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Kutch Gujarat – एक कहावत है,कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। तो आइए आज हम इस आर्टिकल में कच्छ को थोड़े करीब से जानते है।

अगर आप कच्छ घूमने की सोच रहे हो तो इस आर्टिकल में आप को कच्छ में घूमने लायक जगहों के बारे में जानकारी मिलेगी। तो आइए फ्रेंड्स शुरू करते है।

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Kutch Gujarat- कच्छ गुजरात ..

कच्छ  गुजरात मैं आया हुवा देश का सबसे बड़ा जिला है। कच्छ को घूमने केलिए सबसे पहले आपको भुज शहर मैं आना होगा।

कच्छ में बहोत सारी जगहें आयी हुई है जिसे आप घूम सकते हो। कच्छ में आपको घूमने लायक हिस्टोरिकल प्लेसिस, राजा महराजाओं के महल, वन्यजीव अभ्यारण्य, बीच, पुरातत्वीय साइट, म्यूजियम, जैन मंदिरें, पहाड़, सरोवर, नमक का रेगिस्तान और कई बागीचे मिल जायेंगे जहाँ पर आप अपने परिवार के साथ आराम से समय बिता सकते हो और यहाँ की खूबसूरती को एन्जॉय कर सकते हो।

तो दोस्तों आइये आज हम यह सारी जगहें कहाँ पर आयी हुई है और हम उसे कैसे देख सकते है उसके बारे में विस्तार से जानते है।

How to reach kutch - कच्छ कैसे पहुंचे ?

कच्छ का अपना कोई रेल्वे स्टेशन या हवाई अड्डा नहीं है इस लिए कच्छ को घूमने के लिए सबसे पहले आप को भुज सिटी में आना पड़ेगा।

भुज कच्छ डिस्ट्रिक्ट का एक बड़ा शहर है जो देश के बड़े शहरों से रेल्वे और हवाई मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। भुज शहर से कच्छ की दूरी करीब 73 किमी की है। 

वैसे कच्छ डिस्ट्रिक्ट में घूमने लायक सारी जगह इस भुज सिटी के इर्द गिर्द आयी हुवी है इस लिए आज हम भुज शहर को सेंटर पॉइंट मान कर सारी जगहों के बारे में जानेंगे।

आप यह भुज शहर कैसे पहुँच सकते हो उसके बारे में मैंने एक आर्टिकल विस्तार से लिखा है आप निचे दी गयी लिंक पर जाके यह जानकारी प्राप्त कर सकते हो।

Read more : भुज कैसे पहुंचे 

Best time to visit Kutch - कच्छ घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है ?

कच्छ एक सूखा प्रदेश है इस लिए यहाँ पर घूमने के लिए बारिश और शर्दियों के महीने ज्यादा बेहतर रहेंगे। गर्मियों में घूमने आना जरा भी बेहतर नहीं रहेगा। 

इस लिए अगर आप यहाँ घूमने आने की सोच रहे हो तो अक्टूबर से लेकर मार्च तक घूमने के लिए बेहतर महीने है।

दूसरी इन महीनो में घूमने आने की एक खास वजह यह भी है की यहाँ के प्रख्यात सफ़ेद रण में हर साल नवंबर से लेकर फरवरी तक राज्य सरकार द्वारा रण उत्सव का आयोजन किया जाता है जहाँ पर हजारों की संख्या में लोग देश और विदेश से यहाँ के वाइट डेजर्ट के माहौल का आनंद लेने आते है।

तो आप इन महीनों में अगर यहाँ घूमने आते हो तो यहाँ के प्रख्यात रण उत्सव का भी आनंद उठा सकते हो। इस टॉपिक के बारे में हम आगे इस आर्टिकल में ज्यादा विस्तार से बात करेंगे।

Kutch Gujarat

Places to visit in Kutch - कच्छ के दर्शनीय स्थल..

कच्छ बहोत बड़ा प्रदेश घेरता है जिसकी वजह से यहाँ पर बहोत सारी और हरेक प्रकार की जगह है घुमने के लिए। 

कुल मिलाकर करीब 20 जगहें ऐसी है जहाँ पर आप अपने फॅमिली के साथ क्वालिटी समय बिता सकते हो। तो आइये हम उन्ही सारी जगहों के बारे में विस्तार से बात करते है।

कच्छ  मुख्य शहर में कोई हवाई अड्डा या रेल्वे स्टेशन नहीं है इस लिए मैंने आगे बताया उस तरह आप को अगर कच्छ घूमना है तो भुज आना ही सबसे बेहतर रहेगा।  

भुज कच्छ का मुख्य शहर है जहाँ हवाईअड्डा और रेल्वे की अच्छी सुविधा है। भुज कच्छ के बाकि सारें प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है।

जहाँ से हर एक जगह पर जाने के लिए बस, टेक्सी, लोकल व्हीकल और बाइक रेंट पर मिल जाएगी।

तो अगर हम भुज ही पहले पहुंचेंगे तो भुज में ही देखने लायक जगहों से कच्छ घूमने की शुरुआत करनी बेहतर रहेगी। तो आइये पहले भुज में देखने लायक जगहों के बारे में जानते है।

Bhuj - भुज

Places to visit in Bhuj - भुज में घूमने लायक स्थल

kutch gujaarat-bhuj

1. Kutch Museum – कच्छ म्यूजियम..

2. Aaina Mahal – आईना महल..

3. Prag Mahal – प्राग महल..

4. Chhatardi & Hamirsar lack – छतरडी और हमीरसर तालाब..

5. Swaminarayan temple – स्वामीनारायण मंदिर..

6. Bhujiyo dungar/bhujiyo hill – भुजियो डूंगर..

7. Black hill/Kalo Dungar – काला डूंगर

8. Rann of kutch – कच्छ का रण..

1. Kutch Museum - कच्छ म्यूजियम..

Kutch_Museum full information

Image Credit : Wikipedia

कच्छ संग्रहालय को शुरू में कच्छ राज्य के महाराजा खेंगरजी तृतीय द्वारा स्थापित स्कूल ऑफ आर्ट्स के एक भाग के रूप में बनाया गया था। इसकी स्थापना 1 जुलाई 1877 को हुई थी।

संग्रहालय को पहले बॉम्बे के तत्कालीन गवर्नर जेम्स फर्ग्यूसन के नाम से फर्ग्यूसन संग्रहालय के रूप में जाना जाता था।

यह म्यूजियम गुजरात राज्य के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक है जो भुज शहर के हमीरसर झील के किनारे बना हुवा है। यह भारत का सबसे पहला ऑनलाइन संग्रहालय है।

यह म्यूजियम यहाँ का लोकल म्यूजियम है जहाँ पर आप यहाँ के लोकल संगीत वाद्य, विभिन्न चित्रों, सिक्कों, कलात्मक नक्कासी, राजा महाराजा के चित्रों का एंटीक कलेक्शन देखने को मिल जायेगा।

Open time : 

10:00Am – 1:00 Pm & 2:30 Pm – 5:00 Pm.

बुधवार को यह संग्रहालय बंद रहता है।

Fees : प्रति व्यक्ति 5 रु

मैंने कच्छ म्यूजियम के ऊपर अलग से दूसरा आर्टिकल विस्तार से लिखा हुवा है जिसमे आप म्यूजियम का इतिहास और दूसरी भी दिलचस्प जानकारी पढ़ सकते हो जिसकी लिंक में निचे दे रहा हूँ। आप उसे यहाँ आने से पहले जरूर से पढ़िए।

पूरा पढ़ें : कच्छ म्यूजियम पूरी जानकारी 

2. Aaina Mahal - आइना महल..

Aina Mahal Bhuj

Image Credit : Wikipedia

भुज में हमीरसर झील के उत्तर पूर्वी कोने में बना यह महल आइना महल के नाम से या शीश महल के नाम से भी जाना जाता है।

जिसका निर्माण यहाँ के राजा राव लखपतजी ने 17 वि सताब्दी में करवाया था। यह महल आकर्षक रूप से भारत और यूरोपीय शैली का एक मिश्रित रूप है, जिसकी डिजाइन, महल के सबसे खूबसूरत कलाकृति और चित्रों को राम सिंह मलम नामक के एक कलाकार ने बनाया था। 

2001 में जब बड़ा भूकंप आया तब यह ईमारत उसके सामने नहीं टिक पाई और महल का काफी हिस्सा उस भूकंप में ढह गया। हालांकि कुछ हिस्सा आज भी खड़ा है जिसे राज्य सरकार द्वारा संरक्षित किया गया और इसे एक संग्रहालय में तबदील किया गया। 

आईना महल के बारें में जयादा पढ़ें : आईना महल,भुज 

इसी कैंपस में एक दूसरा महल भी आया हुवा है जिसे प्राग महल से जाना जाता है।

Kutch Gujarat

3. Prag Mahal - प्राग महल..

Prag mahal bhuj - darbar hall

Image Credit : calliopejen ( Wikipedia )

प्राग महल का निर्माण सं 1865 में राजा राव प्रागमलजी द्वितीय ने करवाया था इस लिए इस महल को प्राग महल से जाना जाता है।

इस महल को इटालियन गौटिक शैली में बनाया गया है। इसकी खूबसूरत स्थापत्य शैली के कारण यहाँ पर कई सारी हिंदी फिल्मों के सूटिंग भी हुवे है।

यह एक हिस्टोरिकल जगह है जिसे बनवाना राव प्रागमलजी ने शुरू किया था और जब महल पूरा बनके तैयार हुवा तब राव खेंगारजी का शाशन चल रहा था।

प्राग महल के बारे में विस्तार से पढ़ें : प्राग महल,भुज 

4. Chhatardi & Hamirsar lack - छतरडी और हमीरसर तालाब..

यह दोनों एक ही जगह पास पास में आए हुवे है।

यहाँ के लोकल लोगों के लिए यह एक मुख्य जगह है जहाँ शाम को कई प्रवासी भी आते है।

यहाँ पर पास में एक लोकल मार्केट आया हुवा है जहाँ से आप यहाँ की लोकल चीजों की शॉपिंग कर सकते हो साथ में यहाँ का लोकल फ़ूड भी एन्जॉय कर सकते हो।

यहाँ की कुछ फेमस जगहें सराफ बाजार, तलाव स्ट्रीट, महेर अली चौक, वाणिया वाड है जहाँ पर आप को शॉपिंग के लिए बहोत सारी दुकानें और फ़ूड कोर्ट मिल जायेंगे।

5. Swaminarayan temple - स्वामीनारायण मंदिर..

Swaminarayan temple bhuj

Image Credit : Rajnikant Patel ( Traveler )

यह स्वामीनारायण संप्रदाय का यहाँ का सबसे सुन्दर मंदिर है। 

सभी स्वामीनारायण मंदिर शांति,सुंदरता और जटिल कलाकारी का प्रतिक है। भुज में आया हुवा स्वामीनारायण मंदिर भी उसी तरह हर मायने में खरा उतरता है।

यह मंदिर स्टेशन से बहुत करीब और आसानी से मिल जाए ऐसे स्थान में बना है। कच्छ म्यूजियम से महज 5 मिनट्स की ही दूरी पर आया हुवा है। 

यहाँ के सुन्दर बगीचे, भगवन शंकर के साथ गंगाजी की मूर्ति एक अलग आकर्षण है। यह पूरा मंदिर सफेद संगेमरमर से बना हुवा है। 

और मंदिर के हरेक हिस्से को विभिन्न संगीत वाद्यों और कई मूर्तियों से कंडारा गया है।

यहाँ पर एक संग्रहालय भी बना हुवा है जहाँ पर स्वामीजी द्वारा पवित्र वस्तुओं का प्रदर्शन है। इस मंदिर आप करीब 45 से लेकर 1 घंटे आराम से घूम सकते हो।

प्रवेश : फ्री 

दर्शन के समय : हररोज सुबह : 5:30am – 11:20am &  दोपहर के बाद : 3:30pm – 8:45pm

आरती के समय : 5:30am, 6:45am, 11:20am, 7:15pm, 8:45pm

अगर आप चाहो तो यहाँ पर आके भगवान स्वामीनारायण के दर्शन के साथ साथ मंदिर की कलात्मक बनावट का भी आनंद उठा सकते हो।

Kutch Gujarat

6. Bhujiyo dungar/bhujiyo hill - भुजियो डूंगर..

kutch gujarat

Image Credit : Prabhat ( Wikipedia )

यहाँ पर आप दूसरे दिन अर्ली मॉर्निंग चले जाइये अगर आप को एडवेंचर पसंद है तो यहाँ पर आप जरूर जाइये। यहाँ से आप को पुरे भुज का एक सुन्दर व्यू दिखेगा। 

यहाँ पर आप ट्रैकिंग भी कर सकते हो।

इस डूंगर की ऊंचाई समुद्र तल से करीब 160 मीटर की है।

भुज में आए इस डूंगर पर एक किला बना हुवा है जिसका निर्माण शहर की रक्षा के लिए जडेजा प्रमुखों द्वारा किया गया था। 

राव परमेश्वरजी ने 1715 में निर्माण कार्य शुरू किया जो 1741 में देशलजी प्रथम के शासन के दौरान समाप्त हुआ। इस किले ने छह बड़े युद्ध देखे है।

किले के एक कोने में ‘भुजंग नाग’ (सांप देवता) को समर्पित एक छोटा वर्गाकार टावर बना हुवा है। 

भुजंग नाग को लोक कथाओं में ‘शेषनाग’ (पाताल लोक के राजा)का भाई कहा जाता है। 

ऐसा कहा जाता है की भुजंग काठियावाड़ के थान से आया था और कच्छ को दैत्यों और राक्षसों से मुक्त करवाया था।

यह सांप का मंदिर देशलजी प्रथम के शासनकाल (1718-1740) के दौरान पहाड़ी के किलेबंदी के समय बनाया गया था।

एक युद्ध में इसी सर्पदेव की पूजा करने वालें नागाओं के योद्धाओं की मदद से राजा को जीत हासिल हुई थी। 

सन 1723 में देशलजी द्वारा इस मंदिर के ऊपर एक छत्री का निर्माण भी करवाया गया था। 

एक बार सबसे भयंकर युद्ध में नागाओं के अंतिम सरदार, भुजंग मारे गए। उनकी मृत्यु के बाद जहाँ वह रहते थे वह जगह भुजिया पहाड़ के नाम से जाना जाने लगा और उसके आस पास के क्षेत्र को भुज के नाम से जाना जाने लगा। 

यहाँ के निवासियों ने भुजंग की याद में ही एक मंदिर बनाया जो अब भुजंग नाग मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। 

उसी समय से यहां के निवासी इस क्षेत्र के नाग देवी देवताओं को बहुत ज़्यादा मानने लगे और उनकी पूजा करने लगे।

कथाओं के अनुसार नागाओं के सरदार ने भी इस क्षेत्र भुज पर राज किया था।

आज़ादी के बाद भुजिया किला भारतीय सैनिकों के अधीन हो गया, जिसे भारतीय सैनिकों ने कुछ सालों के लिए सैन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किया। 

बाद में उन्होंने इस जगह को छोड़ दिया और दूसरी जगह को स्थानांतरित हो गए।

यहाँ पर हर साल हिंदू पंचांग के मुताबिक श्रावण मास में नाग पंचमी के दिन एक वार्षिक मेले का आयोजन भी किया जाता है।

यहाँ भुजिया डूंगर के ऊपर से आप पुरे भुज शहर का सुन्दर द्रश्य देख सकते हो।

एक नए दिन..

भुज से कच्छ के रण तक आते समय रास्ते में कई और देखने लायक जगहें भी मौजूद है जिसे आप घूम सकते हो। जैसे कालो डूंगर, होडको गांव, खावडा गांव।

7. Black hill/Kalo Dungar – काला डूंगर

Kalo Dungar Bhuj-kutch gujarat

Image Credit : Justin Pickard (Flickr)

यहां पर गुरु दत्तात्रेयजी का 400 साल पुराना मंदिर बना हुवा है। जहाँ आप जाके दर्शन कर सकते हो। 

हर शाम जब गुरु दत्तात्रेय की आरती होती है तब इनका प्रसाद खाने कई सालों से बहोत सरे फॉक्स ( शियाल ) आते है। यहाँ से शाम का सन सेट भी बहोत ही सुंदर दीखता है। आप उसका आनंद उठा सकते हो।

आप यहाँ से वाइट रण का टॉप व्यू भी देख सकते हो।

Kutch Gujarat

8. Rann of kutch – कच्छ का रण..

Great Rann Of Kutch-kutch gujarat

Image Credit : Bishnu Sarangi from Pixabay” 

यह रण 23000 स्क्वेर किमी में फैला हुवा है जो बारिश के बाद बनने वाले नमक के सफ़ेद रण के लिए बहोत फेमस है। 

रण के ऊपर नमक की चादर फ़ैल जाती है जो रात में दिखने में बेहद खूबसूरत बन जाता है। 

सफ़ेद रण की इसी खूबसूरती के कारण हर साल यहाँ पर नवंबर से फरवरी के बिच राज्य सरकार द्वारा रण उत्सव का आयोजन किया जाता है। 

जहाँ देश विदेश से लाखों सहेलाणी इस सफ़ेद रण की खूबसूरती चांदनी रात में निहारने को आते है। 

साथ में वो लोग यहाँ की कला और संस्कृति का भी आनंद लेते है।

भुज शहर से करीब 85 किमी दूर भिरंडियार चेक पोस्ट आता है जहाँ से आप को सफ़ेद रण में जाने के लिए परमिट लेनी पड़ेगी। 

अगर आप ने परमिट नहीं बनवायी तो बी.एस.एफ द्वारा आपको वहां रण में जाने नहीं दिया जायेगा।

परमिट रेट

  • प्रति व्यक्ति : 100/- 
  • बच्चे ( 6 से 12 साल ले बिच ) : 50/- 
  • बच्चे ( 5 साल की उम्र तक ) फ्री
  • टू व्हीलर के : 25/- 
  • फोर व्हीलर के : 50/-

में यहाँ ऑन लाइन परमिट लेने की लिंक शेयर कर रहा हूँ आप वहां से परमिट ले सकते हो।

link : on line permit for rann utsav

मैंने इस वाइट डेजर्ट यानि की सफ़ेद रण के बारे में दो आर्टिकल विस्तार से लिखे है जिसमे मैंने सफ़ेद रण कैसे पहुंचा जाये और रण उत्सव को कैसे एन्जॉय किया जाये उसके बारे में सारी जानकारी दी है।

में यहाँ पर उसकी लिंक दे रहा हूँ आप उसे जरूर से पढ़ें।

 ज्यादा पढ़ें :  

  1.  रण उत्सव कैसे पहुंचे ?
  2.  रण उत्सव में क्या देखें ?

एक और नए दिन..

एक नए दिन आप मांडवी घूमने जा सकते हो जहाँ पैलेस, मेमोरियल और बीच है जहाँ आप अपना पूरा दिन बिता सकते हो।

Mandvi - मांडवी

भुज से मांडवी करीब 58 किमी की दूरी पर आया हुवा है। 

मांडवी भारत के पश्चिम में आया हुवा गुजरात राज्य के कच्छ जिले में समुद्र के किनारे पर बना हुवा एक शहर है।

मांडवी शहर में 400 साल पुराना जहाज निर्माण उद्योग है जिसे खारवा की जाती ने शुरू किया था जो आज भी छोटे लकड़ी के जहाजों का निर्माण करते है।

Places to visit in mandvi - मांडवी में देखने लायक स्थान

9. Shyamji Krishna varma memorial – श्यामजी कृष्ण वर्मा स्मारक।

10. Vijay Vilas palace – विजय विलास महल।

11. 72 jinalay- 72 जिनालय।

12. Mandvi beach- मांडवी बीच।

9. Shyamji Krishna varma memorial - श्यामजी कृष्ण वर्मा स्मारक

Shyamji Krishna Varma Memorial Mandvi

Image Credit : Rajnikant Patel ( Friend )

मांडवी के कुछ प्रमुख आकर्षण में से एक यह स्मारक क्रांतिकारी नेता श्यामजी कृष्णवर्मा को समर्पित है जो एक वकील और पत्रकार भी थे।

उनका जन्म सन 1857 में मांडवी शहर में हुवा था जो भारत के प्रमुख स्वतंत्र सेनानी में से एक थे। 

उनको सन्मान और लोक जागृति के उदेश्य से गुजरात के पूर्व मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी ने मांडवी शहर में इस मेमोरियल की स्थापना करवाई थी।

यहाँ पर इस महान क्रांतिकारी के जीवन को दर्शाती तस्वीरों की एक गैलरी बनाई हुई है। 

यह जगह लंडन के इंडिया हाउस की प्रतिकृति समान है।

जहाँ पर उनके जीवन के बारे नियमित डॉक्यूमेंट्री बताई जाती है। यह पूरा परिसर बेहद सुव्यस्थित है और यहाँ पर भीड़ भाड़ भी कम होने की वजह से बेहद शांति से आप इस जगह को घूम सकते हो।

यहाँ पर एक छोटा सा बुक स्टॉल भी बना हुवा है जहाँ पर आपको श्यामजी के बारे में कई साहित्य मिल जायेंगे। 

चाय पानी और नास्ते के लिए यहाँ पर एक कैंटीन भी बना हुवा है।

कुल मिलाकर यह जगह निश्चित रूप से यात्रा के लायक जगह है।

टाइमिंग्स : 

  • Monday to Wednesday & Friday : 10 Am – 6 Pm.
  • Saturday & Sunday : 10 Am – 8 Pm.
  • Thursday : Closed

ज्यादा पढ़ें : श्यामजी कृष्णवर्मा मेमोरियल

Kutch Gujarat

10. Vijay vilas palace - विजय विलास महल

Vijay vilas palace Mandvi

Image Credit : Dhananjay Pansuriya Wekipedia

मांडवी बीच से थोड़ी दूरी पर ही ये पैलेस आया हुवा है। यह एक रजवाड़ी पैलेस है जिसकी रचना सन 1929 में राजा राव खेंगरजी तृतीय ने करवाई थी। 

उनके युवराज राव विजयराजजी के नाम से इस महल का नाम विजय विलास पैलेस रखा गया था।

यह महल राजपूत शैली में बना एक शानदार महल है जहाँ पर आपको विशाल गुम्बज, नक्काशीदार खम्भे और रंगीन कांच से बने कमरे देखने लायक है।

इस महल का निर्माण लाल पत्थर से हुवा है जो पहले के ज़माने में रपूताना हवेलियां बनाने में इस्तेमाल किये जाते थे।

विजय विलास पैलेस में आप काफी ऐतिहासिक और पुरातात्विक काम देख सकते हो साथ में आप एंटीक चीजों का कलेक्शन भी देख सकते हो। 

यह महल इतना भव्य है की हम दिल दे चुके सनम हिंदी मूवी का फिल्मांकन यहीं पर हुवा था।

विजय विलास पैलेस के पास में ही एक प्राइवेट बीच आया हुवा है जहाँपर आप शांति का अनुभव कर सकते हो।

विजय विलास पैलेस के बारे में मैंने एक दूसरा आर्टिकल विस्तार से लिखा हुवा है आप चाहो तो उसे निचे दी गई लिंक पर जाके पढ़ सकते हो।

पूरा पढ़ें : विजय विलास पैलेस,मांडवी 

11. 72 jinalay- ७२ जिनालय

kutch gujarat

Image Credit :  Wikipedia 

यह जैन संप्रदाय का पवित्र तीर्थ धाम है जिसकी कला कारीगरी बेनमून है।

यहाँ पर 72 छोटी छोटी देरी बनी हुई है जिसमे जैन धर्म के तीर्थंकर बिराजमान है।

अचल गच्छाधिपति आचार्य श्री गुणसागर सुरेश्वरजी की प्रेरणा से इस सुन्दर तीर्थ धाम का निर्माण हुवा था जहाँ पर आप बहोत ही सुन्दर आर्किटेक्चरल वर्क देख सकते हो।

मूलनायक आदिनाथजि की 73 इंच की मूर्ति यहाँ पर स्थापित है साथ में पार्स्वनाथजी की पौराणिक मूर्ति भी स्थापित है।

12. Mandvi Beach - मांडवी बीच

Mandvi Beach -kutch gujarat

Image Credit : Rajnikant Patel ( Friend )

मांडवी का यह बीच गुजरात के सबसे साफ़ और सुन्दर बिचिस में से एक है। मांडवी बीच मुख्य शहर से करीब 5 किमी की दूरी पर आया हुवा है।

यह बीच एक शांत जगह है जहाँ आप अपने परिवार के साथ कुछ आराम के पल बिता सकते हो।

मैंने मांडवी बीच के बारे में विस्तार से आर्टिकल लिखा हुवा है आप उसे निचे दी गई लिंक पर जाके पढ़ सकते हो।

पूरा पढ़ें : मांडवी बीच 

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13. Mata No Madh - माता नो मढ़

Mata no madh

Image Credit : Kjzala1188 (Wikipedia)

एक नए दिन..

मांडवी को पूरा घूम लेने के बाद आप दूसरे दिन आगे के सफर के लिए निकल जाइए।

मांडवी से नजदीक में करीब 111 किमी की दूरी पर आशापुरा माता के मढ़ आप जा सकते है। 

जिसे यहाँ की लोकल भाषा में माता नो मढ़ के नाम से जाना जाता है।

आशापुरा माता के इस मढ़ का गुजरात राज्य में बहोत ही महत्व है। यहाँ पर भक्तों की ऐसी मान्यता है की माता से सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है।

यात्री यहाँ देश विदेश से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते है और माता के दर्शन करके धन्यता का अनुभव करते है। 

मैंने माता के मढ़ के बारे में एक विस्तार से आर्टिकल लिखा हुवा है जिसमे यहाँ कैसे पहुंचे? यहाँ का इतिहास, दर्शन के समय, कहाँ पर रुकें वगैरा विस्तार से बताया हुवा है। 

अगर आप चाहो तो निचे दी गई लिंक पर जाके उसे पढ़ सकते हो।

ज्यादा पढ़ेंमाता नो मढ़ 

14. Narayan Sarovar - नारायण सरोवर

Narayan sarovar in hindi

Narayan Sarovar Koteshwar Mahadev, Image Credit : Rajnikant Patel ( Friend )

उसी दिन आप माता के मढ़ से करीब 58 किमी की दूरी पर आए हुए नारायण सरोवर पर पहुँच जाइए। जिसका आध्यात्मिक रूप से बड़ा महत्व है। 

नारायण सरोवर भारत में आए हुवे सबसे पवित्र पांच सरोवर में से एक है और गुजरात में आया हुवा एक मात्र है। 

नारायण सरोवर से सिर्फ 2 किमी की दूरी पर भगवन शंकर का पवित्र मंदिर आया हुवा है जिसे कोटेश्वर महादेव से जाना जाता है। और गुजरात में आए हुवे भगवन शंकर के महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है।

आप इस दोनों जगहों को साथ में घूम सकते है और समुद्र किनारे पर बने हुए होने की वजह से आप शाम के कुछ अनमोल क्षण अपने परिवार के साथ यहाँ पर बिता सकते है। 

साथ में नारायण सरोवर में रात रुकने की व्यस्था है इस लिए पुरे दिन के सफर के बाद आप यहाँ पर रात रुकने का प्लान बना सकते है। 

मैंने इस नारायण सरोवर के बारे में भी एक आर्टिकल विस्तार से लिखा हुवा है जिसमे यहाँ की पूरी जानकारी दी हुई है जिसे आप दी गई लिंक पर जाके उसे विस्तार से पढ़ सकते है।

ज्यादा पढ़ेंनारायण सरोवर 

15. Lakhpat Fort - लखपत फोर्ट

Kutch gujarat

लखपत फोर्ट नारायण सरोवर से करीब 36 किमी की दूरी पर और भुज से करीब 135 किमी की दूरी पर आया हुवा है। 

लखपत कच्छ का एक छोटा सा कस्बा और उप-जिला है जिसका अर्थ होता है लखपतियों का शहर।

माना जाता है की एक समय पे यह एक मुख्य बंदरगाह हुवा करता था। और उस समय में भी हर रोज लाखों का कारोबार हुवा करता था।

गुजरात और सिन्ध को जोड़ने के कारण यह शहर व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। 

इस शहर का पतन 1819 ईस्वी के भूकम्प के साथ शुरू हुआ जब सिन्धु नदी का बहाव शहर से दूर हो गया।

1801 ईस्वी में जमादार फतेह मोहम्मद द्वारा 7 किमी लम्बी दीवार का निर्माण करवाया गया था जो आज भी सलामत हैं।

इस क्षेत्र में साफ मरूस्थलीय हवाओं के कारण रात में आसमान के नजारा बहुत ही सुन्दर बन जाता है।

Kutch Gujarat

16. Dholavira - धोलावीरा

Dholavira Tunnel-kutch gujarat

Image Credit : Nagarjun Kandukuru Wikimedia 

एक नए दिन..

भुज से करीब 205 किमी की दूरी पर धोलावीरा आर्किओलॉजिकल साइट आई हुई है। जो सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख शहर हुवा करता था। 

यहाँ पर हड़पिय संस्कृति का एक विशाल नगर आया हुवा है। स्थानीय भाषा में यह स्थान कोटड़ा टिम्बा के नाम से जाना जाता है।

यह हड़पिय साम्राज्य की 5 विशाल जगहों में से एक गिनी जाती है जो करीब 120 एकर में फैली हुवी है।

यह 5000 साल पुराना महा नगर है जो भारत की मुख्य आर्किओलॉजिकल साइट्स में से एक गिनी जाती है।

आप उसे मेरे विस्तार से लिखे हुवे दूसरे आर्टिकल में पढ़ सकते है जिसमे आप को धोलावीरा कैसे पहुंचे, कहाँ रुके वगैरे के बारे में विस्तार से जानकारी मिल जाएगी।

ज्यादा पढ़ें : धोलावीरा 

17. Wild Ass Sanctuary - घुडखर अभ्यारण्य

Wildass Sanctuary - kutch gujarat

Image Credit – Asim Patel ( wikimedia )

कच्छ के रण में स्थित यह अभ्यारण्य भारत में सबसे बड़ा घुडखर अभ्यारण्य है। जो करीब 5000 स्क्वेर किमी में फैला हुवा है।

यहाँ पर कई तरह के वन्य जीव पाए जाते है जैसे की केराकक्ष, चिंकारा हिरन और घुडखर याने जंगली गधे। 

यह अभ्यारण इन्ही घुडखर की वजह से पुरे विश्व में प्रसिद्ध है।

Entry Fees :

  • 250 per person for Indians
  • 280 per person for Indians (on Saturday, Sunday)
  • 1,200 per person for foreigners
  • 1,500 per person for foreigners (on Saturday, Sunday)
अभ्यारण्य हररोज सुबह से शाम तक खुला रहता है। बारिश के मौसम में कभी कभार बंध रहता है।

Conclusion - निष्कर्ष

कच्छ गुजरात राज्य का क्षेत्रफल की द्रष्टि से सबसे बड़ा जिला है और हर प्रकार के देखने लायक स्थल आये हुवे है। 

लेकिन एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर होने की वजह से अगर आप कच्छ के सारे देखने लायक स्थल घूमना चाहते हो तो आप को करीब 4 से 5 दिनों की तैयारी के साथ यहाँ पर आना पड़ेगा। तभी जाके आप कच्छ को अच्छे से देख पाएंगे।

दूसरे ऑप्शन में आप कच्छ की कुछ जगहों को देखने का प्लान करके आ सकते हो। 

मैंने मेरी साइट पर सब जगहों के बारे में विस्तार से अलग अलग आर्टिकल्स लिखे हुवे है जिसे पढके आप अपनी रूचि के अनुसार कहाँ पर जाए वो डिसाइड कर सकते हो। 

Kutch Gujarat – इस आर्टिकल का उदेश्य कच्छ प्रदेश की पूरी जानकारी को सरल स्वरुप में दर्शाना है जिससे आप को यह यात्रा कम से कम तकलीफ में ज्यादा आनंद मिल सके।

यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

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dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Rann Utsav hindi - travellgroup · April 7, 2020 at 7:48 pm

[…] ज्यादा पढ़ें : कच्छ में देखने लायक सबसे अच्छी 17 जगहें  […]

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