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Ram Mandir Ayodhya in Hindi – भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण अयोध्या में होने वाला है, जिसके बारे में शुरू से लेकर अंत तक की जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेंगी।

आप इस आर्टिकल में रामजन्मभूमि,उसका इतिहास,मंदिर के आर्किटेक्ट और मंदिर की बनावट के बारे में विस्तार से माहिती जान सकोगे।

तो आइये फ्रेंड्स शुरू करते है।

राम जन्मभूमि कहाँ पर है और प्रभु श्री राम का मंदिर कहाँ पर बनने वाला है ?

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Image Credit : Wikipedia (Allahabad High Court of India)

पुराणों के में जिस तरह का उल्लेख मिलता है उसके मुताबिक राम जन्मभूमि भारत के उत्तरप्रदेश राज्य के अयोध्या में आयी हुई है।

राम जन्मस्थली पर एक विशाल मंदिर हुवा करता था जिसे मुग़लों के शाशनकाल में गिराकर उसी स्थान पर एक मस्जिद बनवाई गई थी।

जिसे हम बाबरी मस्जिद से जानते है।

लेकिन 1992 में यह विवादित ढ़ांचा गिरा दिया गया और वहाँ श्री राम का एक अस्थायी मन्दिर का निर्माण करदिया गया।

उसके बाद कई सालों तक कोर्ट में इस स्थान की मालिकी के बारे में केस चलता रहा।

2019 में सुप्रीमकोर्ट द्वारा सारें तथ्यों की जाँच करने के बाद आखरी चुकादा दिया गया।

जिसके मुताबिक राम जन्मभूमि पर ही भगवान श्री राम का मंदिर बनाया जाये।

इस पूरी घटना को आगे आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे।

सबसे पहले हम राम मंदिर के बारे में जान लेते है।

Ram Mandir Ayodhya - राम मंदिर अयोध्या

Ram Mandir Ayodhya in Hindi

Image Credit : Wikimedia, Rudra Pratap Sinha (Jim Carter)

राम मंदिर का शिलान्यास कब होगा ?

अयोध्या में 18 जुलाई 2020 को राम मंदिर ट्रस्ट के सभ्यों की मीटिंग हुई जिसमे मंदिर में भूमि पूजन की तारीख तय की गयी।

ट्रस्ट की और से दो तारीखों 3 अगस्त या 5 अगस्त का सुझाव दिया गया था।

जिसमें से 5 अगस्त की तारीख को पीएमओ की मंजूरी मिली।

5 अगस्त 2020 को दोपहर के 12:15 बजे मंदिर का भूमि पूजन किया जाने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भूमि पूजन के दौरान मौजूद रहेंगे।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास 40 किलो चांदी की शिला को श्रीराम को समर्पित करेंगे।

मंदिर का भूमि पूजन निश्चित 20 फुट की जगह में गड्ढा करके किया जायेगा।

भूमि पूजन के दौरान इस शिला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैदिक मंत्रोंच्चारण के बीच रामलला की पवित्र भूमि पर स्थापित करेंगे।

मंदिर शिलान्यास के लिए नागपुर के पास आए हुए रामटेक में बने राम मंदिर की मिट्टी और 5 नदी के संगम स्थानों का पानी पूजन के लिए उपयोग में लिया जाने वाला है।

कोरोना महामारी की वजह से सोसियल डिस्टन्सिंग के साथ सिर्फ 200 प्रमुख महेमानों की उपस्थिति में मंदिर का शिलान्यस होने वाला है।

राम मंदिर की डिजाइन किसने तैयार की है ?

Image Credir : Dainik Bhaskar

राम मंदिर के वीएचपी मॉडल को वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया था। नए मॉडल पर भी वही काम कर रहे हैं।

प्रख्यात सोमनाथ मंदिर और अक्षरधाम मंदिरों की भी डिजाइन उन्होंने ही की थी।

इसके अलावा उनके बेटे निखिल और आशीष सोमपुरा भी इस पर काम करेंगे।

18 जुलाई की ट्रस्ट की मीटिंग में दोनों को भी बुलाया गया था।

निखिल और आशीष इंजीनियर हैं और दोनों ही मंदिर के नक्शे में किए गए बदलाव पर काम करेंगे।

राम मंदिर के आर्किटेक्ट (वास्तुकार) निखिल चंद्रकांत सोमपुरा के अनुसार भूमि पूजन के दिनसे ही मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जायेगा।

सम्पूर्ण मंदिर निर्माण कार्य 2022 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।

मंदिर की नयी डिजाइन में क्या बदलाव होंगे ?

पहले मंदिर 3 शिखरों वाला था अब मंदिर में 5 शिखर होंगे।

मंदिर के शिखर की ऊंचाई बढ़ने की वजह से मंदिर के गुंबजों की संख्या भी 3 से 5 करनी जरुरी थी।

पहले मंदिर का निर्माण का एरिया  47000 स्क्वेर फ़ीट  था अब  57000 स्क्वेर फ़ीट होगा।

पहले मंदिर की ऊंचाई 128 फिट थी अब 161 फिट होगा।

पहले मंदिर का एरिया 67 एकर था वह अभ बढ़कर करीब 100 से 120 एकर होगा।

मंदिर परिसर के चारो ओर सीता जी, लक्ष्मण, भरत जी और गणेश जी के 4 मंदिर बनाने की राय आयी हुई है।

मंदिर का निर्माण कार्य किस तरह से होगा ?

अयोध्या में 100 से 120 एकर भूमि में 5 गुंबज वाले मंदिर का निर्माण किया जायेगा। पुरे विश्व में इस प्रकार का मंदिर दूसरा नहीं होगा।

पुरे मंदिर के निर्माण में करीब 3 लाख 75 हजार घनफुट पत्थरों का उपयोग किया जायेगा।

जिनमें से 70 हजार घन फुट पत्थर पहले से ही तैयार कर लिए गए है। बाकि के 3 लाख घन फुट पत्थर बंसीपुरा से मंगाए गए है।

गुजरात के सोमपुरा समाज के कारीगरों का योगदान इनमे मुख्य रहेगा।

मंदिर में एक साथ 10000 लोग भगवान के दर्शन कर सकें ऐसी व्यस्था की जाने वाली है।

लेकिन राम मंदिर के गर्भ गृह में किसी भी दर्सनार्थी को प्रवेश नहीं दिया जायेगा।

Ram Mandir Ayodhya in Hindi

Ram Mandir Architecture - राम मंदिर की बनावट कैसी होंगी ?

Ram Mandir Ayodhya in hindi

Image Credit : Wikimedia (Oasis.54515)

राम मंदीर की पूरानी डिजाइन सन 1985 – 86 में बनाई गयी थी लेकिन आज के समय श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुवे मंदिर की डिजाइन में बदलाव किये गए है।

नयी डिजाइन के मुताबिक तीन नए नृत्य मंडप बनाये जायेगे।

जिसमे से 2 मंडप गर्भगृह की आगे की तरफ और 1 पास में बनाया जायेगा।

यह मंदिर कौन सी शैली में बनेगा ?

नागर वास्तुकला से बनने वाला यह मंदिर अति भव्य बननेवाला है।

हिंदू मंदिरों की वास्तुकला की शैली में कई प्रकार है लेकिन सभी प्रकारों में मुख्य रूप से आंतरिक भाग, बाहरी भाग और कंपाउंड एरिया होता है।

आंतरिक भाग :

आंतरिक भाग में गर्भगृह होता है जिसमें मंदिर के पीठासीन देवी और देवता की मूर्ति या छवि स्थापित होती है।

इस गर्भ गृह के चारों और अन्य संरचनाए और भवन होते है।

बाहरी भाग :

बाहरी भाग में गर्भ गृह को एक मीनार जैसे शिखर से सजाया जाता है।

मंदिर की इमारत में अक्सर परिक्रमा के लिए परिधि मार्ग, मंडप हॉल, और कभी-कभी गर्भगृह और मंडप के बीच एक सुरम्य हॉल और पोर्च शामिल होता है।

कंपाउंड एरिया :

और कंपाउंड में अन्य छोटे मंदिरों के साथ, बड़े मंदिरों में, आगे या अलग-अलग मंडप या अन्य इमारतें भी बनाई हो सकती हैं।

यह मंदिर नागर वास्तुकला की शैली में बनाया जाने वाला है।

नागर वास्तुकला :

Image Credit : ( Nagar Vastukala of a Temple) Wikipedia

नागर मंदिर वास्तुकला की शैली है जो उत्तरी भारत में लोकप्रिय हुई।

यहां एक पत्थर के मंच पर एक संपूर्ण मंदिर का निर्माण किया जाता है, जहां तक जाने के लिए सीढ़ियां बनायीं जाती है।

दक्षिण भारत के विपरीत, इसमें आमतौर पर विस्तृत दीवारें या प्रवेश द्वार नहीं हैं।

शुरुआती मंदिरों में केवल एक शिखर (टॉवर) था, लेकिन बाद के समय में कई शिखर आए।

गर्भगृह हमेशा सबसे ऊंची मीनार के नीचे स्थित होता है।

मंदिर की बनावट कैसी होगी ?

राम मंदिर की बनावट कुछ इस प्रकार होने वाली है।

  • मंदिर 3 मंजिला होगा। 
  • मंदिर में खंभे (स्तंभ) कुल 318
  • प्रत्येक मंजिल पर 106 खंभे होंगे
  • प्रत्येक स्तंभ की ऊंचाई 14 फुट 6 इंच होगी। 
  • और प्रत्येक स्तंभ में 16 मूर्तियां को उकेरा जायेगा।
  • 3 लाख 75 हजार घनफुट पत्थर उपयोग में लिए जायेंगे
  • जमीं से ऊंचाई करीब 17 फुट 
  • कुल ऊंचाई 161 फुट होगी।
  • चौड़ाई 235 फुट
  • लंबाई 360 फुट
  • मंदिर की ऊपर धजा की ऊंचाई 35 फुट
  • मंदिर में पक्षियों को दाना खिलाने के लिए 2 चबूतरें बनाये जायेंगे 
  • पहला चबूतरा 8 फुट ऊँचा और 10 फुट चौड़ा होगा। 
  • यह चबूतरा मंदिर परिक्रमा मार्ग पर होगा। 
  • दूसरा चबूतरा 4 फुट 9 इंच रहेगा।

मंदिर निर्माण की लागत करीब 100 करोड़ होने का अंदाजा है।

मंदिर परिसर में कौन सी सुविधाएं होगी ?

मंदिर परिसर में.. 

  • एक प्रार्थना कक्ष,
  • एक रामकथा कुंज (व्याख्यान कक्ष),
  • एक वैदिक पाठशाला (शैक्षिक सुविधा),
  • एक संत निवास (मंदिर के संतों और महंतो के निवास),
  • एक यति निवास (आगंतुकों के लिए छात्रावास),
  • एक संग्रहालय और 
  • कई अन्य सुविधाएं जैसे की कैफेटेरिया वगैरा भी होंगे।

Ram Janmbhumi History - राम जन्मभूमि इतिहास

राम जन्म भूमि जिसका शाब्दिक अर्थ होता है राम का जन्म स्थान।

हिंदू पौराणिक ग्रंथो रामायण और रामचरित मानसमें श्री राम के जन्म का स्थान अयोध्या नाम के शहर जो सरयू नदी के तट पर बसा हुवा था उसे कहा गया है।

आज तक उसी राम जन्मभूमि के लिए बरसों से कोर्ट में केस चल रहा था।

हिंदू धर्म के अनुयायियों द्वारा सुप्रीमकोर्ट में बरसों पहले एक केस दाखिल किया गया था जिसमें यह याचिका की गयी थी की बाबरी मस्जिद जिस स्थान पर खड़ी थी,जिसको बाद में गिरा दिया गया था वहीँ पर भगवान का राम जन्म स्थान था।

ऐसा माना जाता है की मुगलों ने अपने शासनकाल के दौरान भगवान राम के मंदिर को नस्ट करके उसी स्थान में बाबरी मस्जिद का निर्माण कर दिया था।

माना जाता है की बाबरी मस्जिद का निर्माण 1528 – 1529 के दौरान मीर बाकी द्वारा किया गया था जो मुग़ल बादशाह बाबर (जिनका शाशन काल 1526 – 1530 था) के सेनापति थे।

1992 में, हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया जिसने हिंदू-मुस्लिम हिंसा को जन्म दिया।

आज तक अयोध्या का वह विवादित ढांचा भारत के कुछ प्रमुख मुद्दों में से एक रहा।

सुप्रीमकोर्ट की पांच जजों की पैनल ने अगस्त से लेकर अक्टूबर 2019 तक टाइटल के विवाद के मामले की सुनवाई की।

जिसके आखरी चुकादे में 9 नवंबर 2019 को यह पक्के तौर पर निर्णय सुनाया गया की बाबरी मस्जिद के वह विवादित ढांचे के स्थान पर हिंदू मंदिर ही था जिसे गिराकर बाबरी मस्जिद बनायीं गयी थी।

और अब ये स्थान हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए वापिस हिंदू ट्रस्ट को सौप दिया जाये।

हालांकी सुप्रीमकोर्ट ने मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया।

उसके बाद 5 फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के नाम से जाना जाने वाला ट्रस्ट भारत सरकार द्वारा बनाया गया।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र, भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए स्थापित एक ट्रस्ट है।

ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी हैं।

Ram Mandir Ayodhya in Hindi

राम मंदिर का इतिहास तारीखों में..

सन् 1528 : रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को तोड़कर मुग़ल सम्राट बाबर ने मस्जिद का निर्माण करवा दिया था।

सन् 1853 :  हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच इस जमीन को लेकर पहली बार विवाद हुआ था।

सन् 1859 : अंग्रेजों ने विवाद को ध्यान में रखते हुए नमाज के लिए मुसलमानों को अंदर का हिस्सा और पूजा विधि के लिए हिंदुओं को बाहर का हिस्सा उपयोग में लाने को कहा गया।

सन् 1949 : अंदर के हिस्से में हिंदुओं द्वारा भगवान श्री राम की मूर्ति रखी गई।

हिंदू-मुस्लिम तनाव को बढ़ता देख उस समय की सरकार ने इसके गेट में ताला लगा दिया।

सन् 1986 : जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल को हिंदुओं की पूजा के लिए खोलने का आदेश दिया।

मुस्लिम समुदाय ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित की।

सन् 1989 : विश्व हिन्दू परिषद ने विवादित स्थल से सटी जमीन पर राम मंदिर की मुहिम शुरू की।

6 दिसम्बर 1992 : अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई।

परिणामस्वरूप पुरे देश में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क गए जिसमें करीब दो हजार लोगों की जानें चली गईं।

16 दिसम्बर 1992 : बाबरी ध्वंश के दस दिन बाद लिब्रहान आयोग गठित किया गया। 

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश एम.एस. लिब्रहान को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।

16 मार्च 1993 लिब्रहान आयोग के गठन के बाद उनको तीन महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया था, लेकिन आयोग ने रिपोर्ट देने में 17 साल तक का लंबा समय लगा दिया।

सन् 1993 : केंद्र के इस अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिली। चुनौती देने वाला शख्स मोहम्मद इस्माइल फारुकी था। 

मगर कोर्ट ने इस चुनौती को ख़ारिज कर दिया कि केंद्र सिर्फ इस जमीन का संग्रहक है।

जब मलिकाना हक़ का फैसला हो जाएगा तो मालिकों को जमीन लौटा दी जाएगी। 

केंद्र की और से दायर अर्जी इसी अतिरिक्त जमीन को लेकर थी।

सन् 1996 : राम जन्मभूमि न्यास ने केंद्र सरकार से यह जमीन मांगी लेकिन मांग ठुकरा दी गयी। 

इसके बाद न्यास ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसे 1997 में कोर्ट ने भी ख़ारिज कर दिया।

सन् 2002 :  जब गैर-विवादित जमीन पर कुछ गतिविधियां हुई तो असलम भूरे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई।

सन् 2003 : इस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि विवादित और गैर-विवादित जमीन को अलग करके नहीं देखा जा सकता।

30 जून 2009 : लिब्रहान आयोग ने चार भागों में 700 पन्नों की रिपोर्ट प्रधानमंत्री डॉ॰ मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी. चिदम्बरम को सौंपा। 

जांच आयोग का कार्यकाल 48 बार बढ़ाया गया।

31 मार्च 2009 :  समाप्त हुए लिब्रहान आयोग का कार्यकाल को अंतिम बार 30 जून तक मतलब की तीन महीने के लिए बढ़ा गया।

सन् 2010 : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने निर्णय सुनाया जिसमें विवादित भूमि को रामजन्मभूमि घोषित किया गया। 

न्यायालय ने बहुमत से निर्णय दिया कि विवादित भूमि जिसे रामजन्मभूमि माना जाता रहा है, उसे हिंदू समुदाय को दे दिया जाए। 

न्यायालय ने यह भी कहा कि वहाँ से रामलला की प्रतिमा को नहीं हटाया जाएगा। 

न्यायालय ने यह भी पाया कि चूंकि सीता रसोई और राम चबूतरा आदि कुछ भागों पर निर्मोही अखाड़े का भी कब्ज़ा रहा है इसलिए यह हिस्सा निर्माही अखाड़े के पास ही रहेगा। 

दो न्यायधीधों ने यह निर्णय भी दिया कि इस भूमि के कुछ भागों पर मुसलमान प्रार्थना करते रहे हैं इसलिए विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा मुसलमान गुटों दे दिया जाए। 

लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों ने इस निर्णय को मानने से अस्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सन् 2017 : हाइकोर्ट ने 7 वर्ष बाद निर्णय लिया कि 11 अगस्त 2017 से तीन न्यायधीशों की पीठ इस विवाद की सुनवाई प्रतिदिन करेगी। 

सुनवाई से ठीक पहले शिया वक्फ बोर्ड ने न्यायालय में याचिका लगाकर विवाद में पक्षकार होने का दावा किया और 70 वर्ष बाद 30 मार्च 1946 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जिसमें मस्जिद को सुन्नी वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति घोषित अर दिया गया था।

सन् 2018 : सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि 5 फरवरी 2018 से इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी।

सन् 2019 : जिसके आखरी चुकादे में 9 नवंबर 2019 को यह पक्के तौर पर निर्णय सुनाया गया की बाबरी मस्जिद के वह विवादित ढांचे के स्थान पर हिंदू मंदिर ही था जिसे गिराकर बाबरी मस्जिद बनायीं गयी थी। 

इस लिए यह पक्के तौर पर साबित हुवा है की यह राम जन्मभूमि ही है और उसे हिंदू समुदाय को सौप दिया जाये।

सन् 2020 : तो बस इसी भूमि पर 5 अगस्त 2020 में पूर्ण विधि से शिलान्यास होने जा रहा है।

अगर आप और भी विस्तार से जानना चाहते हो तो निचे दी गयी लिंक पर जाके विस्तार से उसे पढ़ सकते हो। 

ज्यादा पढ़ें :  राम जन्मभूमि 

देश में दूसरी किन जगहों पर राम मंदिर बने हुवे है ?

पुरे भारत में बने हुवे भगवान श्री राम के मंदिर कुछ इस प्रकार है।

  1. Ram Janmabhoomi, Ayodhya – राम जन्मभूमि, अयोध्या
  2. Kothandarama Temple, Thillaivilagam, Tamilnadu -Built 9-10th century
  3. Vijayaraghava Perumal temple -built in 13th century
  4. Kodandarama Temple, Chikmagalur -Built 14-16th century
  5. Ramaswamy Temple, Kumbakonam -built in 16th century
  6. Bhadrachalam Temple, Telangana—built in 1674
  7. Kodandarama Temple, Vontimitta, Andhra Pradesh -built in 16th century
  8. Kalaram Temple, Nashik—built in 1788
  9. Raghunath Temple, Jammu—built in 1827
  10. Sri Rama Temple, Ramapuram
  11. Nalambalam, Kerala
  12. Shree Rama Temple, Triprayar, Kerala
  13. Ramateertham Temple, Andhra Pradesh
  14. Ram Mandir, Bhubaneswar, Odisha
  15. Odogaon Raghunath Temple, Odisha—dates from Middle Ages
  16. Mudikondan Kothandaramar Temple – Tamil Nadu
  17. Kothandaramaswamy Temple, Rameswaram
  18. Ramchaura Mandir, Bihar

Conclusion - निष्कर्ष

Ram Mandir Ayodhya In Hindi – भगवान राम का यह मंदिर भारत का अपनी तरह का भव्य मंदिर बनने वाला है लेकिन फिर भी यह भारत में सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर नहीं होगा।

हिमाचल के सोलन में भारत का सबसे ऊंचा मंदिर है। यह मंदिर 39 साल में बनकर तैयार हुआ था।

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1 Comment

Mrugesh J. Zaveri · July 25, 2020 at 11:43 pm

Jai Shree Ram… Thank you for sharing the information. I like and read ur posts of places with all details..

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