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Navghan Kuvo – अगर आप जूनागढ़ घूमने की सोच रहे है तो यह बेनमून नवघण कुवें को देखना न भूलें। यह आर्टिकल आप को इस नवघण कुवें के बारे में पूरी जानकारी देगा। तो आइये फ्रेंड्स शुरू करते है।

Places to visit in junagadh - Navghan kuvo

जूनागढ़ से करीब 2 किमी की दूरी पर उपरकोट का किला आया हुवा है। इस उपरकोट किले में दो स्टेपवेल( वाव ) प्रकारकी संरचना बनी हुवी है।

  1. नवघण कुवो 
  2. अड़ी-कड़ी वाव 

जिसमे से यहाँ पर आज हम नवघण कुवें के बारे में विस्तार से जानने का प्रयत्न करते है। 

अड़ी-कड़ी वाव के बारे में अलग से आर्टिकल लिखूंगा जो में यहाँ पर अपडेट कर दूंगा।

तो आइये फ्रेंड्स शुरू करते है। 

Navghan Kuvo Information - नवघण कुवो जानकारी

Navghan kuvo

नवघण कुवां उपरकोट किले में आया हुवा एक स्टेपवेल संरचना वाला पानी संग्रह करने के लिए बनाया गया था।

इस कुवें की चारों और बनी सीढ़ियों का निर्माण करीब 1026 ईस्वी में यहाँ के राजा नवघण द्वारा बनाया गया था जिसे पूरा उसके उत्तराधिकारी खेंगार ने करवाया था।

यह कुवां पूरी एक चट्टान को तराश के बनाया गया है और बाकि कुवों की तरह ही काफी गहरा भी है।

मैंने इसे स्टेपवेल जैसा इस लिए कहा क्यूंकि बाकि कुवों से अलग इस कुवें में सीढ़ियों के द्वारा इस कुवें की तलहटी तक चलके जाया जा सकता है।

कुवें की तलहटी तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों के साथ साथ हवा और प्रकाश पहुँच पाए उसके लिए बहोत अच्छी तरीके से दिवार में बड़े झरोखें बनाये गए है। 

यह सीढियाँ करीब 52 मीटर यानि करीब 170 फ़ीट तक निचे जाती है। जो कुवें के चारों और सर्पिल आकार में निचे की और जाती है जो बाकि कुवों से असामान्य है।

Navghan kuvo

यह कुवां राज्य संरक्षित स्मारक (S-GJ-116) है। 

अगर आप चाहें तो गुजरात राज्य में आये हुवे सारे सरंक्षित स्मारकों के बारे में निचे दी गयी लिंक पर जाके ज्यादा जान सकते हो।

Reference : Protected Monuments in Gujarat

Stepwell - स्टेपवेल (वाव)

Navghan kuvo

दोस्तों आइये इस कुवें के बारे में ज्यादा जानने से पहले स्टेपवेल किसे कहते है उसके बारे में संक्षिप्त में जान लेते है।

स्टेपवेल पानी संग्रह करने के लिए बनायीं गई एक संरचना है जिसमे व्यक्ति कुवें के जलस्तर तक पहुँच कर पानी भर सकता है। जिसमे कुवें के अंदर सीढियाँ बनाई होती है जिसका उपयोग करके कुवें की तलहटी पर जाया जा सकते है। जो कई मंजिला निचे होता है।

जब की कुवें संरचना में व्यक्ति को कुवें के ऊपर से ही किसी रस्सी या दूसरे माध्यम से पानी को भरना पड़ता है।

स्टेपवेल जैसी संरचना पश्चिमी भारत में ज्यादा पायी गई है।

मौसमी चढाव उतार के समय पानी की जरूरियात को संभाले रखने के लिए मुख्य तौर से स्टेपवेल निर्माण करवाया जाता था। जो आकर में कुवें से बड़ी होती है और कुवें के मुकाबले ज्यादा पानी संग्रह करने की क्षमता रखती है।

मैं भारत में आयी सारी स्टेपवेल के बारे में एक आर्टिकल विस्तार से लिखने की सोच रहा हूँ जिसमें सारी स्टेपवेल के बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा। 

जैसे ही वह आर्टिकल पूरा हो जायेगा तो उसकी लिंक में यहाँ पर जरूर दे दूंगा। आप मेरी इस वेबसाइट को जरूर से सबस्क्राइब कर लीजिये जिससे मैं कोई भी नया आर्टिकल डालूं तो आप को उसका नोटिफिकेशन सबसे पहले मिले।

Navghan Kuvo History - नवघण कुवो इतिहास

Navghan kuvo

रा’नवघण गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के एक चुडासमा राजा थे। उन्होंने 11 वि शताब्दी के अंत समय में शाशन किया था और उनकी राजधानी जूनागढ़ में थी। 

यह नवघण कुवें का नाम उस समय के वहां के चुडासमा राजा रा’नवघण के ऊपर से रखा गया था। ऐसा माना जाता है की कुवें की सीढ़ियों का निर्माण उनके शाशन काल में करवाया गया था जिस कार्य को पूर्ण उनके उत्तराधिकारी रा’खेंगार ने करवाया था।

कुवें को उससे भी काफी पुराना माना जाता है। ऐसा माना जाता है की कुवां क्षत्रप समयकाल ( 2-4 शताब्दी) या मैत्रक समयकाल ( 6-7 वि शताब्दी ) के दौरान बनाया गया था।

चुडासमा राजपूतों की एक पेटा ज्ञाति है। जिनकी प्राचीन राजधानी वंथली थी और नौ वि सदी में जूनागढ़ थी।

10 वि और 11 वि शताब्दी में चुडासमा राजाओं का स्थिर साम्राज्य पुरे सौराष्ट्र में स्थापित था। जिन्होंने यहाँ पर करीब 600 साल तक राज किया था।

Kings of Chudasama - चुडासमा राजवंश

इनका शाशनकाल सन 875 से शुरू हुवा था जिनकी संक्षिप्त जानकारी निचे दे रहा हूँ।

प्रथम राजा चंद्रचूड़ थे जिन्होंने अपना नाम चूड़ा और अपने पिता का नाम समा को जोड़के चुडासमा साख की शुरुवात की थीं ऐसा माना जाता है।

  1. चंद्रचूड़ –सन 875-907 
  2. मूलराज – 907-915
  3. विश्ववराह – 915-940 ( मूलराज के पुत्र विश्ववराह थे। चुडासमा राजवंश के इतिहास में महाराजा विश्ववराह एक महान राजा थे। उनके नाम के पीछे के शब्द वराह के ऊपर से उनके बाद के सारे राजाओं ने अपने नाम के आगे राह शब्द का उपयोग करना शुरू किया था। इस लिए उनके बाद के सारें शाशकों के नाम के आगे रा’ लगाया जाने लगा। )
  4. रा’ग्रहरिपु – सन 940-982
  5. रा’कांवट – 982-1003
  6. रा’दियास – 1003-1010
  7. सोलंकी शासन – 1010-1025
  8. रा’नवघण प्रथम – 1025-1044
  9. रा’खेंगार प्रथम – 1044-1067
  10. रा’नवघण द्वीतीय – 1067-1098
  11. रा’खेंगार द्वीतीय – 1098-1114
  12. सोलंकी शासन – 1114-1125
  13. रा’नवघण तृतीय – 1125-1140
  14. रा’कांवट द्वीतीय – 1140-1152
  15. रा’जयसिंह – 1152-1180
  16. रा’रायसिंह – 1180-1184
  17. रा’महिपाल – 1184-1201 
  18. रा’जयमल – 1201-1230
  19. रा’जयसिंह – 1230-1253
  20. रा’खेंगार तृतीय – 1253-1260
  21. रा’मांडलिक – 1260-1306
  22. रा’नवघण चतुर्थ – 1306-1308
  23. रा’महिपाल तृतीय – 1308-1325
  24. रा’खेंगार चतुर्थ – 1325-1351
  25. रा’जयसिंह द्वीतीय – 1351-1373
  26. रा’महिपाल चतुर्थ -1373
  27. रा’मुक्तसिंहजी / रा’मोकलसिंहजी – 1373-1398
  28. रा’मांडलिक द्वीतीय – 1397-1400
  29. रा’मेलिंगदेव – 1400-1415
  30. रा’जयसिंहजी तृतीय – 1415-1440
  31. रा’महिपाल पंचम – 1440-1451
  32. रा’मांडलिक तृतीय – 1451-1473 ( चुडासमा वंश के आखरी शाशक थे। रा’मांडलिक तृतीय के पराजय के बाद उनके पुत्र भूपतसिंहजी को महम्मद बेगड़ा ने उनको जूनागढ़ के सामंत के रूप में स्थापित किया और तब से उनके वंशजो रायजादा कहलाने लगे। )

Navghan Kuvo Timings - नवघण कुवो टाइमिंग्स

9 Am – 7 Pm

Navghan Kuvo Entry Fees - नवघण कुवो एंट्री फीस

Free – यहाँ पर घूमने के लिए कोई भी प्रकार की टिकट नहीं है मतलब आप इस कुवें  को बिलकुल फ्री में देख सकते हो।

Time to spend - घूमने में कितना समय लगेगा

30 min- 1 hrs

Best time to visit Navghan Kuvo - घूमने के लिए सबसे अच्छा समय

Navghan kuvo

सर्दियों का समय अच्छा रहेगा यहाँ पर घूमने आने के लिए क्यूंकि गर्मियों के समय में यह नवघण कुवें के अंदर का तापमान तो कम होता है लेकिन यहाँ के आस पास की जगहों को देखने में ऊँचा तापमान आप को परेशान कर सकता है।

इस लिए अगर आप यहाँ पर घूमने जाने का प्लान बना रहे हो तो अक्टूबर से लेकर मार्च का महीना अच्छा रहेगा।

How to Reach Navghan Kuvo-नवघण कुवें तक कैसे पहुंचे ?

By Air :

जूनागढ़ का खुद का कोई हवाई अड्डा नहीं है। यहाँ से नजदीकी हवाईअड्डा राजकोट है जो यहाँ से करीब 102 किमी की दूरी पर आया हुवा है। जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुवा है।

जहाँ से आप को राज्य सरकार परिवहन की बसें, प्राइवेट वॉल्वो बसें, रेल्वे, टेक्सी या कैब की मदद से आसानी से जूनागढ़ पहुँच सकते है। यह नवघण कुवां जूनागढ़ से करीब 2 किमी की दूरीपर ही आया हुवा है।

By Rail :

जूनागढ़ का खुद का रेल्वे स्टेशन है जो राज्य एवं देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुवा है। जूनागढ़ भारतीय रेल्वे के पश्चिमी रेल्वे नेटवर्क पर स्थित है। कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें हैं जो रोज़ाना संचालित होती हैं और राजकोट से जूनागढ़ की यात्रा के लिए एकदम सही हैं।

जूनागढ़ रेल्वे स्टेशन से आप लोकल व्हीकल द्वारा यहाँ तक आसानी से पहुँच सकते हो।

By Road :

जूनागढ़ रोड द्वारा गुजरात के दूसरे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। जिनमे से कुछ प्रमुख शहरों से दूरी इस प्रकार है

  • अहमदाबाद – करीब 330 किमी
  • राजकोट – करीब 100  किमी
  • पोरबंदर – करीब 115 किमी

Where to stay-कहाँ पर रुकें?

जूनागढ़ में रहने के दो विकल्प है।

  1. आश्रम या धर्मशाला 
  2. प्राइवेट होटल्स

Junagadh Ashram - जूनागढ़ आश्रम

जूनागढ़ में कई जैन देरासर,हिंदू मंदिर,मुस्लिम मकबरा,बौद्ध गुफाएं आए हुवे है जिनकी वजह से जूनागढ़ सभी धर्म के लोगों के लिए एक पवित्र यात्रा धाम है। 

इस लिए यहाँ पर बहोत सारे आश्रम और धर्मशालाएं आयी हुवी है जहाँ पर आप को आसानी से सस्ते दामों में रूम मिल जायेंगे। 

लेकिन जूनागढ़ में मुख्य मनाये जाने वाले तहेवारों में भगवान शंकर के भवनाथ का महाशिवरात्रि का मेला और देव दिवाली जो कार्तिक पूर्णिमा में होती है तब साल में सिर्फ एक बार ही होने वाली 5 दिनों की लिली परिक्रमा जो पुरे गिरनार की होती है उस समय यहाँ पर भक्तों का काफी जमावड़ा होता है। 

इस लिए यह समय में अगर आप को यहाँ पर घूमने आना है तो आप को करीब 20 से 25 दिन पहले ही रूम बुक करवाने होंगे वार्ना यहाँ पर रूम मिलना बहोत ही मुश्किल होगा।

Junagadh Private Hotels - प्राइवेट होटल्स

अगर आप आश्रम या कोई धर्मशाला में रुकना नहीं चाहते तो यहाँ पर कई सारी प्राइवेट होटल्स भी आयी हुवी है जहाँ पर आप रूम  ऑनलाइन भी बुक कर सकते हो। 

होटल्स ढूंढने के लिए में कुछ लिंक दे रहा हूँ जहाँ से आप अपनी जरूरियात के मुताबिक होटल्स ढूंढ सकते हो।

Places to Visit Near Navghan Kuvo - नजदीक में देखने लायक स्थान

नवघण कुवें के पास में कई और पौराणिक और आध्यात्मिक जगहें आयी हुवी है जिसे आप साथ साथ में घूम सकते है।

  • अशोक शिलालेख
  • उपरकोट किला-अड़ी-कड़ी वाव- बुद्धिस्ट गुफा
  • नरसिंह महेता का चोरा
  • दामोदर कुंड
  • गायत्री शक्तिपीठ 
  • दातार पहाड़ी
  • गिरनार पहाड़ी
  • स्वामीनारायण मंदिर
  • सककरबाग चिड़ियाघर
  • दरबार संग्रहालय
  • महाबत मकबरा

Conclusion - निष्कर्ष

दोस्तों यह जगह आप ने पहले कभी नहीं देखि होगी वैसी जगह है। कुवें के अंदर चल के जाना एक अलग ही बहोत ही सुन्दर अनुभूति करवाता है। 

लेकिन इतने सुन्दर तरीके से बनावट होने के बावजूद इस जगह की किसी तरह से देखभाल नहीं की जा रही। सीढिया कचरों से भरी है। कुवें का पानी पर्यटकों द्वारा फेंकी गयी प्लास्टिक की बोतलों से भरा पड़ा है। कबूतरों के मॉल के कारन यहाँ की हवा में एक अलग तरह की गंध फैली हुवी है। 

अगर आप हिस्टोरिकल जगहे देखने के सौखीन है तो यह जगह की ख़राब चीजें आप के लिए कोई मायने नहीं रखेगी आप फिरभी इस जगह को बहोत ही अच्छी तरह से एन्जॉय कर सकोगे।

लेकिन आप सिर्फ एक पर्यटक है और सिर्फ साफ़ सुथरी जगहें घूमने की इच्छा आये हो तो यहाँ की यह बुरी चीजें आप को विचलित कर सकती है।

कहीं भी कुछ दिनों के लिए घूमने जाने से पहले कुछ चीजों का ख्याल रखना जरुरी है जिसके बारे में मैंने एक आर्टिकल लिखा हुवा है अगर आप चाहे तो पढ़ सकते हो।

ज्यादा पढ़ें : 15 Important travel tips

Request - अनुरोध

Navghan Kuvo – दोस्तों हमारी हिस्टोरिकल जगहों को सँभालने की जितनी जिम्मेदारी सरकार की है उतनी ही जिम्मेदारी हमारी सब की है।  

मेरा आप सब से यह अनुरोध है की किसी भी ऐसी सुन्दर जगह को प्लास्टिक या दूसरे किसी भी कचरे से गंदा न करें या किसीको करने दें।

मैंने यह आर्टिकल हाल ही में यहाँ घूमने गया था उसके आधार पर लिखा हुवा है। अगर आप को यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो जरूर से अपने दोस्तों में शेयर करें और मेरी इस वेबसाइट को सब्सक्राइब जरूर से करें जिससे आने वाले मेरे सारे आर्टिकल का नोटिफिकेशन आप को सबसे पहले मिले।

मेरे इस आर्टिकल को अपना अमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Adi Kadi Vav Junagadh / History / Timings / Entry Fees etc. - travellgroup · February 10, 2020 at 10:10 pm

[…] Navghan Kuvo.. […]

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