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Salher Fort & Salota Fort Full information in Hindiसाल्हेर किला ऊँची चोटी पर बना है। अगर आप ट्रैकिंग के सौखीन है तो यह जगह मध्यम ट्रैकिंग के साथ टेंट में रात रुकने के लिए यादगार जगह है।

History - इतिहास ..

Salher Fort

Photography : Ajinkya Madhekar ( Traveller )

यह किला नासिक जिले में आया हुवा है। सह्याद्रि पर्वतमाला में आया हुवा सबसे ऊँचा किला है जो समुद्र तल से करीब 1567 मीटर ( 5141 ft ) की ऊंचाई पर स्थित है। 

यह किला मराठा साम्राज्य के प्रसिद्ध किलो मै से एक था।

सालहेर किला 1671 में शिवाजी महाराज के अधीन था। मुगलों ने 1672 में किले पर हमला किया था। लगभग एक लाख सैनिक इस युद्ध में लड़े थे। इस युद्ध में कई सैनिक मारे गए लेकिन अंततः शिवाजी महाराज ने सलहर की लड़ाई जीत ली।

मुगलों और शिवाजी की सेना के बीच आमने-सामने की लड़ाई में, सलहर की लड़ाई पहले स्थान पर होती है। इतनी बड़ी लड़ाई पहले नहीं जीती गई थी। मराठा सैनिकों द्वारा दिखाई बहादुरी और रणनीति ने लड़ाई को दूर-दूर तक फैला दिया और शिवाजी की प्रसिद्धि को बहुत अधिक बढ़ा दिया।

 18 वीं शताब्दी में पेशवाओं ने इस किले पर कब्जा कर लिया था और बाद में अंग्रेजो ने इस किले को अपने कब्जे में ले लिया था।

साल्हेर किले में देखने लायक क्या है ?

साल्हेर किले में देखने के लिए कुछ स्थान है जहाँ पर आप अच्छा समय बिता सकते है। 

1. साल्हेर किला।

2. परशुराम मंदिर।

3. जल कुंड ।

4. गुफाएं।   

साल्हेर किले तक कैसे पहुंचे ?

पुणे से दूरी : 350 किलोमीटर

मुंबई से दूरी: 300 किलोमीटर

नाशिक से दूरी : 110 किलोमीटर 

सापुतारा से दूरी : 53 किलोमीटर 

डॉन हिल स्टेशन से दूरी : 14 किलोमीटर 

साल्हेर और सलोटा किले तक पहुँचने के लिए आप को वाघ्मबे गांव से हो कर गुजरना पड़ता है जो इस किले से सबसे नजदीकी गांव है।

वाघ्मबे गांव से साल्हेर किले तक जाने वाली सड़क को साल्हेर-सलोटा रोड भी कहा जाता है। 

साल्हेर आने के लिए सबसे बढ़िया समय कौन सा है ?

यहाँ पर आने के लिए सबसे अच्छा समय बारिश के बाद और गर्मियों के पहले का यानि सितम्बर से फरवरी का है।

Salher Fort - साल्हेर किला ..

Salher Fort

Photography : Sound lover sush  ( Traveller )

साल्हेर और सलोटा किले पर जाने से पहले आप वाघ्मबे गांव से पानी की बोतल और नास्ता जरूर से ले लीजिये क्यूंकि किले पर पिने के लिए पानी भी उपलब्ध नहीं है।

यदि आप उसी दिन वापस जाना चाहते हैं, तो आपको जल्दी शुरू करना चाहिए। एक गाइड की कोई जरूरत नहीं है, फिर भी अगर आप स्थानीय लोगों से मदद लेना चाहते हैं, तो आप ले जा सकते है।

इस किले पर आप 3 से 4 घंटे में ऊपर जाके वापिस निचे आ सकते हो।

इस किले से ढलती शाम का नजारा और रात रुकने के बाद सुबह का सूरज देखने का अनुभव आप जीवन भर भुला नहीं पावोगे।

यहाँ पर किले की चोटी पर बैठके दूर तक फैली घाटियां, दिखाई देती विशालता और एक अलग प्रकार की शांति आप को वापिस इस जगह तक जरूर खिंच लाएगी।

Parshuram Temple - परशुराम टेम्पल..

Parsuram Tample

Photography : aakash parikh  ( Traveller )

किले के ऊपरी हिस्से में एक परसुराम मंदिर भी आया हुवा है। जहाँ हवाए तेज बहती है।

यहाँ की पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम ने साल्हेर किले की जगह पर अपनी तपस्चर्या की थी। इस वजह से साल्हेर किले के शीर्ष पर एक परशुराम मंदिर भी है।

इस मंदिर को किसने बनाया था इसका कोई ठोस विवरण नहीं मिलता।

परशुराम तपस्चर्या के लिए प्रसिद्ध होने के अलावा साल्हेर किला शिवाजी के शासनकाल के दौरान लड़ी गई लड़ाई के लिए भी प्रसिद्ध है।

Water Storage Tank - पानी के कुंड ..

Water tank

Photography : Sushant salokhe  ( Traveller )

यहाँ किले के ऊपर बारिश का पानी को इकठ्ठा करने के लिए कुंड बनाये गए थे जो उस समय की किले की जरुरियतों को पूरा करते थे।

लेकिन अब ये उपयोग योग्य नहीं रहे। बरसों से इस किले में ट्रैकर्स के आलावा कोई भी नहीं आता जिसके वजह से यहाँ कुंड की साफ सफाई कोई नहीं करता। 

कुंड में आज भी पानी मिल जायेगा लेकिन वह पानी पिने लायक बिलकुल नहीं है क्योकि पानी बुरी तरह से प्रदूषित है और वह पानी पीना आप के लिए बिमारियों का कारन बन सकता है।

Salher Fort Caves - साल्हेर किले की गुफाए ..

Salher Caves

Photography : 

Kamal chaudhari  ( Traveller )

वैसे आप रात को किले में टेंट लगा के रह भी सकते हो। अगर आप के पास टेंट नहीं है तो किले में 3 गुफाएं है जो प्रत्येक गुफा 20 से 25 लोगों को पनाह देने की क्षमता रखती है।

किसी भी गुफाओ में सबसे ज्यादा डर चमगादड़ और जीव जंतु का होता है लेकिन इस गुफाओं की अच्छी बात ये है की इसमें कोई चमगादड़ नहीं है। इस लिए आप चिंता मुक्त हो कर यहाँ रात गुजार सकते है। 

यह गुफाए कुदरती है और इसमें रात गुजारने का अनुभव और साथ में कैंप फायर के साथ खुले आसमान में दिखाई देते सितारें बहोत ही सुन्दर समां बनाते है। जो आप को रातभर किसी अपने के साथ बैठे रहने को प्रेरित करता है।

क्या ध्यान रखें ?

समुद्र तल से काफी ऊंचाई की वजह से रात में तापमान काफी कम हो जाता है और हवाएं भी बहोत ही ठंडी होती है। इस लिए अगर आप यहाँ पर रात रुकने की सोच रहे हो तो आप खुद को गर्म रखने के लिए पर्याप्त वस्तुए ले जाइये। आग जलाने के लिए और खुद को गर्म रखने के लिए लकड़ी का इंतजाम रात ढलने से पहले ही कर लेना बहेतर रहेगा।

अगर आप कप जाके खाना पकाने के बारे में सोच रहे हो तो लकड़ी ले जाने के लिए गांव से आप को इंसान मिल जायेंगे जो गाइड के तौर में भी मदद कर देगा।

आगे बताया उस तरह किले में कहीं भी पिने लायक पानी नहीं है इस लिए जरूरियात के मुताबिक पानी पहले से ही साथ में ले लेना ही बहेतर रहेगा। और किले पे आ जाने के बाद पानी लेने जाना भी कठिन है क्यूंकि गांव बहोत दूर है। 

Salota Fort - सालोटा फोर्ट ..

Salota Fort

Photography : Yogesh Shavant ( Traveller )

यह किला समुद्र तल से करीब  1295 मीटर ( 4986 फ़ीट ) की ऊंचाई पर आया हुवा है।

इस किले के बारे में कोई अलग इतिहास दर्ज  नहीं है। यह किला सल्हेर किले से जुड़ा हुआ है। पहाड़ी के इस हिस्से को दुश्मन से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया था।

Salota Fort

Photography : Rahul Nakhwa ( Traveller )

पहाड़ी पर चढ़ाई के बाद किले तक पहुँचा जा सकता है। किले के शीर्ष पर चढ़ने के लिए चढ़ाई करने वाले उपकरणों की आवश्यकता होती है। 

एक लाइन में तीन दरवाजे हैं जो किले के मुख्य भाग की ओर ले जाते हैं। किले में दो रॉक-कट पानी के झरने हैं। 

निकटतम गाँव वाघम्बे है। वाघम्बे से एक निरंतर ट्रेक सलोटा और सल्हेर किले के बीच की ओर जाता है। यह वाघम्बे से लगभग 1.5 घंटे की पैदल दूरी पर है।

 पश्चिम की ओर एक संकरा रास्ता सालोटा की ओर जाता है। गांव से स्थानीय गाइड को किराए पर लेना बेहतर है। किले पर आरामदायक रहने के लिए कोई जगह नहीं है। 

इस लिए ट्रेकर्स पहले सलोटा किले पर चढ़ते हैं फिर नीचे उतरते हैं और रात को सल्हेर किले पर रुकते हैं।

पुणे और मुंबई से कई ट्रेकिंग ऑर्गनाइज़ेशन यहाँ पर ट्रैकिंग केम्प में ले जाते है। यहाँ पर मैंने ऐसे कुछ ट्रैकिंग केम्प ऑर्गनाइज़ेशन की लिंक दी हुवी है आप उस पर जेक डेट्स, फीस वगेरा देख सकते हो। और उसके हिसाब से प्लान कर सकते हो।

ThrillophiliaPune TrekkersTrekdiExplorersgroup.

 

इस किलों के नजदीक में दो हिल स्टेशन आये हुवे है और वो दोनों भी कुदरती हरियाली से भरे हुवे है। उस दोनों हिल स्टेशनों के बारे में मैंने २ अलग अलग आर्टिकल लिखें हुवे है वो दोनों की लिंक में दे रहा हूँ। अगर आप कुदरती जगहों पर घूमने के सौखीन है तो वो आर्टिकल्स आप को जरूर से गाइड करेंगे। आप उसे जरूर से पढ़ें।  

link : SAPUTARA HILL STATION

link : DON HILL STATION

मैंने अपनी जानकारियों और रेफरन्स के मुताबिक Salher Fort के बारे में इस आर्टिकल में आप को गाइड करने की कोशिश की है।

अगर आप के पास इस जगह के बारे में और ज्यादा जानकारी या फोटोज हो तो आप मिझे जरूर शेयर कर सकते है।

इस ब्लॉग को आपका समय देने के लिए धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

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