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Harihar Gad – क्या आप हिस्टोरिकल जगहों को देखने के सौखीन हो ?

और अगर वह जगह हिस्टोरिकल होने के साथ साथ अगर अडवेंचरस हो तो बताओ क्या आप उस जगह पर जाना नहीं चाहोगे ?

तो आइये फ्रेंड्स आज हम एक ऐसे ही किले हरिहर फोर्ट के बारे में विस्तार से जानने वाले है जिसे भारत के कुछ मुश्किल ट्रेक में से एक माना जाता है।

तो ज्यादा समय न लेते हुवे आइये जल्दी से शुरू करते है।

Harihar Gad - हरिहर गड

हरिहर गड कहाँ पर आया हुवा है ?

Harihar Gad

Image Credit : im_yash_m (Yash Mayekar/Traveller)

तो फ्रेंड्स सबसे पहले आप के मन में यह सवाल ही आएगा की यह फोर्ट कहाँ पर आया हुवा है ?

तो यह किला जिसे हरिहर गढ़ या हर्षगढ़ किले के नाम से भी जाना जाता है, वह भारत के महाराष्ट्र राज्य के नासिक शहर से करीब 40 किमी की दूरी पर एक 3500 फीट से अधिक की ऊँचाई वाली एक पहाड़ी के ऊपर आया हुवा है।

महाराष्ट्र भारत के उन कुछ राज्यों में से एक है जहाँ पर बहोत पहाड़ी किले आए हुवे है।

अब यह बात अलग है की ये सभी किले समय के साथ सिर्फ ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बन गए है लेकिन प्रत्येक किला उनके समय में अपना ऐतिहासिक महत्व रखता था।

यह हरिहर किला भी समय के चलते इतिहास में गुम हो गया है।

मतलब की राजस्थान के किलों जितना फेमस नहीं है।

यह किला हरी भरी पहाड़ियों के बीच बना हुवा एक ऐसा ही किला है।

यदि आप एक उत्साही ट्रेकर हैं या किसी स्थान के इतिहास को देखना पसंद करते हैं, तो आपको हरिहर किले का ट्रेकिंग अपनी लाइफ में एक बार जरूर से करना चाहिए।

यह ट्रेकिंग कुछ मुश्किल ट्रेक में से एक है।

हरिहर फोर्ट नासिक जिले में आया हुवा ट्रेकर्स के लिए सबसे प्रिय स्थानों में से एक है।

ऐसा तो क्या है इस किले में की ट्रेकिंग के सौखीन बार बार खींचे चले आते है ?

Harihar Gad

Image Credit : im_yash_m (Yash Mayekar/Traveller)

यह किला एक निरीक्षण किला था जिसका उपयोग गोंडा घाट के माध्यम से व्यापर मार्ग पर ध्यान रखने के लिए किया जाता था।

किले तक पहंचने के लिए जो रॉक कट सीढियाँ बनी है वह एडवेंचर लवर्स को बार बार अपनी और खिंच लाती है।

वैसे तो आप ने कई किले देखे होंगे जो अपने अदभुत इतिहास और बेनमून कलाकारी के लिए जाने जाते है।

लेकिन इस किले में आप को ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलेगा फिरभी एक बार आप यहाँ पर आ गए तो दूसरी बार यहाँ आने की इच्छा मन में लिखे आप जरूर वापिस जायेंगे।

यदि आप इतिहास,प्रकृति और रोमांच का एक सही मिश्रण पसंद करते हो तो यह किला आपके मन में अपना एक विशेष स्थान जरूर से बना लेगा।

हरिहर फोर्ट एक पहाड़ी पर बना हुवा है जो बिलकुल सीधी है।

किले तक पहुँचने के लिए बनी हुई सीढियाँ एकदम सीधी बनी हुई है।

जिसे चढ़ने के लिए आपको अपने दो पैरो के साथ साथ दोनों हाथों को भी काम में लगाना पड़ेगा।

किले तक पहुँचता रास्ता बहोत ही रोमांचकारी है।

चलिए हम शब्दों में घूमने के बजाये इस घुमावदार सफर में और आगे बढ़ते है।

हरिहर गड को बनाने के उदेश्य क्या था ?

Harihar Gad

Image Credit :Ccmarathe (Wikimedia)

अब कोई भी किला पहाड़ी पर बना हो तो उसके कुछ मुख्य उपयोग में देखें तो..

  • एक : या तो वह हवा महल हो जो राजपरिवार को गर्मियों में ठंडक के क्षण देता है। 
  • दूसरा : या तो किले को बनाने का उदेश्य राजपरिवार को दुश्मनों के हमले से बचाना हो।
  • तीसरा  : या तो वातावरण की जानकारी पा के बरसात का अनुमान लगाना हो। 
  • चौथा  : और आखरी उदेश्य किला एक वॉच टावर के तौर पर बनाया गया हो। वॉच टावर का मतलब की दुश्मनो के हमले या किले के आस पास की हिलचाल पर नज़र रखने के लिए बनाया गया हो।

सीधे शब्दों में बात करें तो आज हम जिस हरिहर फोर्ट की बात कर रहे है वह जमीं,किसी झील या तालाब के बिच नहीं आया हुवा लेकिन एक खूबसूरत पहाड़ी की छोटी पर बना हुवा है।

उनमें से यह हरिहर फोर्ट बनाने का मुख्य उदेश्य वॉच टावर के रूप में उपयोग करना था। 

इस लिए इस किले में आप को कुछ खास नक्कासी, शानदार कमरे, बड़े बड़े झुम्मर देखने को नहीं मिलेंगे।

Harihar Gad Architecture - हरिहर गड बनावट

Image Credit : im_yash_m (Yash Mayekar/Traveller)

तो फिर आप सोचेंगे की फिर किले में हम क्या देखें ?

यहाँ पर आपको एक पानी का कुंड, कुछ बड़े दरवाजे, हनुमानजी का एक छोटा मंदिर और दूर दूर तक फैली खामोश और अदभुत शांति का अनुभव होगा।

लेकिन यहाँ तक पहुँचने के लिए जो रास्ता बना हुवा है वो इतना रोमांचकारी है की ट्रेकर्स इसका अनुभव बार बार करना चाहते है और बार बार चले आते है। 

यहाँ तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है क्यूंकि सीधी पहाड़ी के ऊपर चढ़ाई कई जगहों पर 90 डिग्री तक सीधी है।

जो अनुभवी ट्रेकर्स के लिए भी थोड़ी मुश्किल है।

यह पहाड़ देखने में नीचे से चौकोर है, मगर इसका ओरिजिनल शेप प्रिज्म जैसा है। 

Harihar Gad

Image Credit : im_yash_m (Yash Mayekar/Traveller)

ये पहाड़ वर्टिकल है और इस पर चढ़ने के लिए बहुत छोटी-छोटी सीढियां बनी हैं।

यह किला पहाड़ी पर 170 मीटर की ऊंचाई पर बना है।

यह एक तरफ से 75 की डिग्री पर और दो तरफ से 90 डिग्री सीधा है।

इस पर चढने के लिए एक मीटर चौड़ी 117 सीढियां बनी हैं। 

ट्रैक चिमनी स्टाइल में है, लगभग 50 सीढियां चढ़ने के बाद मुख्य द्वार, महादरवाजा आता है, जो आज भी बहुत अच्छी स्थिति में है।

Harihar Gad

Image Credit : im_yash_m (Yash Mayekar/Traveller)

जैसे ही आप दरवाजे तक पहुँचते है उसके आगे की सीढियाँ एक चट्टान के अंदर से होकर निकलती है और उसे पार करते ही आप किले के शीर्ष तक पहुँच जायेंगे।

ऊपर किले में हनुमानजी और महादेव के छोटे मंदिर बने हुवे है।

उस मंदिर के पास में एक छोटा तालाब बना हुवा है। 

बारिश के दिनों में यह पानी पिने लायक साफ़ होता है।

लेकिन अगर आप के पास दूसरा कोई विकल्प न बचा हो तभी ही इस पानी को पिने का सोचे। 

यहां से आगे जाने पर दो कमरों का एक छोटा महल दिखता है, जिसमें 10 से 15 लोग रुक भी सकते हैं।

Harihar Gad

Image Credit : im_yash_m (Yash Mayekar/Traveller)

किले के ऊपर से आप चारों और क्या देख सकते हो ?

यहाँ पर आप जब चोटी पर पहुँच जाओ तब अगर वातावरण साफ़ हो तो 

  • उत्तर में सातमाला, 
  • शैलबारी रेंज, 
  • दक्षिण में अवध-पट्टा,
  • कालासुबई रेंज,
  • बासगढ़ किला, 
  • उतावड़ पीक,
  • ब्रह्मा हिल्स का खूबसूरत नजारा दिखता है।

यह किला वैतर्ना रेंज पर बना है।

Harihar Gad History - हरिहर गड इतिहास

इस किले का इतिहास 9 वीं और 14 वीं शताब्दी के बीच यादव वंश की अवधि तक फैला है। 

किले का निर्माण व्यापार मार्ग की रक्षा के लिए किया गया था।

बाद में, यह ब्रिटिश सेना के नियंत्रण में आने तक कई अन्य आक्रमणकारियों और स्थानीय शासकों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। 

आज, किला खंडहर में है और केवल ट्रेकिंग स्थल के रूप में उपयोग किया जाता है।

हरिहर गड भारतीय राजवंश देवगिरि यादव कुल (c. 860–1317) के समय काल का माना जाता है। 

हरिहर गड को सन 1636 में पुणे में आए हुवे कई किले और त्र्यंबक के साथ खान जमाम को सौंप दिया गया था। 

बाद में करीब 17 किलों के साथ सन 1818 में कैप्टन ने कब्ज़ा कर लिया था।

इस कुल का शाशन उत्तर में नर्मदा नदी से लेकर दक्षिण में तुंगभद्रा नदी तक फैला हुवा था। 

जिसमें आज के महाराष्ट्र, उत्तर कर्नाटक और मध्य प्रदेश के कुछ भाग शामिल हैं, इसकी राजधानी देवगिरि जो आज के औरंगाबाद जिले के दौलताबाद में हुवा करती थी।

इन यादवों ने शुरुआत में पश्चिमी चालुक्यों के सामंतो के रूप में शाशन किया था।

12 वीं शताब्दी के मध्य में चालुक्य वंश के पतन के बाद यादव राजा भिलमा वि ने शाशक के तौर पर शाशन शुरू किया। 

बाद में यह यादव साम्राज्य राजा सिम्हना II के शाशन काल में अपने चरम पर पहुँच गया। 

जो बाद में 14 वीं शताब्दी तक फलता फूलता रहा जिसे दिल्ही सल्तनत ने बाद में वापिस ले लिया।

सिर्फ आप की जानकारी के लिए निचे में सेउना या यादव कुल का शाशकों और उसके शाशनकाल की अवधि निचे दे रहा हु जिसकी रेफेरेंस लिंक निचे दे रहा हूँ। 

आप वहां से विस्तार से जान पाएंगे।

  • Dridhaprahara, r. c. 860-880
  • Seunachandra, r. c. 880-900
  • Dhadiyappa I, r. c. 900-?
  • Bhillama I, r. c. 925
  • Rajugi, r. c. ?–950
  • Vaddiga, r. c. 950-970
  • Dhadiyasa, r. c. 970-985
  • Bhillama II, r. c. 985-1005
  • Vesugi I, r. c. 1005–1025
  • Bhillama III, r. c. 1025–?
  • Vesugi II alias Vaddiga or Yadugi, r. c. ?-1050
  • Seunachandra II, r. c. 1050-1085
  • Airammadeva or Erammadeva, r. c. 1085-1105
  • Simhana I (also transliterated as Singhana I) alias Simharaja, r. c. 1105-1120
  • Obscure rulers, r. c. 1120-1145
  • Mallugi I, r. c. 1145-1160
  • Amaragangeya
  • Amara-mallugi alias Mallugi II
  • Kaliya-ballala, r. c. ?-1175
  • Bhillama V, r. c. 1175–1187
  • Bhillama V, r. c. 1187–1191
  • Jaitugi I, r. c. 1191-1200 or 1191-1210
  • Simhana II, r. c. 1200-1246 or 1210-1246
  • Krishna alias Kannara, r. c. 1246–1261
  • Mahadeva, r.c. 1261–1270
  • Ammana, r. c. 1270
  • Ramachandra alias Ramadeva, r. c. 1271–1308
  • Ramachandra, r. c. 1308–1311
  • Simhana III alias Shankaradeva, r. c. 1311-1313
  • Harapaladeva, r. c. 1313–1317

Treking - ट्रेकिंग

Harihar gad

Image Credit : TreKshitiZ.com ( Shardul_Gadkille )

यह किला खास तौर पर ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है।

किले का ट्रेकिंग हरसवाडी और निर्गुदपाड़ा गांवों से सुरु होता है।

जो त्रियंबकेश्वर से 22 किमी और नासिक से 45 किमी दूरी पर स्थित है।

इस पर सबसे पहले 1986 में डग स्कॉट नाम के पर्वतारोही ने ट्रैकिंग की थी, इसलिए इसे स्कॉटिश कहते हैं।

जिसे पूरा करने में उन्हें दो दिन लगे गए थे।

Best time to Visit Harihar Gad - हरिहर गड जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है ?

पहाड़ी किला होने के कारण यहाँ आप पुरे साल में कोई भी समय जा सकते हो।

लेकिन अक्टूबर से लेकर फरवरी तक यहाँ पर जाना सबसे अच्छा होता है।

अब बारिश में यहाँ का नजारा बहोत ही अच्छा होता है लेकिन बारिश की वजह से यह फिसलन भरी सीधी चढाई बहोत ज्यादा खतरनाक और मुश्किल हो जाती है।

इस लिए अगर आप अगर मॉनसून में यहाँ पर जाओ तो ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत रहेगी।

How to Reach Harihar Gad - हरिहर गड कैसे पहुंचे ?

By Air..

हरिहर किले का निकटतम हवाई अड्डा मुंबई में लगभग 165 किमी की दूरी पर स्थित है।

हवाई अड्डे से, आप हरिहर किले के लिए एक सीधी टैक्सी प्राप्त कर सकते हैं। 

आप मुंबई से नासिक और फिर वहाँ से हरिहर किले के लिए एक कैब भी बस पकड़ सकते हैं।

नासिक और हरिहर किले के बीच की दूरी 40 किमी है।

By Rail..

हरिहर किले से नासिक निकटतम रेलहेड है। आप नासिक जंक्शन और फिर वहां से हरिहर किले के आधार के लिए एक टैक्सी ले सकते हैं। 

By Road..

जैसा कि हरिहर किला एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है, इसे सड़क मार्ग से नहीं पहुँचा जा सकता है।

आप टैक्सी किराए पर लेकर या बस पकड़कर इसके आधार तक पहुँच सकते हैं और फिर वहाँ से किले के शिखर तक पहुँचने के लिए आपको रॉक-कट कदम उठाकर पहाड़ी को ट्रेक करना होगा।

Conclusion

Harihar Gad – यह आर्टिकल मैंने मेरे दोस्तों के अनुभव और ऑन लाइन रिव्यूज़ की मदद से लिखा हुवा है।

अगर आप इस फॉल के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को इस जगह के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

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आप के सुझाव मुझे और ज्यादा अच्छे आर्टिकल लिखने की प्रेरणा देंगे।

आशा करता हूँ की आप को आर्टिकल में दी गई जानकारी यहाँ पर घूमने आने के समय जरूर से मदद करेगी। 

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Rajnikant · September 20, 2020 at 9:31 pm

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