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Junagadh Girnar – जूनागढ़ गिरनार गुजरात राज्य की सबसे ऊँचा और सबसे पवित्र पर्वत है जिसके बारे में आज हम इस आर्टिकल में विस्तार से जानते है।

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Junagadh Girnar - जूनागढ़ गिरनार

भारत देश के पश्चिम में आए हुवे राज्य गुजरात जूनागढ़ शहर में यह गिरनार पर्वत आया हुवा है जिसका प्राचीन नाम “गिरिनगर” हुवा करता था।

गिरनार पर्वत का महत्व आध्यात्मिक रूप से बहोत ही ज्यादा है। माना जाता है यहाँ पर सभी देवताओं का वास है। जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर नेमिनाथ ने भी यहाँ पर मोक्ष की प्राप्ति की थी।

गिरनार पर्वत को हिमालय से भी पुराना माना जाता है। यहाँ पर आये हुवे जैन मंदिर देश में आए हुवे प्राचीन मंदिरों में से एक है।

यहाँ पर कई पहाड़ियां आयी हुवी है जिन पे मुख्य रूप से हिंदू और जैन धर्म के कई मंदिर बने हुवे है। जिसकी वजह से गिरनार हिल पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

गिरनार हिल पर जैन तीर्थंकर नेमिनाथ, गोरखनाथ, अंबामाता शिखर, गुरु दत्तात्रेय शिखर, और कालका शिखर प्रमुख शिखर है।

यहाँ की सबसे ऊँची चोटी 3666 फुट ऊँची है। इस पर्वत की शीर्ष चोटी तक पहुँचने के लिए आप को करीब 9000-10000 कदम चढ़ने पड़ेंगे।

Junagadh Girnar History - जूनागढ़ गिरनार हिस्ट्री

Junagadh Girnar 6

सौराष्ट्र में कई वंशों ने सदियों तक शाशन किया जिसमे मौर्य वंश, ग्रीक वंश,क्षत्रप वंश और गुप्त वंश प्रमुख है। 

मगध के नंदवंश का नाश करने के बाद और गणराज्यो को ख़तम करके पुरे भारत को एक शाशन देने वाले मौर्य वंश के शाशक चंद्रगुप्त मौर्य ने इसा पूर्व 322 में पूरा सौराष्ट्र जीत लिया और उस समय के सौराष्ट्र के पाटनगर जूनागढ़ में पुष्यगुप्त नामका अपना सूबा रखा था जिसने वहां की बागडौर संभाली। 

उन्होंने अपने शाशन में सुदर्शन सरोवर का निर्माण करवाया था।

सम्राट अशोक के तुसाच्य नाम के सूबे ने उसमे नहरों का निर्माण करवाया था और पानी के सिंचाई की एक अच्छी व्यस्था दी थी।

स्कंदगुप्त के सूबे पर्णदत्त ने अतिवृस्ति के कारन टूट गए यही सुदर्शन तालाब का पुनः निर्माण करवाया था।

मौर्य वंश के शाशकों द्वारा पत्थरों पर लिखवाये गए शिलालेख आज भी पूरी दुनिया में जाने जाते है। और गिरनार की ऐसी ही कई आध्यात्मिक और पुरातात्विक विशेषताओं ने गिरनार को भारत के साथ साथ पूरी दुनिया में प्रसिद्धि दिलवाई है। 

समय समय के अंतराल में इस गिरनार हिल को कई अलग अलग नाम से पहचाना जाता था।

मौर्य काल में इस गिरनार हिल को रैवतक,रैवत, उज्जयंत वगैरे नाम से जाना जाता था।

Maury Vansh - मौर्य वंश

  • चंद्रगुप्त मौर्य – इसा पूर्व 322-298
  • बिन्दुसार – 298-272
  • सम्राट अशोक – 273-232
  • दशरथ मौर्य – 232-224
  • संप्रति – 224-215
  • शैलीशुक्ला – 215-202
  • देववर्मन – 202-195
  • शताधवान – 195-187
  • बृहद्रथ मौर्य – 187-185.

Junagadh Girnar Hill Information - जूनागढ़ गिरनार हिल इन्फॉर्मेशन

गिरनार हिल जूनागढ़ शहर से करीब 5 किमी उतर की और आया हुवा पर्बतों का समूह है। इस पर्वत में सिद्ध चोर्यासी की बैठक है।

गिरनार पर्वत में कुल 4 ऊँचे शिखर आये हुवे है। जो इस प्रकार है।

  1. गुरु दत्तात्रेय शिखर – पांचवी टूंक – 3660 फुट ( 7500-9000 सीढियाँ )
  2. गोरखनाथ शिखर – 5800 सीढियाँ
  3. अम्बाजी शिखर – 5000 सीढियाँ
  4. जैन मंदिर शिखर – 4000 सीढियाँ

यहाँ की सीढियाँ पत्थरों से अच्छी तरह बनी हुवी है जो आप को एक शिखर से दूसरे शिखर तक ले जाती है।

ऐसा मन जाता है की यहाँ पर करीब 9000 सीढियाँ बनी हुवी है जिसे चढ़के आप गिरनार पर्वत की सबसे ऊँची पांचवी चोटी दत्तात्रेय शिखर तक पहुँच सकते हो।

समय के साथ जूनागढ़ पर कई राजाओं ने राज किया। करीब सन 1152 में तब के राजा कुमारपाल ने गिरनार को चढ़ने के लिए अच्छीतरह से सीढ़ियों का निर्माण करवाया था जो समय के साथ आज बहोत ही अच्छी तरह बनाये गए है जिससे श्रद्धालु अपने आराध्य देव या देवी के दर्शन अच्छे से कर सकें।

Junagadh Girnar Atmospher - जूनागढ़ गिरनार वातावरण

कहीं भी घूमने जाने से पहले अगर आप उस जगह का वातावरण जान लें तो आप उस जगह का आनंद अच्छे से और काम तकलीफ में उठा सकते है।

और जब आप कोई ऊँची चढ़ाई चढ़ रहे हो तो वहां का तापमान, हवा की गति,बारिश की संभावना वगैरा चेक करना अत्यंत जरुरी है।

आप अगर जूनागढ़ का हाल का तापमान जानना चाहते हो तो यहाँ से जान सकते है।

How to climbed Girnar Hill? - गिरनार हिल पर कैसे चढ़ें ?

गिरनार पर्वत के चढ़ाई के दो मुख्य तरीके है।

  1. पैदल चलके
  2. पालखी सेवा का उपयोग करके।

राज्य सरकार द्वारा गिरनार हिल पर रोप वे सुविधा का निर्माण सुरु हो चूका है जो करीब 1 साल में कार्यरत हो जाएगी जिससे आप आसानी से गिरनार पर्वत पर दर्शन हेतु आ सकोगे।

Junagadh Girnar 2

पैदल चलके

अगर आप पैदल चलने गिरनार पर्वत में आए हुवे धार्मिक स्थलों के दर्शन की इच्छा रखते हो तो मेरे खुद के अनुभव से कुछ आसान तरीके बताता हु जिससे आप कम थकावट में गिरनार की सबसे ऊँची चोटी तक पहुँच कर वापिस आ जाएंगे।

सबसे पहले जिस दिन आप गिरनार चढ़ने की इच्छा रखते हो उसके आगे वाले दिन आप जूनागढ़ पहुँच जाएँ और गिरनार पर्वत की तलहटी जहाँ भगवान शंकर का पौराणिक मंदिर आया हुवा है उस भवनाथ में आश्रम में रुक जाएँ। 

आप उस दिन जूनागढ़ में आयी हुवी जगहों को देख लीजिये जिसके बारे में मैंने एक आर्टिकल जूनागढ़ में देखने लायक जगहें विस्तार से लिखा हुवा है। 

जिसकी लिंक में दे रहा हूँ आप यहाँ आने से पहले उसे एक बार जरूर से पढ़ ले जिससे आप को यहाँ की देखने लायक सारी जगहों के बारे में जानकारी मिल जाएगी जिससे आप अपने रूचि के अनुसार जगहे पसंद करके उसे कम समय में देख सकते हो।

Read More : Places to visit in Junagadh

उसके बाद रात में हल्का भोजन लेने के बाद हो सके तो 9 बजे के करीब सो जाइये क्यूंकि आप को रात को 3 बजे से गिरनार हिल की चढाई सुरु कर देनी है। 

आप के मन में यह विचार जरूर से आएगा की अरे भाई आधी रात में क्यों? और रात में चढ़ाई सेफ है क्या ?

तो उसका उत्तर यह है की पहले बताया उस तरह गिरनार हिल गुजरात का सबसे ऊँचा पर्वत है और दत्तात्रेय टूंक तक पहुँचने के लिए आप को करीब 8 से 10000 सीढियाँ चढ़नी पड़ेगी जिसे चढ़ने के लिए एक सामान्य व्यक्ति को करीब 4 से 5 घंटे लग जाते है।

तो आप 3 बजे सुरु करेंगे तो सुबह सूर्योदय के समय तक आप ऊपर चोटी तक पहुँच गए होंगे। दूसरा के रात में चढ़ाई करने में कम थकावट लगेगी जब की सूर्योदय के बाद वह चढ़ाई ज्यादा मुश्किल हो जाती है।

अब दूसरा सवाल की रात में चढ़ाई सेफ है ? उसका जवाब है की हाँ बिलकुल सेफ है। यहाँ पर श्रद्धालु पूरी रात चढ़ाई करते है इस लिए आप के साथ कोई न कोई तो होगा ही जो चढ़ाई कर रहा होगा। 

साथ में यहाँ पर कुछ कुछ अंतर पे लाइट और दुकाने भी चालू ही होती है जिससे आप को अँधेरे का सामना उतना ज्यादा नहीं करना पड़ेगा।

और एक मुख्य बात आप अपने साथ लकड़ी जरूर से ले ले जो भवनाथ तलहटी में और गिरनार हिल के रस्ते में भी मिल जाती है जो वहां के लोग रेंट में करीब 20 या 30 रुपये में दे देते है। गिरनार चढ़के आप उसे वापिस कर सकते हो।

लकड़ी लेना अत्यंत आवश्यक है क्यूंकि वह आप के तीसरे पेअर का काम करेगी जिससे आप को लगने वाली थकावट बहोत ही कम हो जाती है।

और अगर आप साथ में निम्बू शरबत ले सकें तो और भी अच्छा रहेगा। वैसे रस्ते में वह हर जगह मिल जायेगा अगर आप साथ लेना न चाहो तो।

हो सके उतना कम सामान अपने साथ रखिये। बाकि का सामान निचे आश्रम में ही रहने दीजिये।

गिरनार हिल के धार्मिक स्थलों के दर्शन कैसे करें ?

अगर आप आधी रात में मैंने बताया उस तरह गिरनार की चढ़ाई शुरू करोगे तो रस्ते में आने वाले लगभग सारे मंदिर बंद मिलेंगे। आप को सबसे पहले केवल पांचवी टूंक याने दत्तात्रेय शिखर तक पहुँचने का प्लान करना है। 

बताया उस तरह चढ़ाई करने से आप करीब ४-५ घंटे में सूर्योदय होने के समय सबसे ऊँची चोटी तक पहुँच जायेंगे। वहां दर्शन करने के बाद वापिस लौटते समय सारे मंदिर दर्शन के लिए खुल जायेंगे तो आप वापिस लौटते समय अगर वहां जाने का प्लानिंग करें तो ज्यादा बहेतर रहेगा।

पालखी सेवा का उपयोग करके

और अगर आप गिरनार चढ़ने में सक्षम नहीं है और अगर आप को दर्शन करने की इच्छा प्रबल है तो दूसरा रास्ता यह है की आप यहाँ की पालखी सेवा का उपयोग करके दर्शन कर सकते है।

दूसरी जगहों की तरह यहाँ भी पहले आप का वजन किया जायेगा और उसके मुताबिक भाव पत्रक पहले से यहाँ पर लागु किया गया है उसके मुताबिक ही यहाँ पर सारे पालकी वाले आप से पैसे ले सकते है। 

उस पुरे भाव पत्रक की इमेज में निचे दे रहा हूँ जिसे आप पढ़ सकते है जिससे आप को ज्यादा जानकारी मिल जाएगी।

Junagadh Girnar

Places to visit in Junagadh Girnar hill-जूनागढ़ गिरनार हिल में देखने लायक जगहें

आर्टिकल में आगे बताया उस तरह गिरनार में मुख्य 4 चोटी है जिसके बारे में आइये थोड़ा विस्तार से जानते है।

Neminath toonk (Jain Mandir Shikhar) - नेमिनाथ शिखर

Junagadh Girnar-Neminath Shikhar

गिरनार चढ़ने  के लिए जहाँ से सीढियाँ शुरू होती है उस जगह को भवनाथ तलेटी कहते है। वहां से सीढियाँ चढ़ने की शुरुवात करते है तब रास्ते में पांडव देरी,हनुमान आम्बली,धोड़ी देरी,काली देरी और भड़थरी नी गुफा जैसे स्थान आते है। 

वहां से आगे बढ़ते हुवे माली परब की जगह आती है जहाँ पर 13 वीं सदी में बना हुवा कुंड आता है। वहां से आगे बढ़ते ही जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर नेमिनाथ की टूंक आती है।

गिरनार तलेटी से चढ़ाई सुरु करने के बाद करीब 4000 सीढियाँ चढ़ने के बाद सबसे पहेला शिखर आता है जिसे जैन मंदिर शिखर के नाम से जाना जाता है। क्यूंकि…

यहाँ पर बने मंदिरों में सबसे प्राचीन मंदिर गुजरात नरेश कुमारपाल के समय का बना हुवा है। दूसरा मंदिर वस्तुपाल और तेजपाल नामक भाईओं ने बनवाया था। जिसे तीर्थंकर मल्लिनाथ का मंदिर कहते है।

तीसरा मंदिर यहाँ पर नेमिनाथ का है जो सबसे बड़ा और भव्य मंदिर है। 

सम्मेद शिखर ( झारखंड ) और पालीताना के बाद यह शिखर जैन धर्म के सबसे मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक है।

जैन ग्रंथों में मिलता है की जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर नेमिनाथ का विवाह जूनागढ़ की राजकुमारी राजन के साथ तय हुवा।

जब नेमिनाथ बारात लेकर पहुँचे तब उन्होंने वहां पर कुछ पशुओं को बंधा देखा। 

जिसके बारे में पूछने पर पता चला के कुछ राजाओं के लिए उसको भोजन के लिए पकाया जायेगा। जिसे सुन कर नेमिनाथ को वैराग्य हुवा और वह गिरनार पर्वत पर तपस्या करने चले गए जहाँ पर उनका निर्वाण यानि की मोक्ष प्राप्ति हुवी।

आइये थोड़ा जैन धर्म के बारे में संक्षिप्त में जान लेते है।

यहाँ पर हम तीर्थंकर,पंचकल्याणक,तीर्थंकर नामकर्म और जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के बारे में संक्षिप्त में जान लेते है।

जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर है। 

Jain Dharm - जैन धर्म

जैन धर्म भारत के सबसे पुराने हिंदू धर्मों में से एक है। जिसके बारे में संक्षिप्त में बात करना मुश्किल है इस लिए में यहाँ पर जैन धर्म के सिर्फ तीर्थंकरों के बारे में ही बात करूँगा। जिससे आप उनके बारे में थोड़ा ज्यादा समज सकें।

जैन धर्म के विभिन्न तीर्थंकरों के “पंचकल्याणकों” के लिए गिरनार हिल को प्रमुख तीर्थों में से एक माना जाता है।

A) Tirthankar Panchkalyanak - तीर्थंकर पंचकल्याणक

पंचकल्याणक :

“पंचकल्याणक” जैन धर्म में तीर्थंकर के जीवन में होने वाली पांच प्रमुख सुबह घटनाएं है। जिसे कई जैन धार्मिक अनुष्ठान और त्योहारों के हिस्से के रूप में याद किया जाता है।

पंचकल्याणक जैन ग्रन्थों के अनुसार सभी तीर्थंकरों के जीवन में घटित होते है। 

यह पाँच कल्याणक इस प्रकार है :

  1. गर्भ कल्याणक : जब तीर्थंकर प्रभु की आत्मा माता के गर्भ में आती है।
  2. जन्म कल्याणक : जब तीर्थंकर बालक का जन्म होता है।
  3. दीक्षा कल्याणक : जब तीर्थंकर सब कुछ त्यागकर वन में जाकर मुनि दीक्षा ग्रहण करते है।
  4. केवल ज्ञान कल्याणक : जब तीर्थंकर को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  5. मोक्ष कल्याणक : जब भगवान शरीर का त्यागकर अर्थात सभी कर्म नष्ट करके निर्वाण/ मोक्ष को प्राप्त करते है।

इन पाँच कल्याणकों को पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

B) Tirthankar Namkarm - तीर्थंकर नामकर्म

जिस कर्म के बंध से तीर्थंकर पद की प्राप्ति होती है, उसे नामकर्म कहते है। जैन ग्रंथों के अनुसार निम्नलिखित सोलह भावनाएं तीर्थंकर नामकर्म के आस्रव का कारण है।

  • दर्शन विशुद्धि
  • विनय सम्पत्रता
  • शील और व्रतों में अनतिचार
  • निरन्तर ज्ञानोपयोग
  • सवेंग अर्थात् संसार से भयभीत होना
  • शक्ति के अनुसार त्याग और तप करना
  • साधुसमाधि
  • वैयावृत्ति करना
  • अरिहन्त आचार्य-बहुश्रुत (उपाध्याय) और प्रवचन (शास्त्र) के प्रति भक्ति
  • आवयशक में हानि न करना
  • मार्ग प्रभावना
  • प्रवचन वात्सल्य

C) 24 Tirthankar - 24 तीर्थंकर

1 Purva = 8,400,000 x 8,400,000 or 70,560,000,000,000 years

  1. Rishabhanatha (Adinatha)- ऋषभदेव (8,400,000 Purva)
  2. Ajitanatha – अजितनाथ (7,200,000 Purva)
  3. Sambhavanatha – सम्भवनाथ (6,000,000 Purva)
  4. Abhinandananatha – अभिनंदन जी (5,000,000 Purva)
  5. Sumatinatha – सुमतिनाथ जी (4,000,000 Purva)
  6. Padmaprabha – पद्ममप्रभु जी (3,000,000 Purva)
  7. Suparshvanatha – सुपार्श्वनाथ जी (2,000,000 Purva)
  8. Chandraprabha – चंदाप्रभु जी (1,000,000 Purva)
  9. Pushpadanta (Suvidhinath) – सुविधिनाथ (2,00,000 Purva)
  10. Shitalanatha – शीतलनाथ जी (1,00,000 Purva)
  11. Shreyanasanatha – श्रेयांसनाथ (84,00,000 Years)
  12. Vasupujya – वासुपूज्य जी (72,00,000 Years)
  13. Vimalanatha – विमलनाथ जी (60,00,000 Years)
  14. Anantanatha – अनंतनाथ जी (30,00,000 Years)
  15. Dharmanatha – धर्मनाथ जी (10,00,000 Years)
  16. Shantinatha – शांतिनाथ जी (1,00,000 Years)
  17. Kunthunatha – कुंथुनाथ जी (95,000 Years)
  18. Aranatha – अरनाथ जी (84,000 Years)
  19. Mallinatha – मल्लिनाथ जी (55,000 Years)
  20. Munisuvrata – मुनिसुव्रत जी (30,000 Years)
  21. Naminatha – नेमिनाथ जी (10,000 Years)
  22. Neminatha – अरिष्ट नेमिनाथ जी (1000 Years)
  23. Parshvanatha – पार्श्वनाथ जी (100 Years)
  24. Mahavira – वर्तमान तीर्थंकर महावीर स्वामी (72 Years)

Junagadh Girnar

Ambaji Toonk - अंबाजी टूंक

नेमिनाथ शिखर से आगे चढ़ाई करके करीब 1000 और सीढियाँ चढ़ने के बाद गिरनार पर्वत का दूसरा बड़ा शिखर आता है जिसका नाम अंबाजी शिखर है। जो करीब 3300 फ़ीट की ऊंचाई पर आया हुवा है।

इस चोटी पर माता शक्ति अंबाजी का मंदिर आया हुवा है। गिरनार आने वाले सारे यात्रिक सब शिखर नहीं चढ़ पाते है। लेकिन वो अगर जैन है तो नेमिनाथ शिखर और अगर हिंदू है तो अंबाजी माता शिखर तक जरूर से आते है और माता के दर्शन करके धन्यता का अनुभव करते है।

गुर्जर शैली में बना पश्चिम दिशा के द्वार वाला यह मंदिर अपना एक विशेष महत्व रखता है। 

Guru Gorakhnath Shikhar - गुरु गोरखनाथ शिखर

माता अंबा के दर्शन करने के बाद गिरनार हिल और राज्य की सबसे ऊँची चोटी गोरखनाथ टूंक आती है जिसकी ऊंचाई करीब 3600 फ़ीट है।

यहाँ पर नाथ संप्रदाय के नव नाथ में से एक गोरखनाथजी का धुना और उनकी चरण पादुका आयी हुवी है।

यहाँ से कुछ सीढियाँ निचे उतरने के बाद कमंडल कुंड आता है जहाँ पर एक गुफा, दत्तात्रेय भगवान का मंदिर आया हुवा है जहाँ पर दत्तात्रेय भगवान का धुना आया हुवा है।

यहाँ पर अन्न क्षेत्र नियमित रूप से चलता है जहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद भोजन दिया जाता है।

Dattatrey Shikhar - दत्तात्रेय शिखर

Junagadh Girnar-Dattatrey Shikhar

गोरखनाथ शिखर से दत्तात्रेय शिखर तक पहुँचने का रास्ता थोड़ा कठिन है। वैसे तो यहाँ पर सीढियाँ अच्छी तरह से बानी हुवी है लेकिन चढ़ाई खड़ी है जिसकी वजह से ज्यादा कठिन है। और सीढियाँ थोड़ी फिसलन भरी है जिसकी वजह से आप को कदम संभाल कर रखने पड़ेगे। आप बगैर जूते या चप्पल से अगर ये चढ़ाई करें तो ज्यादा बहेतर रहेगा।

यहाँ पर आया हुवा दत्तात्रेय का मंदिर त्रेतायुग समय का है जिसका मतलब यह मंदिर भगवान राम के जन्म के पहले का है।

ऐसा मन जाता है की ब्रह्मा,विष्णु और महेश के एक मात्र स्वरुप दत्तात्रेय भगवान ने यहाँ पर करीब 12000 सालों तक तप किया था।

जिसके चरण चिह्न यहाँ पर स्थापित है जिसके दर्शन करके श्रद्धालुओं को धन्यता का अनुभव होता है।

यहाँ पर आये हुवे एक घंट को तीन बार बजाने की भी मान्यता है।

इस शिखर से भी आगे एक और शिखर आया हुवा है जिसे कलिका शिखर के नाम से जाना जाता है जहाँ माता कलिका बिराजित है। 

लेकिन वहां तक पहुँचने के लिए सीढियाँ नहीं है। इस लिए दत्तात्रेय शिखर से ही आप को इस शिखर के दर्शन करने पड़ेंगे।

इस दत्तात्रेय शिखर से दूर तक फैला जंगल आप को कुदरत की सुंदरता का एहसास दिलाता है।

वैसे यहाँ से वापिस मुड़ने के बाद आप रास्ते में देखने बाकि रहगये स्थानों को देख सकते है।

Best Time to Visit Junagadh Girnar-जूनागढ़ गिरनार घूमने का सबसे अच्छा समय

जूनागढ़ गिरनार घूमने का सबसे अच्छा समय सिर्फ शर्दियों का है। क्यूंकि बारिश के मौसम में चढ़ाई सेफ नहीं और गर्मियों में चढ़ाई ज्यादा तकलीफ देह है। 

तो अगर आप गिरनार चढ़ना चाहते हो तो शर्दियों ला मौसम यानि की नवंबर से लेकर मार्च तक का समय पसंद करें।

How to reach Junagadh Girnar?-जूनागढ़ गिरनार पर्वत कैसे पहुंचे?

By Road :

जूनागढ़ रोड द्वारा गुजरात के दूसरे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। जिनमे से कुछ प्रमुख शहरों से दूरी इस प्रकार है..

  • अहमदाबाद – करीब 330 किमी
  • राजकोट – करीब 100  किमी
  • पोरबंदर – करीब 115 किमी

आप को बस द्वारा आते समय जूनागढ़ मजेवडी चौक उतर जाना है जहाँ से करीब 5 किमी की दूरी पर गिरनार पर्वत की तलेटी जिसे भवनाथ तलेटी के नाम से जाना जाता है वहां पहुंचना है।

आप को मजेवडी चौक से लोकल रिक्षा मिल जायेगा जिसकी मदद से आप आसानी से भवनाथ तलेटी पहुँच सकते हो।

By Air :

जूनागढ़ का खुद का कोई हवाई अड्डा नहीं है। यहाँ से नजदीकी हवाईअड्डा राजकोट है जो यहाँ से करीब 102 किमी की दूरी पर आया हुवा है। जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुवा है।

जहाँ से आप को राज्य सरकार परिवहन की बसें, प्राइवेट वॉल्वो बसें, रेल्वे, टेक्सी या कैब की मदद से आसानी से जूनागढ़ पहुँच सकते है।

By Rail :

जूनागढ़ का खुद का रेल्वे स्टेशन है जो राज्य एवं देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुवा है। जूनागढ़ भारतीय रेल्वे के पश्चिमी रेल्वे नेटवर्क पर स्थित है। कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें हैं जो रोज़ाना संचालित होती हैं और राजकोट से जूनागढ़ की यात्रा के लिए एकदम सही हैं।

जूनागढ़ रेल्वे स्टेशन से आप लोकल व्हीकल द्वारा यहाँ तक आसानी से पहुँच सकते हो।

Where to stay in Junagadh Girnar ?- जूनागढ़ गिरनार में कहाँ पर रुकें?

जूनागढ़ में रहने के दो विकल्प है।

  1. आश्रम या धर्मशाला 
  2. प्राइवेट होटल्स

A. आश्रम या धर्मशाला :

जूनागढ़ में कई जैन देरासर,हिंदू मंदिर,मुस्लिम मकबरा,बौद्ध गुफाएं आए हुवे है जिनकी वजह से जूनागढ़ सभी धर्म के लोगों के लिए एक पवित्र यात्रा धाम है। 

इस लिए यहाँ पर बहोत सारे आश्रम और धर्मशालाएं आयी हुवी है जहाँ पर आप को आसानी से सस्ते दामों में रूम मिल जायेंगे। 

लेकिन जूनागढ़ में मुख्य मनाये जाने वाले तहेवारों में भगवान शंकर के भवनाथ का महाशिवरात्रि का मेला और देव दिवाली जो कार्तिक पूर्णिमा में होती है तब साल में सिर्फ एक बार ही होने वाली 5 दिनों की लिली परिक्रमा जो पुरे गिरनार की होती है उस समय यहाँ पर भक्तों का काफी जमावड़ा होता है। 

इस लिए यह समय में अगर आप को यहाँ पर घूमने आना है तो आप को करीब २० से २५ दिन पहले ही रूम बुक करवाने होंगे वार्ना यहाँ पर रूम मिलना बहोत ही मुश्किल होगा।

B. प्राइवेट होटल्स :

अगर आप आश्रम या कोई धर्मशाला में रुकना नहीं चाहते तो यहाँ पर कई सारी प्राइवेट होटल्स भी आयी हुवी है जहाँ पर आप रूम  ऑनलाइन भी बुक कर सकते हो। होटल्स ढूंढने के लिए में कुछ लिंक दे रहा हूँ जहाँ से आप अपनी जरूरियात के मुताबिक होटल्स ढूंढ सकते हो।

Junagadh Girnar– यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

अगर आप गिरनार हिल के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को गिरनार हिल के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

अगर आप को यह आर्टिकल में दी गयी जानकरी उपयोगी लगी हो तो अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कीजिये। और मेरी इस वेबसाइट को जरूर से सब्सक्राइब कर लीजिये जिससे आगे आने वाले ऐसे और भी कई आर्टिकल का नोटिफिकेशन आप को मिल सके।

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

3 Comments

JamesHebra · April 28, 2020 at 1:00 am

I like browsing your website. Regards!

Top 18 Places to Visit in Junagadh Full Information HIndi 2020-travellgroup · April 23, 2020 at 8:12 pm

[…] विस्तार से पढ़ें : गिरनार हिल […]

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