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Kumbhalgarh Fort Rajasthanकुम्भलगढ़ किला राजस्थान के पांच पहाड़ी किलों में से एक है जिसे UNESCO ने 2013 में विश्व धरोहर घोषित किया गया था। तो आइये आज हम उसी अजेय कुम्भलगढ़ किले के बारे में विस्तार से बात करते है।

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Things to See in the Kumbhalgarh Fort Complex - कुंभलगढ़ किले के परिसर में देखने लायक चीजें..

विशाल किला परिसर में कई अच्छी तरह से संरक्षित संरचनाएं हैं जो अपने समृद्ध अतीत की गाथा को बयान करती हैं। कुंभलगढ़ में देखने वाली चीजों में शामिल हैं।

  1. कुंभा महल – राजा का निवास स्थान
  2. बादल महल – राणा फतेह सिंह द्वारा निर्मित दो मंजिला ईमारत 
  3. राम पोल – किले का मुख्य प्रवेश द्वार
  4. अरेथ पोल, हनुमान पोल और हल्ला पोल – किले के अन्य प्रमुख द्वार
  5. बादशाही बावड़ी- पानी की टंकी
  6. लाखोला टैंक – राणा लाखा द्वारा निर्मित 
  7. हिन्दू मंदिर – प्राचीन गणेश मंदिर और नील कंठ महादेव मंदिर
  8. जैन मंदिर – पारस नाथ मंदिर, गोलरा जैन मंदिर, ममदेव मंदिर, माताजी मंदिर, सूर्य मंदिर, और पिटल शाह जैन मंदिर 
  9. छत्रिस,बौरिस और पानी के जलाशय

इस आर्टिकल में हम,

  1. कुंभलगढ़ किला..
  2. किले का विश्लेषण..
  3. किले की दिवार की लम्बाई और उसकी एक दिलचस्प कहानी..
  4. किले में सांस्कृतिक महत्वता..
  5. किले में प्रदर्शित लाइट & साउंड शो..
  6. किले में आयोजित वार्षिक महोत्सव..
  7. किले का इतिहास..
  8. किले के टाइमिंग्स, फीस ,देखने में लगता समय..
  9. कब जाना बहेतर रहेगा..
  10. किले तक कैसे पहुंचे..
  11. कहाँ पर भोजन ले और कहाँ पर रुके..
  12. वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और 
  13. किले की जरुरियतों के बारे में बात करेंगे।

Kumbhalgarh Fort Rajasthan full information in Hindi

Kumbhalgarh Fort - कुंभलगढ़ किला ..

kumbhalgarh Fort Rajasthan

Image Credit : Needpix

चीन की दिवार, की जो दुनिया की सबसे लंबी दिवार के रूप में जानी जाती है। लेकिन चीन के बाद दूसरी लंबी दिवार कौन सी है वो कई लोग नहीं जानते। 

तो आइये आज हम दुनिया की दूसरी लंबी दिवार जिस कुम्भलगढ़ किले को घेरे खड़ी है उसी कुम्भलगढ़ किले की थोड़ी जानकारी शेयर करते है।

यह कुम्भलगढ़ किला पश्चिमी अरावली पहाड़ियों पर स्थित है। इस किले को UNESCO ने विश्व धरोहर घोषित किया है। जो राजस्थान के समूह हिल फॉर्ट्स के अधीन है।

UNESCO द्वारा घोषित राजस्थान के 6 किले..

जून 2013 के दौरान नोम पेन्ह में विश्व धरोहर समिति की 37 वीं बैठक के दौरान राजस्थान के छह किलों को विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया गया था। जिनमें..

  1. जैसलमेर किला(विस्तार से पढ़ें),
  2. कुंभलगढ़ किला,
  3. चित्तौड़गढ़ किला, 
  4. गागरोन किला, 
  5. अंबर किला, और 
  6. रणथंभौर किला आता है। जो राजपूत सांस्कृतिक संपति और राजपूत सैन्य पहाड़ी वास्तुकला को मुख्य रूप से प्रस्थापित करता है।

अरावली पर्वतमाला की तलेटी पर निर्मित यह किला 13 पर्वतमाला से घिरा हुवा है। कुम्भलगढ़ किला एक जंगल के बीच बना हुवा है जिसे एक वन्य जीव अभ्यारण में तब्दील कर दिया गया है।

चितौड़गढ़ किले के बाद यह किला राजस्थान का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मेवाड़ किला हुवा करता था।

कुम्भलगढ़ किला 15 वीं शताब्दी में राजा कुंभा द्वारा बनाया गया था। राजस्थान में कुम्भलगढ़ भारत के कुछ किलों में से एक है जो आज तक अजेय है।

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Kumbhalgarh Fort Information- कुम्भलगढ़ किले का विश्लेषण ..

kumbhalgarh Fort
Kumbhalgarh Fort

यह कुम्भलगढ़ किला समुद्र तल से करीब 1100 मीटर याने 3600 फ़ीट की ऊंचाई पर बना हुवा है। 

इस किले की रक्षा करती एक दिवार बनी हुवी है जो करीब 36 किमी लंबी है। जो दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दिवार है।

इस किले ऊपर की दीवारें करीब 15 फ़ीट मोटी है और कीलें के चरों और 7 किलेबंद द्वार है। जिसमे से पहला हनुमान पोल है। दूसरा आरेठ पोल और तीसरा हल्ला बोल पोल जहाँ दुश्मन को हल्ला बोल करके यहीं रोका जाता था।

किले में करीब 360 मंदिर आये हुवे है जिनमे से करीब 300 जैन मंदिर है और बाकि के 60 हिन्दू मंदिर है।

इस किले के ऊपर से थार रेगिस्तान को अच्छे से देखा जा सकता है।

इस किले ने कई सारे युद्ध देखे है लेकिन किसी ने इस किले को जीता नहीं है इस लिए यह किला अजेय है।

इस किले में एक टैंक आयी हुवी है जो बहुत ही प्रसिद्ध है जिसका निर्माण राणा लाखा द्वारा करवाया गया था।

किले में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुवे इस कीलें में ऊँचे स्थानों पर आवास, महल और मंदिरें बनाये गए थे। 

समतल प्रदेश को खेतीवाड़ी के लिए उपयोग में लिया जाता था और ढलान वाले भागों को जलाशयों के रूप में निर्मित किया गया था। 

ऐसी संरचना किले को स्वावलम्बी बना देती थी। मतलब के जीने की सारी जरुरियतों की पूर्ति के लिए किले के अंदर ही कुदरती रूप से व्यस्था की गयी थी।

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Kumbhalgarh Fort wall lenth - कुम्भलगढ़ कीलें की दिवार की लम्बाई कितनी है ?

The Great Wall of Kumbhalgarh Fort

कुम्भलगढ़ की दिवार पुरे किले किले को घेरे हुवे है जो किले को आज तक अजेय बनाये हुवे है।

चीन में आयी हुवी दिवार दुनिया की सबसे लंबी दिवार है। जिसकी लम्बाई अपनी सभी शाखाओं सहित 8,851.8 कि॰मी॰ (5,500.3 मील) तक फैली है।

जब की कुम्भलगढ़ किले की यह दिवार दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दिवार है। जिसकी लम्बाई करीब 36 किमी की है।

इस दिवार की बनावट के बारे में बात करें तो यह दिवार इतनी चौड़ी है की इस पर एक साथ 8 घोड़े दौड़ाये जा सकते है।

यह दिवार पत्थर की ईंटो से बनी हुवी है इस लिए इसे भेदना नामुमकिन रहा। यहाँ तक की सम्राट अकबर भी इस दिवार को भेद नहीं पाए।

An interesting Story behind the Wall - किले की इस बेजोड़ दिवार की एक दिलचस्प कहानी..

Kumbhalgarh Fort_Sant Bhairav Temple

इस किले की दिवार के लिए एक वार्ता यहाँ की लोक वयका में प्रचलित है की जब राणा कुंभा ने 1443 में इस कीलें और दिवार का निर्माण करवाना शुरू किया तब जैसे जैसे किले का निर्माण आगे बढ़ा वैसे वैसे किले की दीवारे किसी न किसी कारन वह ढह जाती थी।

जिसका उपाय जानने के लिए उन्होंने उस समय के एक महान संत भैरव को बुलाया और उनको घटित सारी बातें विस्तार से बताई।

तब भैरव ने इस तकलीफ का  कारण देते हुवे कहा की यहाँ पर एक देवी का वास है और वो नहीं चाहती की यहाँ पर यह निर्माण हो।

जो सुन कर राणा चिंतित हो गए।इस तकलीफ का समाधान बताते हुवे उन्होंने कहा की देवी इस काम को तभी आगे बढ़ने देगी जब कोई इंसान अपने आप को मानव बलि के लिए स्वेच्छा से राजी हो।

तब राजा और चिंतित हो गए क्यूंकि कौन इंसान ऐसा होगा जो खुद की बलि अपनी मर्जी से देगा?और संत बोले की आप चिंता न करें वो खुद अपनी बलि अपनी मर्जी से देंगे। और उन्होंने राजा से इस बात के लिए अग्ना मांगी।

उन्होंने कहा की उनको इस पहाड़ी पर चलने दिया जाए और जहाँ वह रुके वहां उसे मार दिया जाए और देवीमा का एक मंदिर उसी जगह पर बनाया जाए।

संत की बात को मानते हुवे राजा ने वैसा ही किया। संत 36 किमी चलने के बाद रुक गए और उसी जगह उनका शर धड़ से अलग कर दिया गया।

उनका जहाँ शर गिरा वहां किले का मुख्य द्वार है।

इस किले का निर्माण पूरा होते करीब 15 साल लगे थे।

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Kumbhalgarh Fort Cultural - कुम्भलगढ़ किले की सांस्कृतिक महत्वता क्या है ?

Kumbhalgarh Fort_02
Kumbhalgarh Fort_01
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यह किला महाराणा प्रताप की जन्मभूमि है जो मेवाड़ के उस समय के सबसे शक्ति शाली राजाओं में से एक थे।

इसी महल में महाराणा प्रताप का जन्म हुवा था। महल के इस कमरे में महाराणा प्रताप का जन्म हुवा था। 

संरक्षण हेतु फ़िलहाल यहाँ अंदर कमरे में जाना बाधित है।

Kumbhalgrah Fort_Badal mahal_01

इस किले में एक बादल महल भी आया हुवा है जिसका निर्माण उस समय के सबसे प्रसिद्ध बिल्डर राणा फतेहसिंह द्वारा किया गया था।

Kumbhalgrah Fort_Badal Mahal
Kumbhalgrah Fort_Badal mahal_02
Kumbhalgarh Fort_JainTemples

इस शानदार महल के अंदर कुंभ महल, बादल महल, जैन मंदिर,जल कुंड और ब्राह्मण कालीन कई इमारतें बनी हुवी है।किले में आये हुवे मंदिर उस समय के शासकों की धर्म सहिष्णुता का परिचय देते है।

किले में एक गणेश मंदिर आया हुवा है जो किले के अंदर बने सबसे शुरुआती मंदिरों में से एक मन जाता है। यह मंदिर 12 फ़ीट के मंच पर बनाया गया है।

किले के अंदर शंकर भगवान का नील कंठ महादेव मंदिर भी आया हुवा है, जो 1458 ईस्वी में शिव के केंद्रीय मंदिर में बनाया गया था, जिसमें मूर्ति काले पत्थर से बनी है जिसे राणा सांगा द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। राजा कुंभा की दिन चर्या इसी शिवमंदिर में पूजा के साथ शुरू होती थी। 

किले में गोलरा मंदिर और पार्श्व नाथ मंदिर और पिटल शाह जैन मंदिर भी आये हुवे है जो जैन धर्म को प्राधान्य देते है।

किले में सूर्य देव को महत्व देता हुवा एक सूर्य मंदिर भी आया हुवा है।

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KumbhalGarh Light and Sound Show-लाइट & साउंड शो ..

किले में आये भगवन शिव के नीलकंठ मंदिर के पास शाम को होने वाले लाइट और साउंड शो अच्छा है जिसमे कुम्भलगढ़ कीलें के इतहास को प्रदर्शित किया जाता है। 

लेकिन पर्यटकों के रिव्यू के मुताबिक आप इसे देखना छोड़ सकते है। पर्यटकों के अनुभव अनुसार यह शो की साऊंड गुणवत्ता और प्रेजेंटेशन उतना अच्छा नहीं है और शाम को लेट टाइमिंग होने की वजह से वापस आते समय भी लोगों को अँधेरे में रास्ता भूलने की और ख़राब रास्तों की परेशानी हुवी हो ऐसे भी रिव्यु भी मिले है।

Timings :  

हररोज 6:45 Pm – 7:30 Pm.

Duration : 

45 मिनट्स 

Fees : 

Indian :  100 rs.

Foreigners :  200 rs.

वार्षिक महोत्सव ..

वास्तुकला और कला के प्रति राणा कुंभा के जूनून की याद में राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा किले में हर साल एक वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जाता है। 

जिसमे विविध संगीत और नृत्य के कार्यक्रम, हेरिटेज फोर्ट वॉक, महेंदी प्रतियोगिता, रस्साकस्सी, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता जैसी कई प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।

किले के इतिहास को दर्शाता हुवा एक ध्वनि और प्रकाश शो का भी आयोजन किया जाता है।

Kumbhalgarh Fort History in Hindi - कुम्भलगढ़ किला राजस्थान का इतिहास क्या है ?

कुम्भलगढ़ किले ने मौर्य वंश से सिसोदिया वंश के शासकों का दौर देखा है।

करीब 6 ठी सदी में सम्राट अशोक के पोते महाराज संप्राति अपने मंत्री धर्मवीर के साथ यहाँ से गुजर रहे थे तब उनको यह स्थान भौगोलिक बनावट की वजह से इतना पसंद आया की उन्होंने अपनी सैनिक छावनी यहीं पर बनाने का निर्णय ले लिया। 

जिसका नाम उन्होंने अपने नाम की बजाये तलेटी में बसे गांव मछेन्द्र के नाम से मछेन्द्रगढ़ रखने का निर्णत लिया।

राजा संप्राति जैन धर्म को मानते थे इस लिए इस किले के आस पास 300 जैन मंदिरों का निर्माण करवाया गया।

किसी भी रिकॉर्ड किए गए सबूतों की कमी के कारण 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा आक्रमण तक किले की उत्पत्ति का इतिहास अस्पष्ट है। 

यह कुम्भलगढ़ किला महाराणा प्रताप की जन्मस्थली है। किले के आगे हनुमान पोल है जहाँ मूर्तियों के पैर में कुछ शिलालेख है जो किले के निर्माण का विवरण देते है।

Maharana Kumbha img

Maharana Kumbha Image Credit : Wikimedia (Yk jadeja)

वर्तमान स्वरुप में जो किला है उसे 15 वी शताब्दी में राणा कुंभा और उनके वंशज द्वारा निर्मित किया गया था और कई सालों तक उनके द्वारा शासित भी रहा।

राणा कुंभा हिंदू सिसोदिया राजपूत वंशज थे। और माना जाता है इस किले को उस समय के प्रसिद्ध वास्तुकार द्वारा डिजाइन किया गया था।

राणा कुंभा के मेवाड़ राज्य का विस्तार रणथंभौर से ग्वालियर तक था और इसमें राजस्थान और मध्यप्रदेश के बड़े हिस्से शामिल थे। 

इस विस्तार में कुल 84 कीलें आये हुवे है जिनमे से 32 किलों का निर्माण मेवाड़ के राणा कुंभा ने अपने 35 साल के शासन में करवाया था। जिनमे कुम्भलगढ़ सबसे बड़ा और सबसे विस्तृत है।

कुम्भलगढ़ किले ने मेवाड़ और मारवाड़ को दो अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा था। जब भी बाहरी राजा द्वारा कोई आक्रमण होता था तो इस किले को बचने की जगह के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

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Kumbhalgarh Fort Timings - कुम्भलगढ़ किला देखने के टाइमिंग्स क्या है ?

कुम्भलगढ़ किला हररोज मुलाकातियों के लिए खुला रहता है।

Open – 09:00 Am

Closed – 06:00 Pm

Time Required - कुम्भलगढ़ कीलें को देखने के लिए कितना समय लगता है?

इस किले को अच्छी तरह देखने और समझने में कम से कम आपको 2-3 घंटे का समय देना पड़ेगा।

Kumbhalgarh Fort Fees - कुम्भलगढ़ कीलें को देखने की फीस कितनी है ?

For Indian – ~ 10 rs.

For Foreign Tourists : ~ 100 rs.

Camara : ~ 25 rs.

Best Time To Go - कुम्भलगढ़ किला देखने के लिए सबसे उचित समय कोनसा है ?

किले में घूमने जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के दौरान का है। इस लिए सितम्बर से ले कर फरवरी के बिच का है। 

जिस समय बारिस भी कम हो गयी हो और गर्मियां भी शुरू नहीं हुई हो।

Atmospher - वातावरण

कहीं भी घूमने जाने से पहले आप को उस जगह का और आने वाले कुछ दिनों का वातावरण जान लेना अत्यंत आवश्यक है जिससे आप को किन किन चीजों की जरुरत रहेगी उसकी तयारी कर सको। जिससे आप अपनी यात्रा को ज्यादा सुखद कर सको।

में यहाँ पर आप को इस जगह का लाइव वातावरण जानने के लिए एक लिंक दे रहा हूँ जिससे आप यहाँ का वातावरण जान सकते हो।

How to Reach Kumbhalgarh Fort - कुम्भलगढ़ कीलें पर कैसे पहुंचे ?

कुम्भलगढ़ किला राजसमंद जिले में आया हुवा है जहाँ पर कोई हवाई अड्डा नहीं है।

निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर के पास डबोक है जो कुम्भलगढ़ से करीब 95 किमी की दूरी पर आया हुवा है।

डबोक एयरपोर्ट पहुँचने के बाद आप टैक्सी से कुम्भलगढ़ पहुँच सकते है। 

कुम्भलगढ़ में रेल्वे स्टेशन की सुविधा भी नहीं है। नजदीकी रेल्वे स्टेशन उदयपुर जो करीब 87 किमी और फालना है जो करीब 67 किमी की दूरी पर है। 

जहाँ से आप टैक्सी या बस में कुम्भलगढ़ पहुँच सकते है।

कुम्भलगढ़ के पास अपना कोई बस स्टेशन भी नहीं है। लेकिन राजस्थान के सभी प्रमुख शहरों से यहाँ पर नियमित बस सुविधा उपलब्ध है।

आप बस से वहां पहुँच सकते है।

Where to stay & eat in Kumbhalgarh - कुम्भल गढ़ में कहाँ पर रुके और खाना खाए ?

यहाँ कुम्भलगढ़ किले के पास कुछ होटल्स आयी हुवी है जो अच्छी सुविधाए प्रदान करती है लेकिन वह थोड़ी महँगी है। 

आप चाहे तो यहाँ पर रुक सकते हो मैंने कुछ होटल्स सर्चिंग के लिए साइट निचे लिंक में दे रखी है आप उसे अपने बजट के हिसाब से देख सकते है।

Note : मुझे निचे दी गयी कोई भी होटल्स की लिंक से किसी भी प्रकार की आय नहीं हो रही। यहाँ सिर्फ में उसे आप की अनुकूलता के लिए दे रहा हूँ।

Kumbhalgarh Fort Rajasthan full information in Hindi

Wild life Century - वन्यजीव अभ्यारण्य..

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य उदयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। 

यह अभ्यारण्य कुम्भलगढ़ किले को चरों और से घेरता है और 586 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। 

अरावली रेंज में फैले, कुंभलगढ़ अभयारण्य में राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों के कुछ हिस्से शामिल हैं।

यहाँ पर वन्यजीवों की कई लुप्तप्राय प्राणियों के लिए जिन्दा रहने के लिए उचित माहौल प्रदान करता है।

अभयारण्य वुल्फ, तेंदुए, स्लोथ भालू, हाइना, जैकाल, जंगल बिल्ली, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा (चार सींग वाले मृग), चिंकारा और हरे जैसे कई प्राणियों को प्राकृतिक निवास प्रदान करता है।

गर्मियों के मौसम में आप भेड़ियों को पानी के स्त्रोतों के पास देख सकते हो।

अगर आप को पक्षियों में रुचि है,तो यहां आप कई प्रकार के पक्षियों को देख सकते हैं। पार्क में,आप ग्रे जंगल फाउल देख सकते हैं,जो आमतौर पर हिचकते हैं। मोर और कबूतर भी अपने आकर्षण से ध्यान आकर्षित करते हैं। 

इसके अलावा, कुम्भलगढ़ के होटल फतेह सफारी लॉज में लाल छेद वाले उल्लू, तोते, गोल्डन ओरियल, बुलबुल, कबूतर, ग्रे कबूतर, और व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर पानी के छेद के पास पाए जाते हैं।

यहाँ पर आया हुवा वन्यजीव अभ्यारण्य घूमने के लिए एक अच्छी जगह है।

इस अभ्यारण्य में भेड़िये,भालू ,तेंदुवे ,बारासिंगे ,हिरन,शियार,चिंकारा, लक्कड़बग्घे,नीलगाय ,जंगली बिल्लियां इत्यादि जानवर देखने को मिलते है।

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Conclusion - निष्कर्ष

किले में कुछ व्यस्था प्रशासन को करनी जरुरी है जिसकी कमी दिखती है। हमें अपनी इस सांस्कृतिक धरोहर को संभाल कर रखना चाहिए।

जितनी जिम्मेदारी प्रशासन की है उतनी ही हमारी भी है। मेरी कुछ तस्वीरें आपको इस बात का बयां करेगी।

यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

अगर आप कुंभलगढ़ फोर्ट के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को कुंभलगढ़ फोर्ट के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

अगर आप को यह आर्टिकल में दी गयी जानकरी उपयोगी लगी हो तो एक लाइक करना न भूलें और अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कीजिये। और मेरी इस वेबसाइट को नोटिफिकेशन बेल दबाके जरूर से सब्सक्राइब कर लीजिये जिससे आगे आने वाले ऐसे और भी कई आर्टिकल का नोटिफिकेशन आप को मिल सके और मुझे और ज्यादा अच्छे आर्टिकल लिखने की प्रेरणा मिले।

Note : आर्टिकल में दी गयी टिकट की किंमत समय समय पर बदल सकती है। मैंने यहाँ मौजूदा किंमत दी है जिसे में समय समय पर अपडेट करता रहूँगा। फिरभी आप दी गयी किंमत को लगभग किंमत मान कर चलें।

मेरी दूसरी एक वेबसाइट www.Besttravelproducts.in है जिसमे घूमने जाने की लिए जरुरी सारी चीजें मिलती है जो एक Amazon एफिलिएट वेबसाइट है। 

अगर आप चाहे तो उसे एक बार विसिट कर सकते है।

आशा करता हूँ की आप को आर्टिकल में दी गई जानकारी यहाँ पर घूमने आने के समय जरूर से मदद करेगी। 

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

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