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पावागढ़ मंदिर – अगर आप महाकाली माता के यह पवित्र स्थल पावागढ़ दर्शन के लिए आने की सोच रहे हो तो यह आर्टिकल से आप पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हो।

गुजरात के पंचमहाल जिले के हालोल तालुका में पावागढ़ पर्वत पर माता महाकाली का एक पौराणिक मंदिर बना हुवा है।

पावागढ़ में महाकाली माता का 10-11 वि सताब्दी में बना हुवा मंदिर आया हुवा है। यह मंदिर हिन्दू धर्म का एक पौराणिक मंदिर है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है क्योंकि सती के पैर का अंगूठा यहां गिरा था।

जो भारत के गुजरात राज्य के हालोल के पास चंपानेर में आया हुवा है। महाकाली या कालीमाता मंदिर गुजरात में सबसे लोकप्रिय तीर्थ स्थलों में से एक है।

यह मंदिर घने जंगल के बिच आये हुवे एक पहाड़ी चट्टान पर बना हुवा है जो समुद्र तल से करीब 800 मीटर ( 2625 फ़ीट ) की ऊंचाई पर आया हुवा है।

मंदिर मुख्य सड़क से 5 किमी (3.1 मील ) की दूरी पर जंगल के बिच में आया हुवा है जहाँ पर एक पक्की सड़क के माध्यम से जाया जा सकता है।

धार्मिक और साहसिक प्रेमियों के लिए बहुत अच्छी जगह है। पावागढ़ को महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि के रूप में भी जाना जाता है।

गुजरात के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। पावागढ़ चंपानेर के ऐतिहासिक स्मारकों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिन्हें यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। 

Referance : 

https://whc.unesco.org/en/list/1101

Mahakali ka Pragaty - महाकाली का प्रागट्य

श्रीमद देवी भागवत के पांचवे स्कंध में एक उल्लेख के अनुसार शुभ-निशुंभ नाम के दो असुर ने ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त करके तीनों लोक में अपना अधिपत्य स्थापित कर दिया था। जिसकी वजह से सारे देवताओं ने माता शक्ति – देवी जगदंबा से प्रार्थना की तब माता कौशिके का प्रागट्य हुवा।

जिसका स्वरुप काला था इस लिए माता कलिका के नाम से प्रसिद्ध हुवे। और असुरो से देवताओं को मुक्ति दिलाई।

यही कलिका देवी ने ही चण्ड-मुंड नाम के राक्षसों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी जो माता चामुंडा के नाम से प्रसिद्ध हुवे। जो चोटिला डूंगर पर बिराजित है। जिसके बारे में मैंने अलग से पूरा आर्टिकल लिखा हुवा है जिसे आप चाहो तो चोटिला मंदिर लिंक पर जाके विस्तार से पढ़ सकते हो।

असुरो के संहार करते करते माता ज्यादा उग्र स्वरुप धारण करने लगी और पृथ्वी के सारे असुरों का संहार करने लगी। 

सारे असुरों का संहार करने के बाद भी माता शांत न हुई और ज्यादा रौद्र होने लगी तब देवता गण वापिस चिंतित हुवे और माता के इस रौद्र स्वरुप को देखकर घबरा गए क्यूंकि माता काली को शांत करने का सामर्थ्य किसी भी देवता में नहीं था।

इस लिए देवताओं ने देवो के देव महादेव से मदद मांगी। महाकाली के रौद्र स्वरुप को देख कर महादेव भी चिंतित हुवे और दूसरा कोई रास्ता न मिलने की वजह से महादेव खुद माता काली के रास्ते में जमीन पर लेट गए।

माता काली इतने क्रोधित थे की उन्होंने चलते चलते भगवन शिव पर अपना पैर रख दिया। पैर रखते ही उनको पता चल गया की उन्होंने अपने स्वामी महादेव पर ही पैर रख दिया है तब उनके मुंह से जीभ निकल गयी और आखिर में माता शांत हुई और माता पार्वती के मूल स्वरुप में परिवर्तित हुवे। 

यहाँ पावागढ़ में माता का शांत स्वरूप बिराजित है।

Pavagadh Mandir

Pavagadh History - पावागढ़ इतिहास..

लोक वयका के अनुसार ऋषि विश्वामित्र ने हजारों सालों तक यहाँ पर तपस्चर्या की थी जिससे माता प्रसन्न हुवे और उनको ब्रह्मत्व का वरदान दिया और माता यहाँ पर ही बिराजित हो गए।

विश्वामित्री नदी का उद्गम स्थान भी इसी पावागढ़ में ही आया हुवा है।

दन्त कथाओं के अनुसार नवरात्री के नौ दिनों माता यहाँ पर रूप बदलकर गरबे घूमने आती है। यहाँ पर आशो सूद ८ का विशेष महत्त्व है।

यहाँ पर आये चांपानेर को UNESCO द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोसित किया गया है।

ऐसा कहा जाता है नौ वि सदी में गजरात के राजा वनराज चावड़ा ने अपने मंत्री चांपा की याद में इस नगर का नाम चांपानेर रखा था। भूतकाल में पतई वंश के रावल राजाओं यहाँ पर सत्ता सँभालते थे जो वंश परंपरागत तौर से पतई रावल जयसिंह के हाथों में आई। 

यहाँ की दन्त कथा के अनुसार एक बार नवरात्री में एक सुंदर युवती का रूप धारण करके माता जब यहाँ पर गरबे घूम रहे थे तब पतई रावल जयसिंह ने उनसे कुछ ऐसी मांग कर डाली जिससे माता क्रोधित हो गए और राजा को श्राप दे डाला की तुम्हारे इस नगर का जल्द ही नाश हो जायेगा।

माता के श्राप के कुछ दिनों बाद ही महुम्मद बेगड़ा ने यहाँ पर चढाई की जिसमे पतई राजा की हार हुई और पतई राज का अंत हो गया।

उसके बाद यहाँ पर मुस्लिम शाशन और अंग्रेज शाशन भी आया लेकिन माता के इस स्थान का महत्त्व कभी कम नहीं हुवा।

How to Reach Pavagadh - पावागढ़ कैसे पहुंचे ?

By Air..

नजदीकी हवाई अड्डा वड़ोदरा है जो यहाँ से करीब 48 किमी की दूरी पर आया हुवा है। वड़ोदरा देश के कई मुख्य शहरों से हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। एयर पोर्ट से आप को टैक्सी मिल जाएगी जो आप को पावागढ़ तक पहुंचा देगी।

By Rail..

पावागढ़ से निकटतम रेल्वे स्टेशन चंपानेर रोड नाम का है। लेकिन इस स्टेशन में कुछ लोकल ट्रैन ही रूकती है। इस लिए आप पहले वड़ोदरा रेल्वे स्टेशन पर पहुँच जाइये और वहां से या तो रेल से चंपानेर पहुँच जाइये या वड़ोदरा से गवर्नमेंट बसिस या कैब की मदद से पावागढ़ पहुँच सकते हो।

By Bus..

वैसे तो पावागढ़ के लिए देश के बड़े शहरों से बस की सुविधा कम है इस लिए हो सके तो आप ट्रैन या फ्लाइट की मदद से पहले वड़ोदरा पहुँच जाइये उसके बाद वहां से आप को बस, कैब या अन्य लोकल व्हीकल की मदद से पावागढ़ के मांची गांव पहुँच जाइये। जहाँ से लोकल व्हीकल सुबह 5 बजे से पावागढ़ तलेटी पर ले जाती है। जो मांची से करीब 5 किमी की दूरी पर है।

Pavagadh Mandir

How to Reach Pavagadh Mandir - पावागढ़ मंदिर तक कैसे पहुंचे ?

एक बार आप मुख्य सड़क मांची से 5 किमी अंदर पहाड़ी की तलेटी में पहुँच जाओ तब वहां से मंदिर तक पहुँचने के तीन तरीके है।

1  पैदल चल कर.. 

अगर आप पैदल चलने का विकल्प पसंद करते हो तो मंदिर तक पहुँचता रास्ता पुराने महल के खंडहरों के बिच से गुजरता है। सीढियाँ करीब 1800 से 2000 है। जिसको चढ़ना उतना भी मुश्किल नहीं है क्यूंकि सीढियाँ बिच बिच में खुले मैदान से हो कर निकलती है जिससे आप बिच बिच में थोड़ा आराम भी कर सकते हो। 

और मंदिर तक पहुँचते रास्ते में कई छोटी दुकानें बनी है जहाँ आप को ठंडा पानी, निम्बू पानी, थोड़ी खाने की चीजें और चाय भी मिल जाएगी।

2 कावड़ में..

अगर आप की उम्र ज्यादा है या आप अपने माता पिता के साथ यहाँ पर दर्शन करने आए है तो यहाँ पर दूसरी जगहों की तरह कावड़ की सुविधा है और यहाँ के स्थानिक लोग कुछ सामान्य चार्ज लेकर श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु माता के मंदिर तक पहुंचाते है।

3 रोपवे के माध्यम से..

पावागढ़ रोप वे स्टेशन माची हवेली के पास बना हुवा है। जो आप को एक निश्चित जगह पर उतारती है। जहाँ से करीब 200-250 सीढियाँ चढ़के आप मंदिर तक पहुँच सकते हो। यह सीढियाँ खड़ी है जिसकी वजह से थोड़ी मुश्किल भी। 

जहाँ पर रोप वे आप को ड्रॉप करता है वहां एक कुदरती तरीके से बना हुवा एक बड़ा तालाब, माता के लिए प्रशाद की दुकानें, और जैन मंदिर भी बने हुवे है।

Pavagadh Mandir

Pavagadh Ropeway Details - पावागढ़ रोपवे डिटेल्स

यहाँ पर रोप वे सुविधा उपलब्ध है जिसे 1986 में चालू किया गया था।

रोप वे करीब 740 मीटर (2430 फ़ीट ) लम्बाई में बना हुवा है जो मोनो केबल है जो प्रति घंटे में करीब 1000-1200 लोगों को ले जा सकता है।

पावागढ़ में आया हुवा यह रोपवे भारत के कुछ सबसे ज्यादा क्षमता वाले रोपवे में से एक है।

रोप वे से मंदिर तक पहुँचने के लिए करीब 10 से 15 मिनट्स लगते है। लेकिन रविवार और नवरात्री और दूसरे बड़े त्यौहारों में यहाँ काफी भीड़ रहती है जिसकी वजह से रोप वे में बड़ी लाइनें लगती है जो थोड़ा तकलीफदेह रहता है। इस लिए हो सके तो उन दिनों में यहाँ पर जाना पसंद न करे तो बहेतर रहेगा।

रोपवे सप्ताह के सभी दिनों में उपलब्ध है। जो सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक संचालित होता है। आखिरी रिटर्न केबल कार शाम 7:30 बजे है।

हाल ही में केबल कार की क्षमता में सुधार करने और मंदिर के पास इसे आगे ले जाने के लिए प्रावधान पारित किया गया है। जिसका लाभ जल्द ही दर्शनार्थियों को मिल जायेगा।

रोप वे में दो प्रकार की टिकट उपलब्ध है (116 और 210)। वैसे तो 116 की टिकट ही सुझाव योग्य है लेकिन भीड़ के दिनों में 210 आपको समय पर कुछ लाभ देगा लेकिन शुरू में आपको एक ही कतार का पालन करना होगा।

Pavagadh Mandir

Pavagadh Mandir Arti Timings - पावागढ़ मंदिर आरती टाइमिंग्स

आप पावागढ़ मंदिर में दिन में 5:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक कभी भी दर्शन कर सकते हैं।

मंदिर पूरे साल खुला रहता है। कोई प्रवेश प्रतिबंध नहीं है।

  • सुबह की मंगला आरती : 5:00 AM
  • शाम की आरती : 6:30 PM

Entry Fee - एंट्री फी

यहाँ पर दर्शन की कोई फीस नहीं है। माता के दर्शन आप बिलकुल फ्री में कर सकते है।

Parking Fee : 70/-

Best time to visit - घूमने के लिए बढ़िया समय

सबसे अच्छा समय शर्दियाँ और बारिश का मौसम है। यानि की जुलाई से मार्च के दौरान आप यहाँ पर आ सकते है और यहाँ माता के दर्शन के  साथ साथ आप मौसम का आनंद उठा सकते हो।

Where to stay ? - कहाँ पर रुकें ?

पावागढ़ में रुकने के दो तरीके है।

  1. आप यहाँ की धर्मशाला में रुकें.. 
  2. आप यहाँ पर आई प्राइवेट होटल्स में रुकें.. 
1.आप यहाँ की धर्मशाला या गेस्ट हाउस में रुकें.. 
महाकाली धाम धर्मशाला – पावागढ़ में महाकाली धाम धर्मशाला आई हुई है जो पावागढ़ राजमार्ग के पास स्थित है। कमरे केवल बुनियादी सुविधाओं के साथ सरल हैं। यह परिवार और समूह के आवास के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है।
यहाँ पर छोटे रूम के साथ साथ बड़े हॉल भी है जिसमे ग्रुप स्टे हो सकता है।

श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र – चंपानेर, दिगम्बर जैन धर्मशाला सिद्धक्षेत्र, पावागढ़ बस स्टैंड के पास स्थित है। धर्मशाला मेहमानों के लिए सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ एक शांतिपूर्ण प्रवास प्रदान करता है। धर्मशाला के परिसर के अंदर भोजन भी उपलब्ध है। 

उस्मा सची विश्रांति भुवन – चंपानेर में उस्मा साची विश्रांति भुवन, चंपानेर के बस स्टेशन के ठीक बगल में पावागढ़ स्थित है। यत्री में विशाल और स्वच्छ एसी कमरे मिल सकते हैं। यह परिवार के साथ रहने के लिए आदर्श है और समूह में रहने के लिए अच्छा विकल्प भी है।

2. आप यहाँ पर आई प्राइवेट होटल्स में रुकें..
अगर आप धर्मशाला में रुकना नहीं चाहते हो तो यहाँ पर थोड़ी प्राइवेट होटल्स भी आई हुई है जिसकी ज्यादा जानकारी आप निचे दी गई लिंक पर जाके देख सकते हो। जहाँ से आप अपनी जरूरियात के मुताबिक रूम बुक कर सकते हो।

Pavagadh Mandir

Distance From Main Cities - मुख्य शहरों से दूरी

  • बरोडा – 50 km
  • डाकोर – 71 km
  • आणंद – 87 km
  • नडियाद – 104 km
  • अहमदाबाद – 150 km
  • सूरत – 202 km

मैंने अपने खुद के अनुभव से यह आर्टिकल लिखा है। साथ में ऑनलाइन riviews की मदद से लिखा हुवा है। दर्शाई गई टिकट के रेट समय के अनुसार बदल सकते है। अगर आप को यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कीजिये।

अपना अमूल्य समय इस आर्टिकल को देने के लिए धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Poicha Nilkanth Dham Timings/accommodation/Pradarshan - travellgroup · March 22, 2020 at 7:47 pm

[…] Read More : Pavagadh Mahakali Temple […]

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