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Places to Visit In Junagadhजूनागढ़ कई संतो,महंतो,सिद्धपुरुषों,तीर्थंकरों और अघोरि साधुओं की साधनाओं वाली एक पवित्र भूमि है।

जहाँ हर धर्म के लोगों की आस्था और विस्वास जुड़ा हुवा है। आइये आज हम इस आर्टिकल द्वारा जूनागढ़ का इतिहास और यहाँ की देखने लायक सारी जगहों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते है।

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Junagadh - जूनागढ़

जूनागढ़ शहर भारत के पश्चिम दिशा में आये हुवे गुजरात राज्य में काठियावाड़ क्षेत्र में आया हुवा है।

जूनागढ़ शहर कई आध्यात्मिक और ऎतिहासिक वजहों से देश और विदेश में जाना जाता है।

गुजराती भाषा में जूनागढ़ का मतलब होता है प्राचीन किला। आज जूनागढ़ दो भागों में बटा हुवा है।

एक मुख्य शहर और दूसरा उपरकोट।

उपरकोट एक प्राचीन किला है जो शहर के पश्चिम में स्थित है। यह किला गुप्त वंश और मौर्य वंश के शाशकों के लिए बहोत ही उपयोगी साबित हूवा था। क्यूंकि इसकी विशिष्ट स्थान पर होने के कारण किले ने 1000 वर्षों में करीब 16 आक्रमणों का सफलता पूर्वक सामना किया था। 

जूनागढ़ में कई…

  • स्मारकों,
  • ऎतिहासिक स्थलों,
  • हिंदू और जैन धर्म के पौराणिक मंदिरो और जिनालयों,
  • बौद्ध स्तूपों,
  • संग्रहालय,
  • फोर्ट,
  • तालाबों और
  • यहाँ के राजाओं के शिलालेख आये हुवे है जो यहाँ पर घूमने आये प्रवासियों को देश विदेश से आकर्षित करते है।

Places to visit in Junagadh - जूनागढ़ में देखने लायक जगह

Places to visit in junagadh -Junagadh Place Chart

अगर आप जूनागढ़ घूमने आने का प्लानिंग कर रहे हो तो यह जगहों को एक बार जरूर से देखने का प्रयत्न करें।

  1. भवनाथ टेम्पल 
  2. अशोक शिलालेख
  3. उपरकोट किला
  4. अड़ी-कड़ी वाव
  5. नवघण कुवां 
  6. बुद्धिस्ट गुफा
  7. बाबा प्यारा की गुफा (दूसरी शताब्दी)
  8. नरसिंह महेता का चोरा
  9. दामोदर कुंड
  10. गायत्री शक्तिपीठ
  11. दातार पहाड़ी
  12. गिरनार पहाड़ी
  13. स्वामीनारायण मंदिर
  14. सककरबाग प्राणीउद्यान
  15. दरबार संग्रहालय
  16. महाबत मकबरा
  17. गिर नेशनल पार्क 
  18. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 

Junagadh History - जूनागढ़ इतिहास

ऐसा माना जाता है की इस शहर का निर्माण करीब 9 वि शताब्दी में चुडासमा राजवंश के शाशन काल में हूवा था। जूनागढ़ चुडासमा राजवंश की राजधानी भी हूवा करती थी।

यहाँ पर तीन राजवंशों की प्रतिनिधित्व करने वाले शिलालेख भी पाए गए है जिसके कारण इस जगह का पौराणिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

यहाँ पर मौर्य शाशक अशोक (260 – 238 ईसा पूर्व), रुद्रदामन (150 ईस्वी) और स्कंदगुप्त (लगभग 455 – 467) के लेख मिले है।

यहाँ पर बौधि संप्रदाय की 100 – 700 ईस्वी में बनायीं गयी बौधि गुफाएं और स्तूप भी आया हूवा है।

15 वि शताब्दी तक यह स्थान राजपूतों का गढ़ रहा था जिसे सन 1472 में गुजरात के सम्राट महूमद बेगड़ा ने आक्रमण करके कब्ज़ा कर लिया। 

Chudasama Shashankal - चुडासमा राजवंश

चुडासमा राजपूतों की एक पेटा ज्ञाति है। जिनकी प्राचीन राजधानी वंथली थी और 9 वि सदी में जूनागढ़ थी।

10 वि और 11 वि शताब्दी में चुडासमा राजाओं का स्थिर साम्राज्य पुरे सौराष्ट्र में स्थापित था। जिन्होंने यहाँ पर करीब 600 साल तक राज किया था।

इनका शाशनकाल सन 875 से शुरू हुवा था जिनकी संक्षिप्त जानकारी निचे दे रहा हूँ।

प्रथम राजा चंद्रचूड़ थे जिन्होंने अपना नाम चूड़ा और अपने पिता का नाम समा को जोड़के चुडासमा साख की शुरुवात की थीं ऐसा माना जाता है।

  1. चंद्रचूड़ – 875-907 
  2. मूलराज – 907-915
  3. विश्ववराह – 915-940 ( मूलराज के पुत्र विश्ववराह थे। चुडासमा राजवंश के इतिहास में महाराजा विश्ववराह एक महान राजा थे। उनके नाम के पीछे के शब्द वराह के ऊपर से उनके बाद के सारे राजाओं ने अपने नाम के आगे राह शब्द का उपयोग करना शुरू किया था। इस लिए उनके बाद के सारें शाशकों के नाम के आगे रा’ लगाया जाने लगा। )
  4. रा’ग्रहरिपु – सन 940-982
  5. रा’कांवट – 982-1003
  6. रा’दियास – 1003-1010
  7. सोलंकी शासन – 1010-1025
  8. रा’नवघण प्रथम – 1025-1044
  9. रा’खेंगार प्रथम – 1044-1067
  10. रा’नवघण द्वीतीय – 1067-1098
  11. रा’खेंगार द्वीतीय – 1098-1114
  12. सोलंकी शासन – 1114-1125
  13. रा’नवघण तृतीय – 1125-1140
  14. रा’कांवट द्वीतीय – 1140-1152
  15. रा’जयसिंह – 1152-1180
  16. रा’रायसिंह – 1180-1184
  17. रा’महिपाल – 1184-1201 
  18. रा’जयमल – 1201-1230
  19. रा’जयसिंह – 1230-1253
  20. रा’खेंगार तृतीय – 1253-1260
  21. रा’मांडलिक – 1260-1306
  22. रा’नवघण चतुर्थ – 1306-1308
  23. रा’महिपाल तृतीय – 1308-1325
  24. रा’खेंगार चतुर्थ – 1325-1351
  25. रा’जयसिंह द्वीतीय – 1351-1373
  26. रा’महिपाल चतुर्थ -1373
  27. रा’मुक्तसिंहजी / रा’मोकलसिंहजी – 1373-1398
  28. रा’मांडलिक द्वीतीय – 1397-1400
  29. रा’मेलिंगदेव – 1400-1415
  30. रा’जयसिंहजी तृतीय – 1415-1440
  31. रा’महिपाल पंचम – 1440-1451
  32. रा’मांडलिक तृतीय – 1451-1473 

( चुडासमा वंश के आखरी शाशक थे। रा’मांडलिक तृतीय के पराजय के बाद उनके पुत्र भूपतसिंहजी को महम्मद बेगड़ा ने उनको जूनागढ़ के सामंत के रूप में स्थापित किया और तब से उनके वंशजो रायजादा कहलाने लगे। )

Places to Visit in Junagadh

Bhavnath Temple - भवनाथ मंदिर

Places to visit in junagadh - Bhavnath Temple

जूनागढ़ में आए हुवे गिरनार पर्वत की तलहटी में आया हुवा भगवान शंकर का यह अति प्राचीन मंदिर अपनी पौराणिक अगत्य्ता की वजह से भक्तो में एक विशेष स्थान रखता है।

भवनाथ का मतलब होता है इस जीवन मरण के भव को पार कराने वाला ईश्वर। कहा जाता है की यहाँ मंदिर में स्थित भगवान शंकर का शिवलिंग स्वयंभू स्थापित है। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब शिव और पार्वती गिरनार पहाड़ियों में यात्रा कर रहे थे तब उनका दिव्य वस्त्र यहाँ मंदिर के पास आये हुवे मृगी कुंड में गिर गया जिसकी वजह से शिवजी के उपासकों के लिए यह स्थान बहोत पवित्र हो गया।

आज भी महाशिवरात्रि के दौरान जुलुस में शामिल होने से पहले यहाँ के नागा साधु इसी मृगी कुंड में स्नान करते है। 

Darshan Timings : 06:30 Am – 7 Pm.

Entry : Free.

यहाँ पर वर्ष में दो बड़े त्यौहार मनाये जाते है।

  • महाशिवरात्रि ( फरवरी-मार्च )
  • गिरनार लिली परिक्रमा ( अक्टूबर-नवंबर ).

Ashok Shilalekh - अशोक शिलालेख

Places to visit in junagadh - Ashok Shilalekh

जूनागढ़ शहर से गिरनार पर्वत जाने के रास्तें में सम्राट अशोक द्वारा लिखवाये गए शिलालेख आये हुवे है। 

शिलालेख का मतलब होता है शिला याने एक ठोस पत्थर पर लिखा हूवा लेख। जिसे बरसों के बाद भी उसके मूल स्वरुप में देखा जा सकता है।

यह शिलालेख विशाल पत्थरों पर उकेरे गए है।

सम्राट अशोक ने करीब 14 शिलालेख लिखवाये थे। जिसमे राजकीय आदेश और नैतिक नियमों को उकेरा गया था जो सम्राट के परोपकारी व्यव्हार और नैतिक कार्यों का प्रमाण देता है। 

सम्राट अशोक के शिलालेखों पर ही शक राजा रुद्रदामा और स्कंदगुप्त ने भी अभिलेखों को लिखवाया था। 

रुद्रदामा ने 150 ईस्वी और स्कंदगुप्त ने 450 ईस्वी में यह अभिलेख लिखवाये थे। इस अभिलेख की एक मुख्य विशेषता यह है की रुद्रदामा के अभिलेख को संस्कृत भाषा का प्रथम शिलालेख माना जाता है।

अगर आप हिस्टोरिकल जगह देखने का इंटरेस्ट रखते हो तो यह जगह देखने जा सकते हो वार्ना आप इस जगह को अवॉइड कर सकते हो क्योंकि यहाँ पर एक ही बड़ी शिला है जिसमे लेख उकेरे हुवे है। जिसको देखने में 5-10 मिनट्स से ज्यादा नहीं लगता। 

Entry time : 10 Am – 5 Pm

Entry Fees : 

  • भारतीय नागरिक : 25/-
  • 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चो के लिए : Free
  • विदेशी नागरिक : 300/-
  • विडिओग्राफी : 25/-

Places to Visit in Junagadh

Uparkot Kila - उपरकोट किला

Places to visit in junagadh - Uparkot 1

उपरकोट जूनागढ़ का बहोत पुराना हिस्सा है और जूनागढ़ में देखने लायक मुख्य जगहों में से एक है।

यह किला करीब 2300 साल पुराना माना जाता है जिसकी दीवारें कहीं कहीं पर 20 मीटर जितनी ऊँची है। इस किले में की गई कई नक्कासी आज भी देखि जा सकती है।

इस किले में देखने लायक कई जगहे है जैसे की मिस्र में बनी हुई दो बड़ी तोपें नीलम और काण्डल , नवघण कुवां, अड़ी-कड़ी वाव, 200 ईस्वी पूर्व से 200 ईस्वी में बानी हुवी बौधिस्ट गुफाएं वगैरा है।

Entry Fees : Free

Timings : 7 Am – 7 Pm

Adi-Kadi Vaav - अड़ी-कड़ी वाव

Adi kadi vav junagadh

अड़ी-कड़ी वाव का निर्माण चुडासमा राजवंश के शाशकों ने करवाया था। यह एक स्टेप वेल कुवां यानि की कुवें की तलहटी तक सीढ़ियों से जाया जा सके वैसा है। 

यह किले की दीवारों के अंदर बसे शहर के लोगों को पानी की पूर्ति का मुख्य स्त्रोत हुवा करता था।

यह 9 परतों वाला एक गहरा कुवां है।

इस विशाल कुवें की तलहटी तक पहुँचने के लिए करीब 162 सीढ़ियों का निर्माण किया गया था। यह वाव करीब 41 मीटर गहरी, 81 मीटर लंबी और 4।75 मीटर चौड़ी है जिसे एक ही चट्टान को काट के बनाया गया था।

Entry Fees : Free

Timings : 7 Am – 7 Pm

मैंने अड़ी-कड़ी वाव के बारे में विस्तार से दूसरा एक आर्टिकल लिखा है जिसकी लिंक में निचे दे रहा हूँ।

इसके रसप्रद इतिहास के बारे में आप जरूर से पढ़ें..

रसप्रद जानकारी  : अड़ी-कड़ी वाव 

Navghan Kuvo - नवघण कुवो

Places to visit in junagadh - Navghan kuvo

नवघण कुवां भी उपरकोट किले में आया हुवा एक स्टेपवेल संरचना वाला पानी संग्रह करने के लिए बनाया गया था।

इस कुवें की चारों और बनी सीढ़ियों का निर्माण करीब 1026 ईस्वी में यहाँ के राजा नवघण द्वारा बनाया गया था जिसे पूरा उसके उत्तराधिकारी खेंगार ने करवाया था।

यह कुवां पूरी एक चट्टान को तराश के बनाया गया है और बाकि कुवों की तरह ही काफी गहरा भी है।

मैंने इसे स्टेपवेल जैसा इस लिए कहा क्यूंकि बाकि कुवों से अलग इस कुवें में सीढ़ियों के द्वारा इस कुवें की तलहटी तक चलके जाया जा सकता है।

यह सीढियाँ करीब 52 मीटर यानि करीब 170 फ़ीट तक निचे जाती है। जो कुवें के चारों और सर्पिल आकार में निचे की और जाती है जो बाकि कुवों से असामान्य है।

यह कुवां राज्य संरक्षित स्मारक (S-GJ-116) है। 

अड़ी-कड़ी वाव और नवघण कुवां युद्ध के दौरान उपरकोट किले के सब लोगों को पुरे दो साल तक पानी पूरा करने की क्षमता रखते थे।

Entry Fees : Free

Timings : 7 Am – 7 Pm

नवघण कुवें के बारे में भी एक आर्टिकल मैंने विस्तार से लिखा है जिसे आप निचे दी गयी लिंक पर जाके विस्तार से पढ़ सकते है।

ज्यादा जानें : नवघण कुवो 

Places to Visit in Junagadh

Buddhist Cave - बौद्ध गुफा

Places to visit in junagadh - Budhist Cave

बौद्ध गुफा चट्टानों को काट कर बनायी गई है। 

स्थापत्य कला की शैली के आधार पर इस गुफाओं का निर्माण दूसरी शताब्दी ईस्वी के समय का माना जाता है।

इस गुफा में सुसज्जित खंभे, गुफा का अलंकृत प्रवेशद्वार, पानी के संग्रह के लिए बनाए गए जल कुंड, चैत्य हॉल, वैरागियों का प्रार्थना कक्ष, चैत्य खिडकियां स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण पेश करती हैं। 

गुफा के अंदर एक अलग प्रकार की शांति का अनुभव होता है। यह जगह जरूर से देखने लायक है। तीन मंजिला बनी यह जगह बहोत ही सुंदर है। मस्ट विजिट प्लेस है।

Timings – Approx 10 Am – 5 Pm

Entry Fees : 

  • भारतीय नागरिक : 25/-
  • 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चो के लिए : Free
  • विदेशी नागरिक : 300/-
  • विडिओग्राफी : 25/-

Baba Pyara ki Gufa - बाबा प्यारा की गुफा

बाबा प्यारा गुफाएं प्राचीन मानव निर्मित गुफाओं का एक सुंदर उदाहरण है। यह गुफाएं जूनागढ़ की बौद्ध गुफाओं के समूह का एक हिस्सा है। 

इस गुफाओं में बौद्ध और जैन धर्म दोनों की कलाकृतियां बनी हुवी है।

इन गुफाओं का दौरा जेम्स बर्गस ने किया था जो एक अंग्रेजी पुरातत्वविद और भारतीय पुरातनपंथी के स्थापक थे।

उन्होंने दौरा करने के बाद अपने अनुभव से ऐसा निष्कर्ष निकाला था की यह गुफाएं बौद्ध और जैन धर्म दोनों से संबंध रखती है।

उनके अनुसार इन गुफाओं को सबसे पहले बौद्ध भिक्षुकों के लिए बनाया गया था और बाद में जैन साधुओं ने भी यहाँ शरण ली हुई थी।

इन गुफाओं की सही उम्र का कोई लिखित विवरण नहीं मिला है। लेकिन वास्तुकला के आधार पर इनका निर्माण 1-2 वीं शताब्दी ईस्वी में किया गया हो ऐसा प्रतीत होता है।

इन गुफाओं में खंडित शिलालेख पाए गए है।

आप यहाँ पर घूमने जा सकते है। अच्छी जगह है।

Entry : Free

Timings : Approx 10 Am – 5 Pm.

Narsinh maheta ka chora - नरसिंह महेता का चोरा

उपरकोट किले से करीब 3 किमी की दूरी पर आया हुवा यह स्थान भगवान कृष्ण के परम भक्त नरसिंह महेता नो चोरो के नाम से जाना जाता है।

यहाँ पर 15 वीं शताब्दी में महान संत कवी नरसिंह महेता के प्रवचनों और सभाओं का आयोजन होता था। 

यहाँ पर नरसिंह महेता की और श्री दामोदर राय जी की प्रतिमाएं बनी हुई है। पास में गोपनाथ का एक छोटासा मंदिर भी आया हुवा है।

हाल में यह जगह को गुजरात टूरिज्म द्वारा रेनोवेट किया जा रहा है। 

रेनोवेट होने तक आप इस जगह को देखना अवॉयड कर सकते हो।

Entry : Free

Timings : सूर्योदय से सूर्यास्त

Damodar Kund - दामोदर कुंड

Places to visit in Junagadh - Damodar kund

Image Credit : Wikimedia

यह स्थान उपरकोट किले से गिरनार तलहटी भवनाथ मंदिर की और जाते रस्ते में आता है। यह एक बड़ा पानी का कुंड है जिसमे नहाने का एक पवित्र महिमा हिन्दू धर्म में है। पानी के कुंड को चारों और से सीढ़ियों से घेरा गया है इस लिए इसे घाट भी कहा जाता है। 

भक्त सीढियाँ उतरकर पानी तक पहुँच सकते है। 

यहाँ की लोकवायकाओं के अनुसार इस घाट पर भगवान श्री कृष्ण ने अपने भक्त संत नरसिंह महेता को फूलों का हार पहनाया था।

Entry : Free

Timings : सूर्योदय से सूर्यास्त

Places to Visit in Junagadh

Gayatri Shaktipeeth - गायत्री शक्तिपीठ

Places to visit in junagadh - Gayatri Shaktipeeth

गायत्री माता – पुराणों में गायत्री माता के बारेमें यह कथा बताई गयी है।

जब इस सृस्टि का निर्माण हो रहा था तब भगवा विष्णु की नाभि में से एक कमल की उत्पति हुई जिसमे ब्रह्माजी उत्पन्न हुवे। उसके बाद ब्रह्माजी ने तप करते समय 24 शब्दों को एक मंत्र के रूप में जाप किया जिसे गायत्री मंत्र कहा गया। और जप करते समय जिस देवी के दर्शन उनको हुवे उस देवी को गायत्री शक्ति के नाम से पहचाना गया।

उसके बाद ब्रह्माजी के मुख से जो शब्द निकले उसे वेदवाणी कहा गया जिससे चार वेदों की रचना हुई।

गायत्री शक्तिपीठ जूनागढ़

जूनागढ़ में आया हुवा गायत्री माता का मंदिर भक्तों में अपना एक विशिष्ट महत्व रखता है।

वन विभाग द्वारा सन 1979 में गायत्री शक्तिपीठ बनाने के लिए जमीन का संपादन गायत्री परिवार को दिया गया।

सन 1981 में श्री राम शर्मा आचार्यजी  के हाथों इस मंदिर में गायत्री माता के प्राण प्रतिष्ठा महत्व का आयोजन किया गया।

उनके बाद 1983 में गायत्री माता की पादुका का स्थापन किया गया।

यहाँ पर वेदमाता गायत्री के साथ साथ  माता सावित्री,माता दुर्गा,माता सरस्वती,माता लक्ष्मीजी का स्थापन किया गया।

इस मंदिर में नियमित रूप से ध्यान और योग शिबिरों का आयोजन भी किया जाता है।

इसके आलावा यहाँ पर आयुर्वेदिक एवं होमियोपैथिक चिकित्सा के कैंपो का भी आयोजन किया जाता है। 

यहाँ पर पिछले कई सालों से नेत्रयग्न और दंतयग्न का आयोजन किया जाता है जिसमे हर महीने कई रोगियों की निशुल्क सारवार की जाती है।

Open Timings : 6 Am – 9 Pm

Entry Fees : Free

Datar Hill - दातार डूंगर

जूनागढ़ जंक्शन से करीब 8 किमी की दूरी पर गिरनार हिल के पास में ही यह दातार हिल भी आयी हुई है। 2,779 फीट की ऊंचाई पर आई हुई दातार हिल गिरनार पर्वत के पांच बड़ी चोटियों में से एक है।

यह गुजरात में तीर्थयात्रा के लोकप्रिय स्थानों में से एक है। इसे गुरु दत्तात्रय या दत्तात्री के रूप में भी जाना जाता है।

Entry : Free

Timings : 24 Hrs.

Girnar Hill - गिरनार डूंगर

Places to visit in junagadh - Girnar hill

गिरनार पर्वत हिमालय से भी पुराना होने का अनुमान है। क्यों की यहाँ से जुडी कई कहानिया और पौराणिक रीतियाँ बरसों पुरानी है।

इस पर्वत पर कई तपस्वियों ने आध्यात्मिक साधना की हुई है इस लिए यह जगह आध्यात्मिक तपस्वियों और अघोरी साधुओं का घर मन जाता है।

करीब 3600 फ़ीट ( 1069 मीटर ) ऊँची गिरनार हिल गुजरात की एक प्राचीन पहाड़ी है।

यह सदियों पुरानी पहाड़ी पर कई प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर बने हुवे है। गिरनार हिल पर सबसे ऊँची चोटी पर भगवान दत्तात्रेय के चरण चिह्न है जहाँ पर उन्होंने खड़े रहकर भगवान की तपस्या की थी।

इस सबसे ऊँची पहाड़ी तक पहुँचने के लिए आप को करीब 10000 जितनी सीढियाँ चढ़नी पड़ेगी।

गिरनार हिल की चढ़ाई इसी पर्वत की तलहटी में स्थापित भगवान शंकर के मंदिर भवनाथ से सुरु होती है। 

गिरनार हिल की सुबह की सैर पर्यटकों को जीवन भर याद रहने वाला अनुभव दे जाती है।

Entry : Free

Timings : 24 Hrs.

विस्तार से पढ़ें : गिरनार हिल

Places to Visit in Junagadh

Swaminarayan Temple - स्वामीनारायण मंदिर

जूनागढ़ शहर की मध्य में स्वामीनारायण संप्रदाय का एक भव्य मंदिर आया हुवा है जिसका निर्माण स्वयं स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक भगवान स्वामीनारायण ने करवाया था।

इस धर्मस्थल के लिए भूमि उस समय के राजा हेमंतसिंह द्वारा उपहार में दी गयी थी जिसकी नोंध यहाँ पर बनी हुवी है।

मंदिर की आधारशिला 10 मई 1826 को गोपालानंद स्वामी और अन्य वरिष्ठ परमहंसों की मौजूदगी में गुणातीतानंद स्वामी के हाथों से रखी गई थी। जिसके निर्माण की देखरेख ब्रह्मानंद स्वामी ने की थी।

1 मई 1828 को स्वामीनारायण भगवान ने स्वयं श्री रणछोड़राय और त्रिकमराय की मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया था।

Open Timings : 05:30 Am – 09:00 Pm

Entry Fees : Free

Sakkarbagh Zoo - सक्करबाग़ प्राणीसंग्रहलय

जूनागढ़ में आया प्राणी संग्रहालय सक्करबाग़ प्राणी उद्यान या सक्करबाग़ चिड़ियाघर के नाम से जाना जाता है।

यह प्राणी संग्रहालय करीब 84 हेक्टर ( 210 एकड़ ) मैं फैला हुवा है। 

सक्करबाग़ प्राणी उद्यान की स्थापना सन 1863 में जूनागढ़ राज्य के मोहब्बत खानजी द्वितीय द्वारा की गयी थी।

यह भारत का दूसरा सबसे पुराना और चौथा सबसे बड़ा प्राणीसंग्रहलय है।

यहाँ पर 2018 की गिनती के मुताबिक 1436 प्राणी दर्ज किये गए है।

Timings : 8 Am – 5 Pm ( Wednesday Closed )

Entry Fees :

  • 20/- Per person for adult (12 years & above)
  • 10/- Per person for children (above 3 & below 12 years)
  • 20/- Per camera for Still camera
  • 100/- Per camera for Video camera

Darbar Museum - दरबार म्यूजियम

Places to visit in junagadh - Darbar Hall

Image Credit : Wikimedia (Daniel Villafruela)

दरबार हॉल जूनागढ़ के पूर्व नवाबों के लिए दरबार था जिसे बाद में संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया।

इस संग्रहालय में महाराजाओं की संपत्ति को संरक्षित करके रखा गया है।

दरबार हॉल में लगभग 2900 कलाकृतियां,पिक्चर गैलरी,कपडे और पोषाक की गैलरी,हथियारों की गैलरी,पालकी कक्ष वगैरा देखने लायक है।

पिक्चर गैलरी में यहाँ के नवाबों की तस्वीरों का एक बड़ा संग्रह है। हथियार, कवच, पालकी, चमचमाते झाड़, हावड़ा, हीरे से बुने हुए कालीन, फोटो, गाउन, चांदी की वस्तुएं, आभूषण और पेंटिंग जैसे कलाकृतियां जो नवाबों की जीवन शैली को दर्शाती हैं, संग्रहालय की प्रमुख विशेषताएं हैं। 

उत्कृस्ट कलाकृतियों के कारण इस संग्रहालय को जूनागढ़ घूमने आने वाले लोग जरूर से देखने आते है।

Timings : 10 Am -1:15 Pm &  2:45 Pm – 6 Pm

( Closed : 2nd & 4th Saturday, all Wednesdays and Government holidays )

Entry Fees :
  • 5 Per visitor
  • 50 Per foreign visitor
  • 1 For per student of Schools/Colleges
  • 100 For photography.
  • 500 For video camera.

Mahabat Maqbara - महाबत मकबरा

Places to visit in junagadh - Mahabat maqbara

Image Credit : Wikimedia ( Raveesh vyas )

महाबत मकबरा वजीर बहादुदीनभाई हसनभाई की समाधी है जो जूनागढ़ के नवाब महाबत खान द्वितीय के दरबार में प्रमुख रईसों में से एक थे। 

इस मकबरे का निर्माण 1878 में महाबत खानजी द्वारा शुरू किया गया था जिसे 1892 में उनके उत्तराधिकारी बहादुर खानजी द्वारा पूरा किया गया था।

यह मकबरा मीनार और गुंबज की बनावट इस्लामिक है जबकि मूर्तिकला और स्तंभ की शैली गोथिक है।

इस मकबरे की सबसे ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह है की इस मकबरे में मीनार के बहार से सीढियाँ है जब की बाकि मकबरों जैसे की कुतुबमीनार में अंदर से सीढियाँ होती है।

इस ईमारत की बाकि देखने लायक चीजों में उम्दा मेहराबों, चमकते चांदी के दरवाजों, फ्रांसीसी शैली के स्तंभों और खिड़कियां है।

यह जगह जूनागढ़ की सबसे अच्छी देखने लायक जगहों में से एक है।

Timings : सूर्योदय से सूर्यास्त 

Entry Fees : Free

Places to Visit in Junagadh

Gir National Park - गिर नेशनल पार्क

Gir National Park Information

Image Credit : Wikimedia

गिर नेशनल पार्क को सासण गिर के नाम से भी जाना जाता है।

गिर राष्ट्रीय उद्यान भारत के पश्चिम में आए हुवे राज्य गुजरात के जूनागढ़ जिले से 72 किमी दूर स्थित है। यह जगह एक शेर संरक्षित क्षेत्र है। जिसे वन्यजीव अभ्यारण्य घोसित किया गया है।

एक समय पूरी पृथ्वी पर एशियाई शेर विलुप्त होने की कगार पर थे तब बचे हुवे कुछ शेरो को जूनागढ़ के उस समय के नवाब और राज्य सरकार द्वारा संरिक्षित किया गया और यह अभ्यराण्य को सन 1965 में बनाया गया।

अगर आप एशियाई शेरों के एक मात्र निवास गिर नेशनल पार्क के बारे में विस्तार से जानना चाहते हो तो इस जगह के बारे में विस्तार से लिखे हुवे मेरे आर्टिकल को आप पढ़ सकते है जिसमे इस जगह के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।

ज्यादा पढ़ें : गिर नेशनल पार्क 

Somnath Jyotirling - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

Places to visit near somnath

Image Credit : Wikimedia

सोमनाथ मंदिर भारत के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र के वेरावल के प्रभास पाटन में स्थित है।

भगवान शिव के कुल 12 ज्योतिर्लिंग है जिसमे से गुजरात में कुल 2 ज्योतिर्लिंग स्थित है।

पहला ज्योतिर्लिंग यहाँ सोमनाथ में स्थापित है और दूसरा जो द्वारका के पास आया हुवा नागेश्वर ज्योतिर्लिं 10 वे नंबर का है।

पुराणों  के अनुसार सोमनाथ भगवान शंकर का पहला ज्योतिर्लिंग है जिसे चंद्र देव ने खुद अपने हाथों से बनाया था ऐसा माना जाता है। 

यहाँ सोमनाथ मै सोमनाथ मंदिर के आलावा भी बहोत सारी पौराणिक जगह है जिसे आप देख सकते है और उस जगह का आनंद उठा सकते है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में मैंने दो आर्टिकल विस्तार से लिखे हुवे है। इस ज्योतिर्लिंग के बारे में पूरी माहिती आप उन दोनों आर्टिकल से प् सकते है। जिसकी लिंक में निचे दे रहा हूँ।

ज्यादा पढ़ें : 

Places to Visit in Junagadh

Best Time to Visit Junagadh - जूनागढ़ में घूमने आने के लिए सबसे अच्छा समय कोनसा है ?

जूनागढ़ का जंगल शुष्क प्रकार का है। इस लिए यहाँ पर गर्मियों में घूमने आना सुझाव पूर्ण नहीं।

यहाँ पर घूमने आने के लिए सबसे अच्छा समय बारिश और शर्दियों का है। मतलब की अक्टूबर से लेकर मार्च तक आप घूमने आने का प्लान बना सकते है।

How to Reach Junagadh - जूनागढ़ कैसे पहुंचे?

By Road :

जूनागढ़ रोड द्वारा गुजरात के दूसरे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। जिनमे से कुछ प्रमुख शहरों से दूरी इस प्रकार है

  • अहमदाबाद – करीब 330 किमी
  • राजकोट – करीब 100  किमी
  • पोरबंदर – करीब 115 किमी

By Air :

जूनागढ़ का खुद का कोई हवाई अड्डा नहीं है। यहाँ से नजदीकी हवाईअड्डा राजकोट है जो यहाँ से करीब 102 किमी की दूरी पर आया हुवा है। जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुवा है।

जहाँ से आप को राज्य सरकार परिवहन की बसें, प्राइवेट वॉल्वो बसें, रेल्वे, टेक्सी या कैब की मदद से आसानी से जूनागढ़ पहुँच सकते है। 

By Rail :

जूनागढ़ का खुद का रेल्वे स्टेशन है जो राज्य एवं देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुवा है। जूनागढ़ भारतीय रेल्वे के पश्चिमी रेल्वे नेटवर्क पर स्थित है। 

कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें हैं जो रोज़ाना संचालित होती हैं और राजकोट से जूनागढ़ की यात्रा के लिए एकदम सही हैं।

जूनागढ़ रेल्वे स्टेशन से आप लोकल व्हीकल द्वारा यहाँ तक आसानी से पहुँच सकते हो।

Where to Stay in Junagadh - जूनागढ़ में कहाँ पर रुकें ?

जूनागढ़ में रहने के दो विकल्प है।

1. आश्रम या धर्मशाला

2. प्राइवेट होटल्स

1. आश्रम या धर्मशाला :

जूनागढ़ में कई जैन देरासर,हिंदू मंदिर,मुस्लिम मकबरा,बौद्ध गुफाएं आए हुवे है जिनकी वजह से जूनागढ़ सभी धर्म के लोगों के लिए एक पवित्र यात्रा धाम है।

इस लिए यहाँ पर बहोत सारे आश्रम और धर्मशालाएं आयी हुवी है जहाँ पर आप को आसानी से सस्ते दामों में रूम मिल जायेंगे। 

लेकिन जूनागढ़ में मुख्य मनाये जाने वाले तहेवारों में भगवान शंकर के भवनाथ का महाशिवरात्रि का मेला और देव दिवाली जो कार्तिक पूर्णिमा में होती है तब साल में सिर्फ एक बार ही होने वाली 5 दिनों की लिली परिक्रमा जो पुरे गिरनार की होती है उस समय यहाँ पर भक्तों का काफी जमावड़ा होता है।

इस लिए यह समय में अगर आप को यहाँ पर घूमने आना है तो आप को करीब २० से २५ दिन पहले ही रूम बुक करवाने होंगे वार्ना यहाँ पर रूम मिलना बहोत ही मुश्किल होगा।

2. प्राइवेट होटल्स :

अगर आप आश्रम या कोई धर्मशाला में रुकना नहीं चाहते तो यहाँ पर कई सारी प्राइवेट होटल्स भी आयी हुवी है जहाँ पर आप रूम  ऑनलाइन भी बुक कर सकते हो। होटल्स ढूंढने के लिए में कुछ लिंक दे रहा हूँ जहाँ से आप अपनी जरूरियात के मुताबिक होटल्स ढूंढ सकते हो।

Live Temperature in Junagadh - जूनागढ़ का वातावरण

किसी भी जगह घूमने जाने से पहले अगर आप वहां का वेदर जान ले तो आप उसके मुताबिक अपनी यात्रा का प्लान कर सकते हो जिससे आप उस जगह का ज्यादा से ज्यादा मजा ले सकें।

मैंने यहाँ पर लाइव वेदर जानने के लिए एक लिंक शेयर की है जहाँ से आप जूनागढ़ का लाइव तापमान जान सकोगे।

Check hear : Junagadh Weather

Conclusion - निष्कर्ष

Places to visit in Junagadh – जूनागढ़ आध्यात्मिक रूप से बहोत ही महत्त्व रखता है। साथ में दूसरी कई और अच्छी घूमने लायक जगह जूनागढ़ में आयी हुई है। एक रात्रि आप यहाँ पर रुकें और शांति से यहाँ की सारी जगहों का आनंद उठाये।

मैंने यह आर्टिकल मेरे खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव के आधार पर लिखा हुवा है जिसका मूल उदेश्य यहाँ पर घूमने आने का प्लानिंग करने वाले पर्यटकों को एक सरल माहिती प्रदान करना है जिससे उनकी यात्रा में कम से कम तकलीफ में इस जगह का ज्यादा से ज्यादा आनंद उठा सकें।

अगर आप को मेरा यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो आप इसे लाइक और सब्सक्राइब करिये जिससे मेरे आने वाले दूसरे आर्टिकल का नोटिफिकेशन आप को मिल जाये। और मुझे ज्यादा से ज्यादा अच्छी जगहों के बारे में लिखने की प्रेरणा मिले। अगर आप को लगता हो की यह आर्टिकल हेल्पफुल है तो अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कर दीजिये।

आपने इस आर्टिकल को अपना अमूल्य समय दिया उसके लिए आप का तहेदिल से धन्यवाद। 


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Junagadh Girnar Full Information in Hindi/History/Timings etc.- travellgroup · March 12, 2020 at 6:49 pm

[…] Read More : Places to visit in Junagadh […]

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