खिड़कियों) तक पहुँचते हैं।

बाईं तरफ की सीढ़ियों पर उतरते हुए, आप नीचे की ओर संकीर्ण बावरी को देख सकते हैं, पानी की सतह को नीचे तक पहुंचने के लिए तीन तरफ कदमों की दोहरी संरचना बनाई गयी थी। 

सीढ़ियाँ तीन तरफ पानी को घेरती हैं, जबकि चौथा भाग सुंदर नक्काशीदार झरोखों के साथ तीन मंजिला, स्तंभों पर समर्थित दीर्घाओं और सुंदर मूर्तियों को संवारने वाली दो प्रोजेक्टिंग बालकनियों के साथ एक मंडप का निर्माण किया गया था।

Best time to Visit Chand Baori Stepwell

वैसे तो गर्मियों को छोड़ कर आप किसी भी मौसम में यहाँ पर घूमने आ सकते हो लेकिन अक्टूबर से लेकर मार्च का समय सबसे अच्छा है यहाँ पर आने के लिए।

Chand Baori Timings

प्रति दिन : 

Monday – Sunday : 8 Am to 6 pm

Chand Baori Entry Fees

Entry Fees – Free

How to reach Chand Baori Stepwell?

By Air :

चाँद बाउरी से सबसे नजदीकी बड़ा एयरपोर्ट जयपुर है जो स्टेपवेल से लगभग 100 किमी की दूरी पर आया हुवा है।

जहाँ से आप टेक्सी या कैब की मदद से आसानी से इस चाँद बाउरी तक पहुँच सकते हो।

By Rail :

नजदीकी बड़ा रेल्वे स्टेशन भी जयपुर ही है। जो देश और राज्य के सभी बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है।

जयपुर रेल्वे स्टेशन से ट्रैन के माध्यम से चाँद बाउरी तक पहुँचने के दो तरीके है। 

पहला की आप जयपुर से बांदीकुई के लिए एक ट्रेन ले सकते हो। जयपुर से इस रुट में ट्रैन ज्यादा है क्यों की यह रुट दिल्ली की और जाता है और दिल्ली जाने वाली बहोत सारी गाड़ियां यहीं पर रुक कर जाती है। 

बांदीकुई से स्टेपवेल करीब 11 किमी की दूरी पर आयी हुई है।

दूसरा की आप दौसा रेल्वे स्टेशन के लिए ट्रैन ले सकते हो। दौसा रेल्वे स्टेशन से चाँद बाउरी करीब 35 किमी की दूरी पर है।

या फिर आप जयपुर से टेक्सी कर कर सीधा इस स्टेपवेल तक पहुँच सकते हो।

By Road :

जयपुर सड़क मार्ग से दूसरे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है लेकिन जयपुर से चाँद बाउरी के लिए उतनी अच्छी बस सुविधा नहीं है।

इस लिए अगर आप सड़क मार्ग से जाना पसंद करते हो तो जयपुर से टेक्सी या कैब करके आसानी से चाँद बाउरी तक पहुँच सकते हो।

Conclusion

यह आर्टिकल मैंने मेरे दोस्तों के अनुभव और ऑन लाइन रिव्यूज़ की मदद से लिखा हुवा है।

अगर आप इस स्टेपवेल के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले प्रवासियों को इस जगह के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

अगर आप को यह आर्टिकल में दी गयी जानकरी उपयोगी लगी हो तो एक लाइक करना न भूलें।अपने दोस्तों में भी जरूर से शेयर कीजिये।

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आप के सुझाव मुझे और ज्यादा अच्छे आर्टिकल लिखने की प्रेरणा देंगे।

आपका अमूल्य समय इस आर्टिकल को देने के लिए आप का धन्यवाद।

Categories: Historical

dharmesh

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