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Rani Ki Vav Patan – अगर आप पाटन रानी की वाव देखने जाने की सोच रहे हो तो यह आर्टिकल वहां की सारी जानकारी आपको देगा। वहां जाने से पहले जरूर से पढ़ें।

इस आर्टिकल में आप को रानी की वाव की सारी जानकारी जैसे की उसकी हिस्ट्री, नाम के पीछे की कहानी, एंट्री फीस, टाइमिंग्स, घूमने जाने के लिए अच्छा समय वगैरे की पूरी जानकारी इस आर्टिकल में मिल जाएगी। 

तो आवो फ्रेंड्स शुरू करते है।

Rani ki vav patan

Image Credit : Viral Patel ( Traveller / Friend )

रानी की वाव ( स्टेपवेल ) जिसे गुजराती में राणी नी वाव के नाम से जाना जाता है वह भारत के पश्चिम में आये हुवे राज्य गुजरात के पाटण शहर में आयी हुवी है। 

यह वाव सरस्वती नदी के तट पर बनी हुवी है।

रानी की वाव को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक और एएसआई द्वारा सरंक्षित घोषित किया गया है। 

2016 के भारतीय स्वच्छता संमेलन में रानी की वाव को भारत का “सबसे स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस” कहा गया था।

रानी की वाव को 22 जून 2014 में UNESCO द्वारा विश्व धरोहर की सूचि में नामांकित किया गया। 

UNESCO की लिंक में आर्टिकल के अंत में दे दूंगा अगर आप भारत में आयी दूसरी सारी हेरिटेज जगहों के बारे में जानना चाहते हो तो जरूर से एक बार देख लजियेगा।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2018 बनायीं गयी 100 रुपये की मुद्रा में इस रानी की वाव को स्थान दिया है।

Rani ki Vav Information - जानकारी

Image Credit : Viral Patel ( Traveller / Friend )

इस वाव को जमीं में से भारतीय पुरातत्व द्वारा सन 1940 में वापिस खोजी गयी जिसे 1987 तक पुनः निर्माण करके प्रवासियों के लिए खोल दिया गया।

सन 1890 के दशक में अपने दौरे के दरमियान हेन्री कुसेंस और जेम्स बर्गेस ने इस जगह यहाँ पर कुछ खम्भे और शाफ़्ट को देखा। उन्होंने इस जगह को 87 मीटर (285 फ़ीट) गहरा विशाल गड्ढा कहा।

एक जैन भिक्षु मरुतुंगा ने इस वाव का उल्लेख अपनी रचना प्रबंधचिंतामणि में सन 1304 में किया था।

ट्रावेल इन वेस्टर्न इंडिया में जेम्स टॉड ने उल्लेख किया है की इस वाव की कुछ सामग्री का इस्तेमाल शायद दूसरी वाव त्रीकम बरोट नी वाव( बहादुर सिंह नी वाव) में किया गया था। जिसको सन 1940 के दशक में बड़ौदा में किये गए उत्खनन में पाया गया।

1986 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बड़ी खुदाई की गयी और इस वाव का जीर्णोद्धार सन 1981 से 1987 में करके आम जनता के लिए खोल दिया गया।

खुदाई के दौरान उदयमति की एक छवि भी बरामद हुई थी। 

Rani ki Vav History - इतिहास

Image Credit : Viral Patel ( Traveller / Friend )

अनहिलवाड पाटण के सोलंकी वंश के स्थापक मूलराज सोलंकी के पुत्र भीमदेव प्रथम की पत्नी और जूनागढ़ के चुडासमा वंश के राजा रा’खेंगार की पुत्री रानी उदयमति ने 11 वि सदी के अंतिम चरण में प्रजा के लिए पानी की व्यवस्था करने के लिए अपने पति की याद में इस वाव का निर्माण करवाया था।

रानी उदयमति ने इस वव का निर्माण करीब सन 1063 में करवाना शुरू किया था जिसको पूरा होने में करीब 20 साल लगे थे।

इस वाव का नाम रानी की वाव क्यों पड़ा ?

आम तौर पर कोई राजा ही ऐसे बांधकाम करवाता है लेकिन इस वाव का निर्माण एक रानी ने करवाया था इस लिए इस वाव को रानी की वाव से पहचाना जाता है। 

यह वाव अचानक दुनिया की नजरों से क्यों ओजल हो गयी ?

सदियों पहले पास में बहने वाली सरस्वती नदी में आयी बाढ़ और दूसरे घटनाक्रम के फल स्वरुप यह वाव पूरी तरह से जमीं में दब गयी थी। 

परंतु 20 वी सदी तक लोगों की नजरों से ओजल रही इस वाव को वापिस अपने मूल स्वरुप में लाने के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग ने सन 1968 में काम शुरू किया जो कई वर्षो बाद पूरा हुवा और लोगों के लिए वापिस सन 1987 में खोल दिया गया।

Rani ki Vav Patan

Solanki Vansh - सोलंकी वंश

सोलंकी वंश के राजाओं ने गुजरात में सन 950 से सन 1244 के दौरान शाशन किया था। जो गुजरात के चालुक्य या सोलंकी राजपूत के नाम से जाने जाते थे।

में यहाँ पर सिर्फ आप की थोड़ी जानकारी बढ़ाने के लिए सोलंकी वंश के शाशकों और उनके शाशन काल के बारे में संक्षिप्त में जानकारी दे रहा हूँ।

  1. मूलाराजा – सन 940 – 995
  2. चामुंडाराजा – 996 – 1008
  3. वल्लभराज – सन 1008
  4. दुर्बलराज – 1008 – 1022
  5. भीम I ( की पत्नी उदयमति ) – 1022 – 1063
  6. कर्ण – 1063 – 1092
  7. जयसिम्हा सिद्धराज – 1092 – 1142
  8. कुमारपाल – 1142 – 1171
  9. अजयपाल – 1171 – 1175
  10. मूलाराजा II – 1175 – 1178
  11. भीम II – 1178 – 1240
  12. त्रिभुवनपाल – 1240 – 1244

Chudasama Vansh - चुडासमा वंश

10 वि और 11 वि शताब्दी में चुडासमा राजाओं का स्थिर साम्राज्य पुरे सौराष्ट्र में स्थापित था। जिन्होंने यहाँ पर करीब 600 साल तक राज किया था।

इनका शाशनकाल सन 875 से शुरू हुवा था जिनकी संक्षिप्त जानकारी निचे दे रहा हूँ।

प्रथम राजा चंद्रचूड़ थे जिन्होंने अपना नाम चूड़ा और अपने पिता का नाम समा को जोड़के चुडासमा साख की शुरुवात की थीं ऐसा माना जाता है।

  1. चंद्रचूड़ – 875-907 
  2. मूलराज – 907-915
  3. विश्ववराह – 915-940 ( मूलराज के पुत्र विश्ववराह थे। चुडासमा राजवंश के इतिहास में महाराजा विश्ववराह एक महान राजा थे। उनके नाम के पीछे के शब्द वराह के ऊपर से उनके बाद के सारे राजाओं ने अपने नाम के आगे राह शब्द का उपयोग करना शुरू किया था। इस लिए उनके बाद के सारें शाशकों के नाम के आगे रा’ लगाया जाने लगा। )
  4. रा’ग्रहरिपु – सन 940-982
  5. रा’कांवट – 982-1003
  6. रा’दियास – 1003-1010
  7. सोलंकी शासन – 1010-1025
  8. रा’नवघण प्रथम – 1025-1044
  9. रा’खेंगार प्रथम ( की पुत्री उदयमति ) – 1044-1067
  10. रा’नवघण द्वीतीय – 1067-1098
  11. रा’खेंगार द्वीतीय – 1098-1114
  12. सोलंकी शासन – 1114-1125
  13. रा’नवघण तृतीय – 1125-1140
  14. रा’कांवट द्वीतीय – 1140-1152
  15. रा’जयसिंह – 1152-1180
  16. रा’रायसिंह – 1180-1184
  17. रा’महिपाल – 1184-1201 
  18. रा’जयमल – 1201-1230
  19. रा’जयसिंह – 1230-1253
  20. रा’खेंगार तृतीय – 1253-1260
  21. रा’मांडलिक – 1260-1306
  22. रा’नवघण चतुर्थ – 1306-1308
  23. रा’महिपाल तृतीय – 1308-1325
  24. रा’खेंगार चतुर्थ – 1325-1351
  25. रा’जयसिंह द्वीतीय – 1351-1373
  26. रा’महिपाल चतुर्थ -1373
  27. रा’मुक्तसिंहजी / रा’मोकलसिंहजी – 1373-1398
  28. रा’मांडलिक द्वीतीय – 1397-1400
  29. रा’मेलिंगदेव – 1400-1415
  30. रा’जयसिंहजी तृतीय – 1415-1440
  31. रा’महिपाल पंचम – 1440-1451
  32. रा’मांडलिक तृतीय – 1451-1473 ( चुडासमा वंश के आखरी शाशक थे। रा’मांडलिक तृतीय के पराजय के बाद उनके पुत्र भूपतसिंहजी को महम्मद बेगड़ा ने उनको जूनागढ़ के सामंत के रूप में स्थापित किया और तब से उनके वंशजो रायजादा कहलाने लगे। )

Rani ki Vav Architecture - स्थापत्य

Image Credit : Viral Patel ( Traveller / Friend )

रानी की वाव को गुजरात में सबसे बेहतरीन और स्टेपवेल वास्तुकला का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।

इस स्टेपवेल के निर्माण में शिल्पकार की ऊँची क्षमता और मारु-गुर्जर वास्तुकला शैली दिखाई देती है।

यहाँ की वास्तुकला और मूर्तियां माऊंट आबू के विमलवाशी टेम्पल और मोढेरा के सूर्य मंदिर के समान है।

इसे नंदा-प्रकार के स्टेपवेल के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

बनावट :

यह वाव लगभग 64 मीटर (213 फ़ीट) लम्बी, 20 मीटर (66 फ़ीट) चौड़ी,और 27 मीटर (92 फ़ीट) गहरी है।

सात मंजिला गहरी इस वाव में चौथा स्तर सबसे गहरा है। इस चौथे स्तर पर पानी की टंकी भी बानी हुई है।

वाव का प्रवेश द्वार पूर्व की और है और वाव का कुवां पश्चिम दिशा में स्थित है। यह कुवां 10 मीटर (33 फ़ीट) व्यास और 30 मीटर (98 फ़ीट) गहरा है।

स्टेपवेल की सीढियाँ सात स्तरों में विभाजित है जो आप को कुवें की और ले जाती है।

पिलरों वाले बांधकाम में नियमित अंतराल पर एक कॉरिडोर बना हुवा है।

इस स्टेपवेल में करीब 212 खंभे (स्तंभ) है। दीवारें,स्तंभ और कॉरिडोर नक्कासी से भरे है। वाव की दीवारों में सुंदर मूर्तियां और आकृतियां बनी हुवी है।

इस वाव में अनेक देवी-देवताओं, अप्सराओं और नाग कन्याओं की कलात्मक मुर्तिया बनायीं गयी है। इस वाव में 500 से अधिक मूर्तियां है जो धार्मिक और पौराणिक तरीकों को जोड़ती है।

रानी की वाव एक भूमिगत जल संग्रह प्रणाली के साथ साथ वास्तुशिल्प आश्चर्य भी है।

Rani ki vav patan

Image Credit : Viral Patel ( Traveller / Friend )

Rani ki vav patan

Image Credit : Viral Patel ( Traveller / Friend )

Rani ki Vav Patan Lokvayka - एक लोकवायका

यहाँ के लोकल गाइड ने बताया की यहाँ पर एक छोटा सा दरवाजा है जो पडोसी शहर सिद्धपुर की और जाता है जो करीब 30 किमी लंबी टनल जैसा है।

जो इस समय कीचड़ और मिटटी से पूरी तरह भर गया है लेकिन उस ज़माने में संकट के समय राजघराने के सभ्यो को दुश्मन राजा से जीवित बचे रहने के लिए बनाया गया था।

Rani ni Vav Patan Atmospher - वातावरण

कहीं भी घूमने जाने से पहले आप को उस जगह का और आने वाले कुछ दिनों का वातावरण जान लेना अत्यंत आवश्यक है जिससे आप को किन किन चीजों की जरुरत रहेगी उसकी तयारी कर सको। जिससे आप अपनी यात्रा को ज्यादा सुखद कर सको।

में यहाँ पर आप को इस जगह का लाइव वातावरण जानने के लिए एक लिंक दे रहा हूँ जिससे आप यहाँ का वातावरण जान सकते हो।

Best time to Visit Rani ni Vav Patan - घूमने जाने के लिए सबसे अच्छा समय

यहाँ पर घूमने के लिए शर्दियों का मौसम ज्यादा बहेतर रहेगा। यानी की नवंबर से लेकर मार्च का समय यहाँ आने के लिए ज्यादा बहेतर है।

Rani ki Vav Open timings & Entry Fees - रानी की वाव टाइमिंग्स & एंट्री फीस

Open :

8 Am – 6 Pm

Entry Fees :

  • भारतीय पर्यटक : 5/-
  • विदेशी पर्यटक : 2 USD

How to Reach Rani Ki Vav Patan - रानी की वाव कैसे पहुंचे ?

By Air :

यहाँ से सबसे नजदीकी बड़ा हवाई अड्डा अहमदाबाद है जो यहाँ से करीब 123 किमी की दूरी पर आया हुवा है। 

जहाँ से आपको यहाँ पाटण तक आने के लिए सरकारी और प्राइवेट बसें, ट्रैन, टैक्सी या कैब मिल जाएगी।

By Rail :

सबसे नजदीकी रेल्वे जंक्शन महेसाणा है जो यहाँ से करीब 52 किमी की दूरी पर आया हुवा है। 

आप यहाँ से पाटण आने के लिए सरकारी और प्राइवेट बसें या टैक्सी का उपयोग करके करीब 1 से 1.5 घंटे में यहाँ पर पहुँच सकते है।

By Road :

पाटण का खुद का बस स्टेशन है जो गुजरात के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। 

पाटण बस स्टेशन से रानी की वाव करीब 3 किमी की दूरी पर आयी हुवी है। वहां पहुँचने के लिए लोकल व्हीकल आप को आसानी से मिल जायेंगे।

Where to Stay Near Rani ki Vav Patan - पाटण में कहाँ पर रुकें ?

पाटण में आयी हुवी होटल्स सेरच करने के लिए में निचे कुछ लिंक दे रहा हूँ आप अपनी जरूरियात के मुताबिक अच्छी और डिस्काउंटेड होटल्स सर्च कर सकते हो।

Note : इस होटल्स की लिंक से मुझे किसी तरह की आय नहीं हो रही। यहाँ में उसे सिर्फ आप की अनुकूलता के दिए दे रहा हूँ।

Detailed Information - ज्यादा जानकारी

रा’खेंगार के शाशनकाल के दौरान उन्होंने भी ऐसी स्टेपवेल प्रकार के कुवों का पुनःनिर्माण करवाया था।

जिसके बारे में मैंने 2 आर्टिकल्स विस्तार से लिखे है आप उसे भी जरूर से पढ़ें। लिंक में निचे दे रहा हूँ।

  1. Navghan Kuvo Junagadh
  2. Adi-kadi Vav Junagadh

Rani Ki Vav Patan – `यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

अगर आप रानी की वाव के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को रानी की वाव  के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

अगर आप को यह आर्टिकल में दी गयी जानकरी उपयोगी लगी हो तो अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कीजिये। और मेरी इस वेबसाइट को जरूर से सब्सक्राइब कर लीजिये जिससे आगे आने वाले ऐसे और भी कई आर्टिकल का नोटिफिकेशन आप को मिल सके।

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

1 Comment

Modhera Sun Temple/History/ Timings Full Information in Hindi-travellgroup · April 23, 2020 at 9:59 am

[…] Read More : रानी की वाव पूरी जानकारी […]

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