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Mahakaleshwar Jyotirling in Hindi – महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है जो एक मात्र दक्षिणामुखी ज्योतिर्लिंग है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर एक प्रमुख हिंदू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है और उज्जैन में सबसे महत्वपूर्ण पवित्र स्थानों में से एक है।

यहाँ पर हर साल बहोत सारे धार्मिक समारोहों और त्योहारों का आयोजन किया जाता है।

जिन्हे श्रद्धालुओं द्वारा बहोत ही भक्तिभाव और अलौकिक उत्साह के साथ मनाये जाते है। 

यह सारे त्योहारों के आलावा मंदिर में हररोज सुबह 4 बजे बहोत ही अदभुत भस्मआरती होती है जिसका अनुभव करना एक रोमांचकारी और अलौकिक अनुभव होता है।

आज हम इसी पवित्र महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में पुरे विस्तार से जानेंगे।

तो आइये फ्रेंड्स ज्यादा समय न लेते हुवे शुरू करते है।

भारत के मध्य में आए हुवे राज्य मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में एक प्राचीन शहर आया हुवा है जो आज उज्जैन के नाम से जाना जाता है।

यह शहर अपने आप में एक विशेष पौराणिक महत्व रखता है।

उज्जैन शहर क्षिप्रा नदी के पूर्वी तट पर बसा हुवा है।

यह शहर हिंदुओं के लिए कुछ सबसे पवित्र स्थानों में से एक है।

क्यूंकि उज्जैन में भगवान शंकर के बहोत ही पवित्र ज्योतिर्लिंग के आलावा और भी बहोत सारे देवी देवताओं के मंदिर आए हुवे है।

लोकवायका :

यहाँ पर एक ऐसी लोकवायका है की यदि आप यहाँ पर बैलगाड़ी भर के अनाज लाये और सिर्फ एक-एक मुठ्ठी अनाज हरेक मंदिर पर चढ़ाए तो अनाज खत्म हो जायेगा लेकिन मंदिर खत्म नहीं होंगे।

प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं में उज्जैन को पृथ्वी पर सबसे पवित्र शहर कहा गया है।

यह प्राचीन नगरी आज तक कई अलग अलग नाम से जानी जाती थी जैसेकि उज्जयिनी, अवंतिका, अवन्ति, अवंतिकापुरी और भगवती।

एक पवित्र नगरी होने का कारण यहाँ के अद्भुत मंदिर हंमेसा से ही यात्रालुओं के लिए आकर्षण का स्थान रहे है।

रंग-बिरंगे मंदिर त्यौहारों के मौसम के दौरान देखने लायक होते हैं।

जब विभिन्न अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है तब यहाँ का माहौल और भी ज्यादा अलौकिक बन जाता है।

इन सारे मंदिरों में महाकाल मंदिर पूरे उज्जैन में सबसे प्रसिद्ध और सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिर है।

इस जगह पर भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग यहीं पर आया हुवा है।

महाशिवरात्रि भगवान शंकर का सबसे पवित्र और लोकप्रिय त्यौहार है। उस दिन मंदिर के पास एक बहोत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga History - महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इतिहास

Image Credit : Wikipedia

महाकाल मंदिर का उल्लेख कई प्राचीन भारतीय काव्य ग्रंथों में भी मिलता है।

महाकाल मंदिर पहली बार कब अस्तित्व में आया, यह बताना मुश्किल है। हालांकि पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना सबसे पहले प्रजापति ब्रह्माजी ने की थी।

गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद, उज्जैन में एक के बाद एक कई राजवंशों, चालुक्यों, बाद के गुप्तों, कलचुरियों, पुष्यभुतियों, गुर्जर प्रतिहारों, राष्ट्रकूटों सहित राजनीतिक राजवंशों का वर्चस्व रहा। 

हालाँकि, सभी वंश ने महाकाल के सामने नतमस्तक रहें। 

इस अवधि के दौरान अवंतिका में कई देवी-देवताओं के मंदिर, कुंड और उद्यान बने। उस समय 84 महादेवों सहित कई मंदिर यहां पर मौजूद थे।

इस अवधि के दौरान मंदिर का महत्व दर्शाते हुवे कई काव्य ग्रंथ लिखे गए थे जिसमे, बाणभट्ट के हर्षचरित और कादम्बरी, श्री हरसा के नायसादचरित और पद्मगुप्त के नवसाहसकचरित मुख्य है।

महाकाल का वर्तमान मंदिर अठारहवें सदी के 4 वें – 5 वें दशकों के दौरान बनाया गया था। 

इसके साथ ही मराठा समुदाय के धार्मिक विचारों वाले रईसों ने भी मंदिर-परिसर में कई मंदिर बनवाए।

मंदिर प्रांगण में अन्य कई देवी देवताओं के मंदिर भी सुशोभित है। मंदिर के पास रूद्र सागर नामक झील है जिसमे स्नान करने का बहुत महत्व बताया जाता है। 

Mahakaleshwar Temple Architecture - महाकालेश्वर मंदिर बनावट

Mahakaleshwar Jyotirling in hindi

Image Credit : Wikimedia (Gyanendra_Singh_Chau)

पौराणिक ग्रंथो के अनुसार पुराना मंदिर बहुत ही शानदार हुवा करता था जिसकी नींव और मंच पत्थरों से बनी हुई थी। यह पूरा मंदिर लकड़ी के खंभो के ऊपर खड़ा था।

गुप्त काल के पहले उस समय के मंदिरों की छतें अधिक रूप से सपाट थी मतलब की मंदिर के ऊपर कोई शिखर नहीं हुवा करता था। 

संभवतः इस तथ्य के कारण, रघुवंशम में कालीदास ने इस मंदिर को ‘निकेतन’ के रूप में वर्णित किया था।

आज यह मंदिर विशाल रुद्र सागर झील के किनारे,हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र और उत्कृष्ट तीर्थस्थलों में से एक बना हुआ है, जो आगंतुकों को मन की पूरी तरह से अलग और बेजोड़ शांति प्रदान करता है।

मंदिर अपनी कलात्मकता और मूर्तिकला को प्रदर्शित करता है।

बनावट : 

उज्जैन में स्थित यह मंदिर तीन मंजिला है। जिसमें निचला हिस्सा,मध्य हिस्सा और उपलि मंजिल। 

मंदिर के निचले हिस्से में महाकालेश्वर, पहली मंजिल पर ओंकारेश्वर और सबसे उपले हिस्से में नागचंद्रेश्वर की लिंग स्थापित है।

तीर्थयात्रियों के लिए केवल नाग पंचमी के त्योहार पर ही नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उपलि मंजिल खुलती है।

मंदिर परिसर में एक कोटितीर्थ नाम का बड़ा कुंड भी आया हुवा है जो सर्वतोभद्र शैली में बनाया गया है। इस कुंड के पानी को अलौकिक और पवित्र माना जाता है।

कुंड की और जाती सीढ़ियों के रास्ते पर परमार काल के दौरान बनाये गए मंदिर और उनकी मूर्तिकला और चित्रकला की जलक आप देख सकते हो। 

कुंड की पूर्व दिशा में एक बड़े आकार का बरामदा बना हुवा है जिसमें मंदिर के गर्भगृह तक जाने वाला प्रवेशद्वार बना हुवा है।

उस बरामदे के उत्तरी भाग में एक कक्ष में श्री राम और अवंतिका देवी के चित्रों की पूजा की जाती है।

ज्योतिर्लिंग के अलावा, गणेश, कार्तिकेय और पार्वती की आकर्षक और छोटे आकार की प्रतिमाएं गर्भगृह में देखी जा सकती हैं। 

दीवारों के चारों ओर नन्दा दीपा सदैव प्रज्जवलित रहती है। 

मंदिर के गर्भगृह में भगवान शंकर के पवित्र शिवलिंग के आलावा श्री गणेश,कार्तिकेय और पार्वतीजी की भी प्रतिमाएं आयी हुई है। 

मंदिर की दीवारों के चारों और भगवान शिव की स्तुति में शास्त्रीय स्तुतियां प्रदर्शित की गई हैं।

महाकालेश्वर मंदिर वास्तुकला की दृस्टि से भूमीजा, चालुक्य और मराठा शैलियों की एक योजनाबद्ध बनावट है।

Mahakaleshwar Arti Timings - महाकालेश्वर आरती के समय

महाकाल मंदिर में बाबा की 5 आरती होती है जिसके समय इस प्रकार है। 

दर्शन समय : सुबह 4 Am से रात 11 Pm बजे तक 

चैत्र से आश्विन महीनों के दौरान आरती के समय..

प्रथम आरती ( भस्म आरती ) : 4 Am – 6 Am

द्वितीय आरती : 7:00 Am – 7:30 Am

तृतीय आरती (भोग आरती) : 10:00 Am – 10:30 Am

चतुर्थ आरती (सायं आरती ) : 5 Pm – 5:30 Pm

पांचवी आरती (आरती श्री महाकाल) : 7 Pm – 7:30 Pm

शयन आरती : 10:30 Pm – 11 Pm

मंदिर बंद होने का समय : रात को 11 बजे

कार्तिक से फाल्गुन महीनों के दौरान आरती के समय..

प्रथम आरती ( भस्म आरती ) : 4 Am – 6 Am

द्वितीय आरती : 7:30 Am – 8:00 Am

तृतीय आरती (भोग आरती) : 10:30 Am – 11:00 Am

चतुर्थ आरती (सायं आरती ) : 5:30 Pm – 6 Pm

पांचवी आरती (आरती श्री महाकाल) : 7:30 Pm – 8 Pm

शयन आरती : 10:30 Pm – 11 Pm

मंदिर बंद होने का समय : रात को 11 बजे

Bhasmarti - भस्मआरती

महाकाल की कुल 5 आरती होती है लेकिन उन सभी आरती में प्रतिदिन 4 बजे होने वाली भस्म आरती सबसे अलौकिक और खास होती है।

जिसमे आप महाकाल के एक अदभुत स्वरुप के दर्शन कर सकते हो।

इसी कारण भस्मआरती में सुबह 4 बजे भी भक्तों की काफी भीड़ होती है।

भस्म आरती में सिमित लोगों को पर्मीशन मिलती है इस लिए आप को महाकाल की अदभुत आरती को देखने के लिए पहले से बुकिंग करवानी पड़ती है। 

वैसे यह आरती की बुकिंग बिलकुल फ्री है। इसके लिए आप को एक भी रूपया देने की जरुरत नहीं। 

भस्मआरती की बुकिंग कैसे करवाए और भस्म आरती के बारे में सारी जानकारी मैंने एक दूसरे आर्टिकल में विस्तार से दी हुई है। जिसकी लिंक में निचे दे रहा हूँ। आप उसे जरूर से पढ़ें। 

ज्यादा पढ़ें : भस्म आरती की बुकिंग कहाँ से करवाए ?

Best time to Visit -महाकालेश्वर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है ?

आप के लिए नवंबर से लेकर मार्च के महीनों का समय यहाँ पर दर्शन के लिए सबसे बेहतर रहेगा।

Time to Required - जरुरी समय

3 – 4 hrs

Entry Fees - महाकालेश्वर में दर्शन के लिए कितनी टिकट है ?

Entry : फ्री ( आम श्रद्धालुओं के लिए )

VIP Darshan : 250/-  ( इसमें आप को कम भीड़ का सामना करना पड़ेगा और महाकाल शिवलिंग के दर्शन आम श्रद्धालुओं के मुकाबले ज्यादा नजदीक से करने का मौका मिलेगा/ किन्तु में पैसे दे कर दर्शन करने के खिलाफ हूँ लेकिन यह मेरी निजी राय है। )

Not allowd - मंदिर परिसर में क्या नहीं कर सकते ?

Photography – फोटोग्राफी

Short Clothing – छोटे कपडे पहनकर मंदिर में प्रवेश

Pats – पालतू प्राणी

Facility - सुविधा

व्हीलचेयर : व्हीलचेयर की सुविधा है।

लॉकर : फ़ोन और किंमती वस्तुओं के लिए लॉकर सुविधा उपलब्ध है।

Specific Dress Code - कौनसे कपडे पहनने जरुरी है ?

दर्शन : वैसे तो सिर्फ दर्शन के लिए कोई भी ड्रेस कोड नहीं है आप सामान्य कपड़ों में दर्शन कर सकते हो।

जलाभिषेक : लेकिन अगर आप जलाभिषेक करना चाहते हो तो पुरुषों के लिए धोती और स्त्रियों के लिए साड़ी अनिवार्य है।

( धोती और साड़ी आप को मंदिर के बहार दुकानों में रेंट पर मिल जाएगी )

How to reach mahakaleshwar Jyotirling ? - महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचे ?

अगर आप महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने उज्जैन जाना चाहते हो तो आइये हम यहाँ पर उसके बारे में थोड़ा जान लेते है।

By Air :

उज्जैन महाकालेश्वर से नजदीकी हवाईअड्डा इंदौर है जो यहाँ से करीब 57 किमी की दूरी पर आया हुवा है।

यहाँ से आप रैल,बस या टैक्सी की मदद से उज्जैन मंदिर तक आसानी से पहुँच सकते हो।

नजदीकी बड़े एयरपोर्ट..

  • इंदौर (IDR) : 57 km
  • भोपाल  (BHO) : 160 km
  • अहमदाबाद (AMD) : 323 km
  • सूरत (STV) : 388 km
  • जयपुर (JAI) : 405 km

By Rail :

उज्जैन का खुद का रेल्वे स्टेशन है जो राज्य और देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है।

महाकालेश्वर मंदिर रेल्वे स्टेशन से महज 1.4 किमी की दूरी पर ही आया हुवा है जहाँ से आप लोकल वेहीकल की मदद से आसानी से मंदिर तक पहुँच सकते हो।

By Bus :

उज्जैन शहर में नियमित रूप से सरकारी और प्राइवेट बस सुविधा उपलब्ध है जो राज्य के सभी और देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुडी हुई है।

Where to stay in Ujjain ? - उज्जैन में कहाँ पर रुकें ?

उज्जैन में ठहरने के लिए दो विकल्प है। 

एक की आप यहाँ आयी धर्म शाला में रुकें। 

दूसरा की आप यहाँ की प्राइवेट होटल्स में रुकें।

पहेला विकल्प :

1980 में आगंतुकों की सुविधा के लिए एक अलग मंडपम का निर्माण किया गया था। 

1992 में, मध्य प्रदेश सरकार और उज्जैन विकास प्राधिकरण ने विशेष रूप से मरम्मत में योगदान दिया और तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए अच्छी व्यस्था की गई है।

दूसरा विकल्प :

आप यहाँ पर आए प्राइवेट होटल्स में रुक सकते हो।

आप चाहे यहाँ ऑफिस के काम से आए हो या महाकाल दर्शन हेतु अपने फॅमिली के साथ,यहाँ पर आप की जरूरियात को पूरी करते हर प्रकार के होटल्स मिल जायेंगे।

में अच्छे और सस्ते होटल्स ढूंढने के लिए निचे कुछ लिंक दिए हुवे है। आप वहां से अपनी जरूरियात के अनुसार होटल्स ढूंढ सकते हो।

Temples near Mahakaleshwar Jyotirling

उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के आलावा आए हुवे दूसरे बड़े मंदिर कुछ इस प्रकार है।

  1. KalBhairava Temple – कालभैरव मंदिर
  2. Chintamani Ganesh Temple (Bade Ganpati) – चितामणि गणेश मंदिर (बड़े गणपति)
  3. Dwarikadhish Gopal Mandir – द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर
  4. ISKCON Temple – इस्कॉन मंदिर
  5. Navgrah Shani Mandir – नवग्रह शनि मंदिर
  6. Harisiddhi Temple – हरसिद्धि मंदिर
  7. Shri Mangalnath Temple – श्री मंगलनाथ मंदिर
  8. Chaubis Khamba Temple – चौबीस खंबा मंदिर
  9. Ram Ghat – राम घाट
  10. Gomti Kund – गोमती कुंड
  11. Simhasan Battisi Mandir – सिंहासन बत्तीसी मंदिर

भारत में ए हुवे भगवान शंकर दूसरे ज्योतिर्लिंग के बारे में भी मैंने विस्तार से आर्टिकल लिखे हुवे है। आप उसे भी जरूर से पढ़ें।

लिंक निचे दी हुई है।

Conclusion

यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

अगर आप महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

अगर आप को यह आर्टिकल में दी गयी जानकरी उपयोगी लगी हो तो एक लाइक करना न भूलें और अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कीजिये। 

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Note : आर्टिकल में दी गयी टिकट की किंमत समय समय पर बदल सकती है। मैंने यहाँ मौजूदा किंमत दी है जिसे में समय समय पर अपडेट करता रहूँगा। फिरभी आप दी गयी किंमत को लगभग किंमत मान कर चलें।

आशा करता हूँ की आप को आर्टिकल में दी गई जानकारी यहाँ पर घूमने आने के समय जरूर से मदद करेगी। 

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Anurag Misra · August 1, 2020 at 8:31 pm

Awesome Article

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