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Dholaviraधोलावीरा शहर सिंधु घाटी सभ्यता के कुछ प्रमुख शहरों में से एक हुवा करता था। और इसी सभ्यता के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित धोलावीरा पुरातत्वीय शहर के बारे में विस्तार से जानेंगे। तो आइये फ्रेंड्स शुरू करते है।

Harappan Civilization - सिंधुघाटी सभ्यता..

धोलावीरा भारत के पश्चिम में आए हुए गुजरात राज्य के कच्छ जिले के भचाऊ तालुका में आये हुवे गांव खदिरबेट में मिली हुई पुरातत्वीय जगह है। धोलावीरा शहर करीब 100  से 120 एकर में फैला हुवा है।

कच्छ के स्थानीय लोग इसे कोटड़ा टिम्बा (जिसका अर्थ है बड़ा किला) के नाम से जानते है। इस जगह में प्राचीन सिंधु सभ्यता के धोलावीरा शहर के खँडहर दबे पड़े है।

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Image Credit : Max Pixel

धोलावीरा की तुलना हड़प्पा संस्कृति के अन्य प्रमुख शहरों जैसे मोहनजोदड़ो (सिंध,पाकिस्तान), हड़प्पा(साहीवाल,पंजाब,पाकिस्तान), गनेरीवाला(बहावलपुर,पंजाब,पाकिस्तान), कालीबंगा ( राजस्थान, भारत ), राखीगढ़ी (हरियाणा,भारत), बनवाली (हरियाणा,भारत) और लोथल(गुजरात,भारत) से की जा सकती है। 

यह सारे शहर सिंधु घाटी सभ्यता जिसे इंडस वेली सभ्यता से भी जाना जाता है उसके प्रमुख शहर हुवा करते थे जिसमे यह सभ्यता फूली फली थी।

सिंधु सभ्यता को अगर हम ईजिप्त की मिस्र या मेसोपोटेमिया की सभ्यता के साथ तुलना करें तो यह पता चलता है की यह सारी सभ्यता एक ही युग में फली फूली थी।

आज से 5000 वर्ष पहले भारत की इस सभ्यता ने अर्बन सविलाइज़ेशन का सबसे पहला मॉडल बनाया था।

इस समय जब बाकि की दुनिया खाना और पानी कैसे ढूंढे उसके बारे में सोच रही थी तब ये उन्नत सभ्यता खेती, पक्की इमारतें, व्यापर और साहित्य जैसी कई दिशाओं में आगे बढ़ चुकी थी।

यह सभ्यता गणित, विज्ञान, इंजीनरिंग, भूमिति, धातुविद्या और खेती के काम में भी माहिर थी।

यह बात सोचने लायक है की उस समय की सबसे उन्नत सभ्यता का पतन कैसे हो गया? तो आइये आज हम इसके इतिहास को थोड़ा और क़रीबसे जानने की कोशिश करते है।

Dholavira History - धोलावीरा हिस्ट्री..

धोलावीरा भारत के दो सबसे बड़े हड़प्पा स्थलों में से एक है, और उपमहाद्वीप में 5 वां सबसे बड़ा स्थान है। 

लोथल की तरह धोलावीरा भी हड़प्पा संस्कृति के सभी दौरों (लगभग 2900 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व तक) से गुजरा था। जबकि दूसरे शहरों ने शुरुआती या तो आखरी दौर ही देखा था।

1967 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा साइट का पता लगाया गया था, लेकिन केवल 1990 के बाद से व्यवस्थित रूप से खुदाई की गई है।

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Dholavira Layout - धोलावीरा नगर रचना..

Image Credit : Wikipedia

पुरातत्विदों के मत अनुसार धोलावीरा सिंधु सभ्यता के मुख्य शहर में से एक हुवा करता था। यह 47 हेक्टेयर चतुर्भुज शहर दो मौसमी धाराओं के बीच स्थित है। जब धोलावीरा शहर नया-नया बसा ही था तब वहाँ के लोग मिट्टी के पत्थर बनाते थे, पत्थर तोड़ते थे और शंख आदि के मनके बनाते थे।

धोलावीरा की नगर व्यस्था में एक किला (जहां शासक, उनके वंशज और उनके उच्च अधिकारी) रहते थे, मध्य शहर और निचले शहर (जिसमे आम जनता और बाजार) हुवा करते थे।

हमारी तरह सिंधु घाटी की सभ्यता भी पक्की गाणितिक वव्यस्थापन से रहती थी। आधुनिक तौर तरीकों से खेती और व्यापर किया करती थी।

इस सभ्यताओं को उन्नत इस लिए माना जाता है क्यूंकि जब बाकि की कई सभ्यताएं जंगल में ही रहा करती थी और खाने और पिने के लिए रास्ते तलाश रही थीं तब यह सभ्यता ने रहने के लिए पक्के घर बना लिए थे जिसमे कमरे, बाथरूम और टॉयलेट की भी व्यस्था थीं जिसके पानी के निकाल के लिए नाले और ड्रेनेज की भी एक पक्की संरचना मौजूद थीं।

जमीं के निचे दबी मिली सुद्रढ़ नगर रचना आज के इंजीनरिंग को भी मात देती है। क्यूंकि उस ज़माने में कोई आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल किए बिना सिर्फ मानव परिश्रम  के द्वारा इतनी सुद्रढ़ संरचना बनाना उनकी गाणितिक सूज बूज की गवाही देती है।

Dholavira_East_Gate

Image Credit : Nizil Shah Wikimedia ( East Gate )

सिंधु सभ्यता के शहरों को देखके यह पता चलता है की इसका निर्माण किसी खास इंजीनरिंग पद्धति से किया गया होगा। क्यूंकि मोहेंजोदड़ो और धोलावीरा का निर्माण किसी आधुनिक उपकरणों के बगैर सिर्फ मानव परिश्रम से ही किया गया था।

शहर के चारों और मजबूत दीवारें थी जिससे नगर की रक्षा होती थी। नगर में 1 से लेकर 3 मंजिलों के घर बने थे जो पक्की ईंटों से बने हुवे थे।

हर घर में बाथरूम का इस्तेमाल होता था। इस पानी के निकाल के लिए नालियां और वॉटर ड्रेनेज सिस्टम भी अच्छी तरीकें से बानी हुई थी।

Dholavira Tunnel-kutch gujarat

( Tunnel )

Image Credit : Nagarjun Kandukuru Wikimedia 

जमीं के नीचे मिली टनल व्यस्था भी उनकी नगर रचना की सूज बूज को दर्शाता है। 

धोलावीरा में दो मौसमी नाले या धाराएँ थीं, उत्तर में मानसर और दक्षिण में मनहर। मतलब की धोलावीरा के निवासियों ने यह दो धाराओं के बीच अपना शहर बसाया हुवा था,जो मॉनसून में अपना पानी इकट्ठा करते थे और वर्ष के बाकी समय तक इसका उपयोग करते थे।

इस प्राचीन नगर धोलावीरा में पिने और इस्तेमाल करने के लिए पानी की अदभुत संग्रह व्यस्था की गई थीं।

( Water reservoir )

Image Credit : BhajishBharathan  Wikimedia 

भोजन के लिए लोग जानवर पाल के खेती किया करते थे और व्यापर भी किया करते थे। खुदाई के दौरान अनाज के कई संग्रहस्थान भी मेले है जिससे यह पता चलता है की इस सभ्यता के पास अनाज को संग्रह करने की भी अच्छी समज थी।

आंशिक रूप से वो लोग वर्षा पर निर्भर थे। विशाल पत्थर की नालियों को शहर में देखा जा सकता है जो निचले शहर के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से में व्यापक बंडों द्वारा अलग-अलग जलाशयों की श्रृंखला का निर्माण किया जा सके। सबसे भव्य कुआँ महल में स्थित था और संभवतः चट्टान के कटने का सबसे पहला उदाहरण है। 

इस शहर ने किलेबंदी के उत्तरी और दक्षिणी चेहरों पर बहने वाली मौसमी धाराओं से भी पानी निकाला। इन धाराओं के पानी को बांधों की एक श्रृंखला से धीमा कर दिया गया था और आंशिक रूप से पानी को निचले शहर में डाल दिया गया था। जीवित रहने के लिए पानी की प्रत्येक बूंद को संरक्षित किया गया था।

Dholavira Well

( Well )

Image Credit : Nagarjun Kandukuru Wikimedia 

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भाषा, कला और साहित्य में रूचि..

उनकी खुद की एक लिपि याने के एक भाषा थी जिसे सिंधु लिपि से जाना जाता है। साथ में उन्होंने कई साहित्यों की भी रचना की थी।

उनकी चित्रों के प्रति भी काफी अच्छी समज थी जो आज भी यहाँ के म्यूजियम में स्पस्ट रूप से देखि जा सकती है।

पुरातत्विदों के अनुसार यहाँ के लोग खेलकूद और संगीत में काफी रूचि रखा करते थे।

Vyavharik Samaj - व्यवहारिक समज..

खुदाई के दौरान उस समय की कई मुद्राएँ भी मिली जो लोग व्यावहारिक उपयोग में लिया करते थे। काफी सारी मुद्राओं के अवशेष कच्छ के धोलावीरा के म्यूजियम में हम देख सकते है ।

इनके मिले हुवे अवशेषों से यह बात साफ़ थी के इनको गणितशास्त्र का काफी अच्छा ज्ञान था और उनको जोड़ना घट्ना सब पता था।

जिनकी मदद से वो बार्टर सिस्टम से व्यापर भी किया करते थे। बार्टर सिस्टम उसे कहते है जिसमे चीजों के बदले चीजों का व्यापार होता है।

उसके बाद करंसी की खोज यही सभ्यताओं द्वारा की गयी थी। इसी लिए इसके समय को ताम्र युग याने ब्रॉन्स एज से भी जाना जाता है।

इनके गणित के ज्ञान की बात करे तो इनके नगरों में इस्तेमाल की गई सारी ईंटो की साइज और वजन एक सामान था सोचने की बात यह है की उस समय ऐसी कोई भी आधुनिक चीज मौजूद नहीं थी जिनके मदद से यह काम हो पाए।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार दक्षिण गुजरात, सिंध और पंजाब और पश्चिम एशिया का मुख्य व्यापार स्थान धोलावीरा ही था।

धोलावीरा में खुदाई के दौरान क्या क्या मिला ?

धोलावीरा में खुदाई के दरमियान जी भी मिला वो चौंकाने वाला था।

खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियों में टेराकोटा मिट्टी के बर्तन, मोती, सोने और तांबे के गहने, मुहरें, मछली के हुक, पशु मूर्तियां, उपकरण, कलश और शामिल हैं।

धोलावीरा में उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को जमीं के अंदर बड़ी इमारतें, जल कुंड , काफी सारी कला कृतियाँ ,चित्र, मोती, मुद्राएँ, घर में इस्तमाल किये जाने वाले बर्तन, बच्चों के खिलौने, हिरे, मोती, बहुमूल्य रत्न, जानवरों की हड्डियां, मिटटी के और पीतल के बर्तन और कई वस्तुएं मिली। जिनकी रेडिओ डेटिंग पद्धति से चेक करने से पता चला की यह सभी चीजों का निर्माण 5000 साल पहले किया गया था।

Indus vally Mudra

( Mudra )

Image Credit : World Imaging Wikipedia 

खोजकर्ताओं को काफी सारे गहने और औजार मिले जिसका निर्माण तराशें गए पत्थर और धातु से किया गया था।

हड़पिय सभ्यता के शहरों में कुछ जगहों पर खुदाई के दौरान मिले कंकालों का अध्ययन करने पर पुरातत्वविदों को मालूम पड़ा की उनमे से कई सारे लोगो को नकली दांत भी लगवाए थे इसका मतलब इस सभ्यता को मेडिकल साइंस की भी बहोत अच्छी समज रही होगी।

जिसके अवशेष आज भी हम यहाँ के संग्रहालय में देख सकते है।

Dholavira shilalekh

Ten Indus Scripts’ discovered near the northern gateway of the Dholavira.

Image Credit : Wikipedia

खुदाई के दौरान बरामद प्राचीन वस्तुओं के बीच, महल के उत्तरी द्वार के पास कक्ष से 3 मीटर लंबा एक शिलालेख बरामद किया गया था। धोलावीरा की खुदाई के दौरान मिले शिलालेख पर दस बड़े संकेत लिखे मिले जो लिखित भाषा के पहले प्रमाण हैं। हालांकि इसकी लिखाई को अभी तक उकेला नहीं गया है, लेकिन उकसाने वाले अक्षरों के आकार, इसकी विशिष्ट स्थान और दृश्यता के आधार पर, इसे साइन-बोर्ड के रूप में पहचाना गया है। यह किसी भी अन्य साइटों के विपरीत एक असाधारण खोज है।

खुदाई के दौरान मिली चीजों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित और प्रबंधित किया जाता है.

इन सभी वस्तुओं और लेखों को अब संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है, जो शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित है। धोलावीरा आते समय रास्ते में धोलावीरा पुरातत्वीय संग्रहालय आया हुवा है जहाँ पर आप धोलावीरा में मिली हुई सारी चीजों को देख सकते हो।

धोलावीरा से यह संग्रहालय करीब 850 मीटर की दूरी पर आया हुवा है।

धोलावीरा के पतन का संभवित कारण..

लेकिन यह माना जाता है कि 1900 ईसा पूर्व के आसपास सरस्वती नदी धीरे धीरे सूखना शुरू हुई थी जिसके कारण यह सभ्यता टूटने लगी थी।  इतनी उन्नत सभ्यता के पतन का एक यह कारण था दूसरे कारण के रूप में एक महान बाढ़ भी माना जाता है। 

इस घटना से कृषि की गतिविधि पर भयानक प्रभाव पड़ा, जिससे अर्थव्यवस्था स्थायी नहीं रह सकी और इस वजह से शहरों के नागरिकों ने भी आदेश को तोड़ना प्रारंभ कर दिया। लेकिन इस उन्नत सभ्यता के पतन का मूल कारण अभी भी स्पस्ट नहीं है।

Dholavira

Best time to visit Dholavira - धोलावीरा घूमने आने का सबसे अच्छा समय..

धोलावीरा देखने जाने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का है। गर्मियों में यहाँ पर जाना अवॉइड करें।

How to Reach Dholavira - धोलावीरा कैसे पहुंचे ?

By Air..

हवाई मार्ग से अगर आप जा रहे हो तो धोलावीरा से सबसे निकटतम हवाई अड्डा भुज है। जो यहाँ से करीब 212 किमी की दूरी पर है। वहां से आप को गवर्नमेंट बसिस और प्राइवेट विहिकल मिल जायेगा।

By Rail..

रेल मार्ग से भी आप को भुज ही पहुंचना होगा। जहाँ से आप को उसी तरह वाहन मिल जायेगा।

By Road..

सड़क मार्ग से आप भुज से भचाऊ, बालासर, लोद्रानी होके खदिर बेट यानि की धोलावीरा की आर्किलोजिकल साइट पर पहुँच सकते हो।भुज से एक बस दोपहर २ बजे निकलती है और शाम को करीब 8 बजे धोलावीरा पहुंचती है। आप भुज से प्राइवेट वाहन कर के भी धोलावीरा पहुँच सकते हो।

भुज कैसे पहुंचे उसके बारे में मैंने विस्तार से एक दूसरा आर्टिकल लिखा हुवा है जिसे आप पढ़ के ज्यादा आसानी से यहाँ पहुँच सकते हो। लिंक निचे दी हुवी है।

यहाँ ज्यादा पढ़ें :  Bhuj kaise Pahunche?

Where to stay in Dholavira - धोलावीरा में कहाँ पर रुके ?

वैसे धोलावीरा में रुकने के लिए कोई व्यस्था नहीं है। लेकिन धोलावीरा से करीब 4 किमी की दूरी पर एक रण रिसोर्ट धोलावीरा नाम की एक होटल है जहाँ आप रुक सकते हो।

Dholavira Narsinhbhai homestay

Image Credit : Jatin Rathod ( Local Guide )

अगर आप होमस्टे में रुकना पसंद करते हो तो धोलावीरा से करीब 1 किमी की दूरी पर नरसिंहभाई होमस्टे आया हुवा है जहाँ आप रुक सकते हो।

Conclusion - निष्कर्ष

सिंधु घाटी सभ्यता एक उन्नत सभ्यता थी जिसके बनाये शहरों को देखना एक अच्छी अनुभूति देता है। अगर आप अपने परिवार के साथ कच्छ घूमने आए हो तो  यहाँ जरूर से आइये।

Dholavira – मैंने यह आर्टिकल घूमने गए मेरे दोस्तों, पब्लिक रिव्यु और कुछ रेफरन्स साइटों से जानकारी ले कर लिखा हुवा है। अगर आप का कोई सुझाव हो तो जरूर से कॉमेंट बॉक्स में मुझे कॉमेंट करें। और अगर आप को यह जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों को शेयर कीजिये।

आप का अमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Rann Utsav hindi - travellgroup · April 7, 2020 at 7:48 pm

[…] 5. Dholavira – धोलावीरा […]

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