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Udaipur Fortउदयपुर फोर्ट जिसे सिटी पैलेस के नाम से भी जाना जाता है जो उदयपुर में देखने का मुख्य आकर्षण है। इस आर्टिकल में आप को उदयपुर फोर्ट की पूरि जानकारी मिलेगी।

उदयपुर सिटी पैलेस के परिसर में कई दूसरे महल भी बने हुवे है जिसमे मेवाड़ राजवंश के कई राजाओं का योगदान शामिल है। यह सिटी पैलेस पिचौला झील के पूर्वी तट पर बना हुवा है और इस महल के परिसर में कई महल बने हुवे है।

आइये इस महल के बारे में विस्तार से जानते है।

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City Palace Udaipur - सिटी पैलेस उदयपुर

Udaipur Fort

Image Credit : Flickr (Arian Zwegers)

भारत के पश्चिम दिशा में आये हुवे राज्य राजस्थान में यह मेवाड़ राजवंश द्वारा बनाया हुवा सिटी पैलेस महल आया हुवा है।

यह महल परिसर का निर्माण कार्य पूर्ण होने में करीब 400 साल का लंबा समय लग गया था। जिसमे मेवाड़ राजवंश के कई राजाओं का योगदान शामिल है।

यह सिटी पैलेस पिचौला झील के पूर्वी तट पर बना हुवा है और इस महल के परिसर में कई महल बने हुवे है।

उदयपुर को झीलों के शहर के नाम से जाना जाता है। झीलों की प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ यह शहर अपनी विरासत के सुंदर महलों के लिए भी जाना जाता है।

जिसके कारण उदयपुर में हर साल देश और विदेश से लाखों पर्यटक यहाँ की सुंदरता और भव्य महलों को देखने चले आते है।

यह भव्य पैलेस राजस्थान में अपने प्रकार का सबसे बड़ा माना जाता है। सिटी पैलेस को एक पहाड़ी पर राजस्थानी और मुग़ल स्थापत्य शैली में बनाया गया था।

पहाड़ी पर बने होने की वजह से आस पास का मनोरम द्रश्य यहाँ से देखा जा सकता है।

पिचौला झील के किनारे स्थित भव्य सिटी पैलेस राजपूत शाशकों के शाशन में वास्तुकला और सांस्कृतिक कला का सबसे अच्छा उदाहरण है।

यह महल अरावली पर्वत श्रृंखला में बना हुवा है और सुंदर जगह की वजह से सन 1983 में बनी जेम्स बॉन्ड की मूवी ऑक्टोपसी के कुछ द्रश्य का फिल्मांकन इसी महल में किया गया था।

इसके आलावा कई हिंदी फिल्मों का फिल्मांकन भी यहाँ पर किया गया है।

City Palace Udaipur History - सिटी पैलेस उदयपुर इतिहास

Udaipur Fort 01

Image Credit : Needpix

भारत ने कई साम्राज्यों का उत्थान के साथ साथ उनके पतन देखा है।

सिसोदिया वंश सूर्यवंशी वंश के पौराणिक वंश के अंतर्गत आता हैं। सिसोदिया साम्राज्य राणा कुंभा,राणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे बहादुर शाशकों के एक मजबूत वंश के कारण भारत के इतिहास में अपना मजबूत स्थान रखता है।

सिसोदिया वंश के महाराणा उदय सिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर के नाम उदयपुर रखा गया था।

उदयपुर सिटी पैलेस के निर्माण कार्य सन 1553 में सिसोदिया राजपूत परिवार के महाराणा उदय सिंह द्वितीय द्वारा शुरू करवाया गया था। उसका एक कारण यह था की उन्होंने अपनी राजधानी को तात्कालिक रूप से चित्तौड़ से उदयपुर में स्थानांतरित कर दिया था।

महाराणा उदयसिंह द्वीतीय और उनके उत्तराधिकारी महाराणाओं द्वारा उदयपुर शहर की स्थापना के साथ सिटी पैलेस का निर्माण किया गया था।

मेवाड़ महाराणाओं ने इस महल से अपना राज्य कई वर्षों तक चलाया जिसकी वजह से यह महल परिसर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल बन गया।

ज्यादा विस्तार से..

मेवाड़ राज्य उदयपुर की उत्तर में 30 किमी दूर आये हुए नागदा में फला फुला था जिसको 568 ईस्वी में मेवाड़ के पहले महाराणा द्वारा स्थापित किया गया था।

8 वीं शताब्दी में राजधानी को नागदा से चित्तौड़ में स्थानांतरित कर दिया गया। चित्तौड़ गढ़ एक पहाड़ी किला था जहाँ से सिसोदिया और चौधरी ने 800 वर्षों तक अपना शाशन चलाया था। 

सन 1537 में महाराणा उदयसिंह को चितौड़ में मेवाड़ राज्य विरासत में मिला था। परंतु उस समय मुग़लों से खतरा ज्यादा बढ़ जाने की वजह से और इस किले का नियंत्रण खोने के अंदाजे की वजह से उन्होंने अपनी राजधानी चितौड़ से हटाकर उदयपुर स्थानांतरित कर दिया।

बस तो फिर इन्ही कारणों की वजह से उदयसिंह द्वीतीय ने अपने नए राज्य को एक ऐसी जगह पर बनाने का सोचा जो हर तरफ से सुरक्षित हो।

पिचौला झील के पास की जगह जो अरावली पहाड़ियों, जंगलों और झीलों से सुरक्षित थी उसी जगह को उन्होंने अपनी नयी राजधानी बनाने के लिए उचित समजा।

सन 1572 में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु हुई जिसके बाद उनके पुत्र महाराणा प्रताप ने मेवाड़ साम्राज्य की सत्ता संभाली।

हालाँकि वह सन 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध में मुग़ल साम्राज्य के शाशक अकबर द्वारा पराजित हुवे और उदयपुर मुग़ल शाशन के आधीन हो गया।

अकबर की मृत्यु के बाद जहांगीर ने मेवाड़ को महाराणा प्रताप के उत्तराधिकारी अमर सिंह प्रथम को वापिस दे दिया गया। और बाद में दोनों शाशकों के बिच में शांति समझौता किया गया।

लेकिन 1761 में मराठाओं के हमले बढ़ गए थे जिसकी वजह से राज्य ज्यादा मुश्केलियों का सामना कर रहा था।

सन 1818 तक महाराणा भीम सिंह ने अपने राज्य की सुरक्षा अन्य राजाओं से करने के लिए ब्रिटिशरों के साथ संधि पर हस्ताक्षर किये। जिसके कारण उनको अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की गयी।

सन 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद मेवाड़ साम्राज्य को राजस्थान की अन्य रियासतों के साथ सन 1949 में लोकशाही भारत में विलीन कर दिया गया।

मेवाड़ राजाओं ने बाद में अपने विशेष शाही अधिकार खो दिए। हालाँकि उत्तराधिकारी महाराणाओं ने उदयपुर में महलों के अपने अधिकार को बनाये रखा और बाद में महल के कुछ हिस्सों को विरासत की होटलों में बदल दिया।

Udaipur Fort

Sisodiya Rajvansh at chittor

Maharana Kumbha img

Maharana Kumbha Image Credit : Wikimedia (Yk jadeja)

Maharana Udaysinh II

Maharana Udaisinh Image Credit : Wikipedia (Tanvi12)

  1. महाराणा हमीर सिंह प्रथम – “मेवाड़ के महाराणा की उपाधि लेने वाले” – 1326-1364
  2. महाराणा खेता – “अजमेर और मांडलगढ़ जीते” – 1364-1382
  3. महाराणा लाखा – “दिल्ली से मेवाड़ प्रदेशों को बचा लिया। युद्ध में मारे गए।” – 1382-1421
  4. महाराणा मोकल – “मारवाड़ ने मेवाड़ पर आक्रमण किया और मोकल की 24 वर्ष की आयु में हत्या कर दी गई।” उनके बड़े भाई चुंडा को वापस मेवाड़ की रक्षा करने के लिए बुलाया गया था। – 1421-1433
  5. महाराणा कुंभा – 1433-1468
  6. महाराणा उदय सिंह प्रथम – 1468-1473
  7. महाराणा रायमल – 1473-1509
  8. महाराणा संग्राम सिंह/राणा सांगा – वह दिल्ली सुल्तान इब्राहिम लोधी के छापे के खिलाफ अपने राज्य की रक्षा करने में कामयाब रहे और यहां तक कि उन्हें कुछ ही मौकों पर हराया, लेकिन जल्द ही मुग़ल सम्राट बाबर की 1527 में खानवा की लड़ाई में सांगा की हार हुई और एक साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। – 1509-1528
  9. महाराणा रतन सिंह द्वितीय – 1509-1531
  10. महाराणा विक्रमादित्य सिंह – 1531-1537
  11. महाराणा वनवीर सिंह – 1537-1540
  12. महाराणा उदय सिंह द्वितीय – 1568 में चित्तौड़गढ़ किले को मुगल सम्राट अकबर के पास खो दिया और अपनी राजधानी उदयपुर स्थानांतरित करने के लिए मजबूर हुवे।  – 1540-1568

Sisodiya Rajvansh at Udaipur

Maharana Pratap

Mahaarana Pratap Image Credit : Wikipedia (Raja Ravi Varma)

Maharana Arvindsinh Image Credit : Wikimedia (Frankie Fouganthin)

  1. महाराणा उदय सिंह द्वितीय – 1568 -1572
  2. महाराणा प्रताप सिंह प्रथम – 1572-1597
  3. महाराणा अमर सिंह प्रथम (मेवाड़ के लिए उपयुक्त संधि के बाद मेवाड़ पर मुग़ल प्रभुत्व स्वीकार किया) – 1597-1620
  4. महाराणा करण सिंह द्वितीय – 1620-1628
  5. महाराणा जगत सिंह प्रथम – 1628-1652
  6. महाराणा राज सिंह प्रथम – 1652-1680
  7. महाराणा जय सिंह – 1680-1698
  8. महाराणा अमर सिंह द्वितीय – 1698-1710
  9. महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय – 1710-1734
  10. महाराणा जगत सिंह द्वितीय – 1734-1751
  11. महाराणा प्रताप सिंह द्वितीय – 1751-1754
  12. महाराणा राज सिंह द्वितीय – 1754-1761
  13. महाराणा अरि सिंह द्वितीय – 1761-1773
  14. महाराणा हमीर सिंह द्वितीय – 1773-1778
  15. महाराणा भीम सिंह – 1778-1828
  16. महाराणा जवान सिंह – 1828-1838
  17. महाराणा सरदार सिंह – 1838-1842
  18. महाराणा स्वरूप सिंह – 1842-1861
  19. महाराणा शंभू सिंह – 1861-1874
  20. महाराणा सज्जन सिंह – 1874-1884
  21. महाराणा फतेह सिंह – 1884-1930
  22. महाराणा भूपाल सिंह – 1930-1956
  23. महाराणा भगवत सिंह – “उदयपुर राज्य के अंतिम शासक” – 1956-1984
  24. महाराणा महेंद्र सिंह – “भारत की स्वतंत्रता के बाद से राजवंश के प्रमुख शासन को समाप्त कर दिया गया और भारत में विलीन कर दिया गया।आज भी सिसोदिया वंश के वंशज इस राज महल का कार्यभार संभाल रहे है” – 1984 वर्तमान 
  25. श्री अरविंद सिंह मेवाड़ – वर्तमान राजवंश कार्यपालक

Inside City Palace Udaipur

Image Credit : Wikimedia (Richard Moross)

सिटी पैलेस उदयपुर, पिछोला झील के किनारे स्थित राजस्थान का सबसे बड़ा महल परिसर, एक विशाल गढ़ का प्रतीक है जो राजस्थानी, मुगल, मध्यकालीन, यूरोपीय और ओरिएंटल वास्तुकला का एक समूह है।

महल परिसर को राज परिवार को दुश्मनों से आपातकालीन स्थिति में बचाने के लिए बड़ी चतुराई से डिजाइन किया गया है।

जब आप महल परिसर को चारों और से देखोगे तो आप यहाँ की उस समय की युद्ध की तकनीकें,रक्षा के पारम्परिक तरीकें और महल के दैनिक तरीकों को अच्छे से जान पाओगे।

इस महल के ऊपर से आप पिचौला झील, झील महल, जग मंदिर, मॉनसून पैलेस,नीमच माता मंदिर,जगदीश मंदिर जैसे कई ऐतिहासिक स्मारक का ऊपरी व्यू देख सकते है।

इस महल का सबसे प्रथम शाही ढांचा जो बनाया गया था वह शाही आंगन (राय आंगन) था। जिसको सिटी पैलेस परिसर की शुरुआत माना गया है। महल की अदालत को उसी जगह बनाया गया था जहाँ पर सन्यासी ने महाराणा को अपनी नयी राजधानी बनाने की सलाह दी थी।

सिटी पैलेस परिसर में महलों की श्रृंखला बनी हुवी है जिसमे करीब 11 छोटे महल शामिल है।

सिसोदिया राजपूतों की 22 पीढ़ियों द्वारा सन 1559 से शुरू हो कर एक लंबी अवधि में उनका निर्माण किया गया था।

इस वंश के प्रत्येक राजा ने दुनिया की विभिन्न जगहों की कलाओं को इस महल परिसर में स्थान दिया है।

महल परिसर पूरी तरह से संगेमरमर और ग्रेनाइट से बनाया गया था।

यह परिसर अपने टावरों,बालकनियों,चांदी के वर्क,दर्पण वर्क,संगेमरमर के वर्क,भित्त चित्र और रंगीन कांच के वर्क के लिए पहचाना जाता है।

सिटी पैलेस के ऊपर से आप उदयपुर पुरे शहर के उपरांत सुंदर पिचौला झील को भी अच्छे से देख सकते है।

परिसर के भीतर के महलों को एक दूसरे से ज़िगज़ैग कॉरिडोर के साथ एक दूसरे से इंटरलिंक किया गया था जिससे दुश्मनों द्वारा अचानक किये गए हमले से कुछ हद तक बचा जा सकें।

महल के परिसर में एक डाक घर,बैंक,ट्रावेल एजेंसी, छोटी शिप और हैंडीक्राफ्ट्स की दुकानें भी बनी हुई है।

पूरा परिसर मेवाड़ राजपरिवार की संपत्ति है।

Udaipur Fort

Structures & Interior within the Udaipur Fort

Udaipur fort - inside city palace

Interior within the Complex Image Credit : Needpix

परिसर में जाने के लिए आपको सर्व प्रथम मैं गेट से टिकट लेनी पड़ेगी। वहां से अंदर पहुँचने के बाद आप निचे दी गई जगहों को देख सकते हो। जैसेकि..

  • गेटवे ( पोल )
  • अमर विलास
  • बड़ी महल
  • दिलखुश महल
  • शीश महल
  • मानेक महल (रूबी पैलेस)
  • रंग भवन महल
  • मयूर चौक
  • जनाना महल
  • दरबार हॉल
  • कृष्ण विलास
  • भीम विलास
  • लक्ष्मी विलास चौक
  • फतेप्रकाश पैलेस
  • संग्रहालय

तो आइये हम उदयपुर सिटी पैलेस परिसर में आए हुवे देखने लायक दूसरे महलों और पैलेस में बनें कुछ अच्छे निर्माणों के बारे में संक्षिप्त में जान लेते है।

Gateway – प्रवेश द्वार (पोल)

Udaipur Fort

Tripolia poll Image Credit : Wikimedia (Baudesson, O.S.)

Udaipur Fort

Suraj Poll Image Credit : Pixabay

पैलेस में प्रवेश करने के लिए कई दरवाजे बने हुवे है जिसको लोकल भाषा में पोल के नाम से भी जाना जाता है। जिनमें ‘त्रिपोलिया पोल’, ‘हाथी पोल’, ‘सूरज पोल’ और ‘बारा पोल’ मुख्य है।

गेटवे जिसे यहाँ की लोकल भाषा में पोल कहा जाता है जो उदयपुर शहर के पूर्व में स्थित है। ऐसे कई प्रवेशद्वार अलग अलग दिशा से आप को महल परिसर तक ले जायेंगे।

उदयपुर शहर में प्रवेश बड़ी पोल से होता है सन 1600 में बनाया गया था। महल के परिसर तक उत्तर से पहुँचने के लिए आप को सन 1725 में निर्मित त्रिपोलोया पोल होकर गुजरना पड़ेगा।

इस पोल और महल के बिच की सड़क लघु चित्रकारों,शिल्पकारों,बुक स्टॉल और कपडे की दुकानों से भरी हुई है।

इन दोनों द्वारों के बिच आठ संगेमरमर के तोरण बनाये गए है। ऐसा मन जाता है की महाराणाओं का वजन यहाँ पर सोने और चांदी से होता था जिसे बाद में राज्य की स्थानीय प्रजा में बाँट दिया जाता था।

Amar Vilas – अमर विलास

अमर विलास परिसर का ऊपरी भाग है। जो ऊंचाई पर आया हुवा एक बागीचा है। यहाँ से बड़ी महेल में प्रवेश होता है। इसे मुग़ल शैली में बनाया गया था।

अमर विलास सिटी पैलेस का सबसे ऊँचा स्थान है और इसमें मीनार, फव्वारें और बागीचे सुंदर तरीके से बने हुवे है।

Badi Mahal – बड़ी महल

Badi_Mahal Udaipur Fort

Badi Mahal Image Credit : Wikimedia (Baudesson, O.S)

बड़ी महल (ग्रेट पैलेस) जिसे गार्डन पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। यह महल २७ मीटर (८९ फ़ीट) की ऊंचाई पर स्थित एक चट्टान पर बना हुवा महल है।

यहाँ पर अंदर एक स्विमिंग पूल बनाहुवा है जो होली के त्यौहार में उत्सव मानाने के लिए उपयोग में लिया जाता था।

अंदर एक हॉल में 18 वीं और 19 वीं शताब्दी के पेंटिंग्स बने हुवे है। यह महल सिटी पैलेस की सभी इमारतों में सबसे ऊँचा महल है।

Dilkhusha Mahal – दिलखुश महल

दिलखुश महल या ‘पैलेस ऑफ जॉय’ 1620 में बनाया गया था।

Sheesh Mahal – शीश महल

Udaipur fort - sheesh mahal

Sheesh Mahal Image Credit : Flickr (Bombman)

शीश महल जिसे पैलेस ऑफ़ मिरर्स के नाम से भी जाना जाता है जिसका निर्माण महाराण प्रताप ने अपनी पत्नी महाराणी अजबदे के लिए सन 1716 में प्रेम के प्रतिक के तौर पर करवाया था।

यह शीश महल महंगे दर्पणों के विभिन्न टुकड़ों से बनाया गया है। जो आप को एक शीशों की एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।

Manek Mahal(Ruby Palace) – मानेक महल

Udaipur Fort- Romm of Miror

Room of Mirror Image Credit : Wikimedia (Ashwin Kumar)

यह एक शानदार जगह है जहाँ पर कई क्रिस्टल्स और रंगीन ग्लास से बनी कलाकृति बनी हुवी है। यहाँ के दरवाजें हाथी दांत से बने हुवे है।

इस जगह में बने कमरे को आप बहार से ही देख सकते हो क्यूंकि सुरक्षा कारणों से प्रवासियों के प्रवेश पर प्रतिबंध है।

Rang Bhawan Mahal – रंग महल

रंग भवन एक महल है जहाँ पर शाही खजाने को रखा जाता था। यहाँ भगवान कृष्ण,मीराबाई और शिवमंदिर भी बने हुवे है।

Mayur Chawk – मयूर चौक

Mayur Chawk - Udaipur fort

Mayur Chowk Image Credit : Wikipedia

मयूर चौक को मोर चौक के नाम से भी जाना जाता है। यह चौक महल की आंतरिक अदालतों का एक अभिन्न अंग है।

इस चौक में सर्दी,गर्मी और बारिश का प्रतिनिधित्व करते हुवे तीन मोर की प्रतिकृति बनी हुई है। जो प्रवासियों के लिए महल में इस समय आकर्षण का एक मुख्य केंद्र है।

इन मोरों को रंगीन कांच के 5000 टुकड़ों से तैयार किया गया है इन मायूरों को महाराणा ने करीब 5000 रंगीन कांच के टुकड़ों से बड़े ही सुंदर तरीके से बनवाया था जो नीले,हरे और सुनहरें रंगो से चमकते है।

इस चौक में हिन्दू देवता श्री कृष्ण की किंवदंतीओ के दृश्यों से चित्रित किया गया है।

Udaipur fort - mayur chowk

Mayur Chowk Image Credit : Needpix

Janana Mahal – जनाना महल

मोर चौक से आगे बढ़ते आप जनाना महल तक पहुँच जाते हो जहाँ पर बहोत ही सुंदर तरीकें से डिजाइन किये गए बाल्कनियाँ,दीवारें और फर्श बनाये हुवे है।

जो आप को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।

Durbar hall – दरबार हॉल

दरबार हॉल का निर्माण की आधारशिला सन 1909 में महाराणा फ़तेह सिंह के शाशनकाल के दौरान उस समय के वॉयसरॉय लॉर्ड मिंटो ने रखी थी जिसकी वजह से इस हॉल को उस समय मिंटो हॉल के नाम से भी जाना जाता था।

इस हॉल को फतेहप्रकाश पैलेस के भीतर राज्य की सभाओं जैसे आधिकारिक कार्यों और राज्य के भोजन समारंभों के लिए बनाया गया था।

दरबार हॉल में कई गैलरी बानी हुई है जिसका उपयोग शाही महिलाओं द्वारा दरबार की कार्यवाही का निरीक्षण के लिए किया जाता था।

इस हॉल को बहोत ही सुंदर इंटीरियर और बड़े झूमर से सजाया गया है। इसके आलावा दरबार हॉल में महाराणाओं के हथियार और उनके चित्र भी प्रदर्शित किये गए है।

Krishna Vilas – कृष्णा विलास

कृष्ण विलास एक और दूसरा भव्य कक्ष है जिसमें शाही जुलुस,त्योहारों और महाराणाओं के खेल को लघुचित्र के रूप में यहाँ पर प्रदर्शित किया गया है।

इन चित्रों को उस समय के प्रसिद्द चित्रकारों द्वारा बनाया गया था।

Bhim Vilas – भीम विलास

भीम विलास लघु चित्रों के संग्रह की एक गैलरी है जो राधा कृष्ण की वास्तविक जीवन की कहानियों को दर्शाती है।

Laxmi Vilas chowk – लक्ष्मी विलास चौक

लक्ष्मी विलास चौक एक आर्ट गैलरी है जिसमें मेवाड़ चित्रों का एक विशिस्ट संग्रह है।

Fateprakash Palace – फतेहप्रकाश पैलेस

सिटी पैलेस परिसर में आए हुवा यह पैलेस आज लक्जरी होटल में तब्दील कर दिया गया है। इस भव्य पैलेस में एक क्रिस्टल गैलरी है जिसमें क्रिस्टल के टेबल,कुर्सियां,ड्रेसिंग टेबल, सोफे,पलंग,क्रॉकरी और टेबल फव्वारे रखे हुवे है जिसका कभी उपयोग ही नहीं किया गया।

यहाँ पर ज्वेलरी जड़ी कालीन भी रखी हुई है। महाराणा सज्जनसिंह ने सन 1877 में इन दुर्लभ वस्तुओं को लंडन से मंगवाया था लेकिन वस्तुओं के पैलेस में पहुँचने से पहले ही महाराणा की मृत्यु हो गई।

Museum – संग्रहालय

Udaipur fort - City Palace Museum

सिटी पैलेस के एक हिस्से को संग्रहालय में बदल दिया गया था इसके साथ जनाना महल को भी संग्रहालय में बदल दिया गया था।

म्यूजियम में आप विभिन्न कलाकृतियों, चित्रों और अन्य शाही प्राचीन वस्तुओं को देख सकते हो। संग्रहालय में एक हिस्से में सिसोदिया महाराणाओं द्वारा इस्तेमाल किये गए हथियारों जैसे की तलवारें,बंदूकें और अन्य सुरक्षत्माक वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है।

इस संगहालय में आप महाराणा प्रताप की तलवार,भाला और कवच भी देख सकते है।

महल के संग्रहालय में उस समय उपयोग में ली गयी तोपों के आलावा महाराणा प्रताप के करीब 25 किलोग्राम वजन का दुर्जेय कवच भी शामिल है।

महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े चेतक की बहादुरी का एक विस्तृत चित्रण भी शामिल है। जिसमे घायल होने के बावजूद चेतक ने किस तरह महाराणा प्रताप के जीव बचाया था वो अच्छी तरह से बताया गया है।

संग्रहालय में प्रसिद्ध कलाकार राजा रवि वर्मा द्वारा किए गए चित्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन भी दिखाया गया है।

Jagdish Temple – जगदीश मंदिर

सिटी पैलेस महल परिसर में बना यह जगदीश मंदिर सबसे बड़ा और सुंदर मंदिर है। इस मंदिर के आलावा दूसरे भी छोटे मंदिर महल परिसर में बने हुवे है।

Best time to visit Udaypur Fort - उदयपुर फोर्ट घूमने जाने के लिए सबसे अच्छा समय कौनसा है?

राजस्थान में गर्मियां ज्यादा ही तकलीफ देह होती है जिसकी वजह से गर्मियों के समय यहाँ जाने से बचें।

बारिश का मौसम वैसे तो ठंडा होता है लेकिन बारिश की वजह से उदयपुर में कई जगहों का आनंद आप नहीं उठा पाओगे। जैसे की उदयपुर के इस फोर्ट से आप पुरे उदयपुर का नजारा देख सकते हो लेकिन बारिश में शायद वह नजारा बादलों की वजह से न देख पाओ।

सबसे अच्छा समय सर्दियों का है जिसमे आप को बारिश और गर्मी का सामना नहीं कर्मणा पड़ेगा और इस महल के साथ साथ आप उदयपुर को भी अच्छे से घूम सकते हो।

इस लिए अगर आप यहाँ पर घूमने आने का प्लान कर रहे हो तो अक्टूबर से लेकर मार्च तक का समय सबसे अच्छा है।

Udaipur Fort

City Palace Udaipur timings - सिटी पैलेस उदयपुर टाइमिंग्स

City Palace :

9:30 Am – 5:30 Pm

City Palace Museum :

9:30 Am – 5:30 Pm

City Palace Udaipur light and sound show :

At Manek Chowk : 7 Pm – 8 Pm (Except : May – August 8Pm – 9 Pm)

Udaipur City Palace ticket - उदयपुर सिटी पैलेस टिकट्स

City Palace Ticket :

Adults : 30/- per person 

Children : 15/- per person 

Still Camera Fee : 200/- 

Video Camera Fee : 500/-

City Palace Museum Ticket :

Adult( above 18 yr) : 250/-

Child(5yr to 18 yr) : 100/-

Child(below 5 yr) : free

All type of camera : 250/-

Students in group : 100/-

City Palace Udaipur Light and Sound show Ticket :

Hindi :

Hathnal Ki Chandani (Adult) : 250/-

Hathnal Ki Chandani (Child) (8 – 12 Year) : 150/-

Manak Chowk (Adult) : 150/-

Manak Chow (Child) (8-12 Year) : 100/-

English :

Hathnal Ki Chandani (Adult) : 500/-

Hathnal Ki Chandani (Child) (8 – 12 Year) : 200/-

Manak Chowk (Adult) : 200/-

Manak Chow (Child) (8-12 Year) : 100/-

Udaipur Atmospher

कहीं भी घूमने जाने से पहले आप को उस जगह का और आने वाले कुछ दिनों का वातावरण जान लेना अत्यंत आवश्यक है जिससे आप को किन किन चीजों की जरुरत रहेगी उसकी तयारी कर सको। जिससे आप अपनी यात्रा को ज्यादा सुखद कर सको।

में यहाँ पर आप को इस जगह का लाइव वातावरण जानने के लिए एक लिंक दे रहा हूँ जिससे आप यहाँ का वातावरण जान सकते हो।

How to reach Udaipur fort - उदयपुर किले तक कैसे पहुंचे?

By Air :

उदयपुर का खुद का हवाई अड्डा है जिसे महाराणा प्रताप हवाई अड्डा के नाम से जाना जाता है। जो उदयपुर फोर्ट या सिटी पैलेस से करीब 23 किमी की दूरी पर आया हुवा है।

यह एयर पोर्ट भारत के सभी प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। आप एयर पोर्ट से टैक्सी या लोकल व्हीकल से आसानी से उदयपुर फोर्ट तक पहुँच सकते हो।

By Rail :

उदयपुर का खुद का रेल्वे स्टेशन है जो देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है जो सिटी पैलेस से महज 2.4 किमी कि दूरि पर ही आया हुवा है।

आप को रेल्वे स्टेशन से उदयपुर फोर्ट तक पहुँचने के लिए लोकल व्हीकल या टैक्सी आसानी से मील जाएगी। कुछ प्रमुख ट्रैन इस प्रकार है…

  • बांद्रा-उदयपुर एसएफ एक्सप्रेस,
  • मेवाड़ एक्सप्रेस,
  • अनन्या एक्सप्रेस,
  • ग्वालियर-उदयपुर एक्सप्रेस,
  • चेतक एक्सप्रेस.

By Road :

उदयपुर का खुद का बस स्टेशन है जो राज्य और देश के कई प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुवा है। जब बस से यात्रा करने की बात आती है तो कई विकल्प है जैसे की डीलक्स बसें और राज्य परिवहन निगम की बसें प्रमुख माध्यम है।

आप यहाँ से लोकल व्हीकल या टैक्सी द्वारा उदयपुर फोर्ट तक आसानी से पहुँच सकते हो।

Where to Stay in Udaipur - उदयपुर में कहाँ पर रुकें?

उदयपुर राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहाँ पर देश और विदेश से हर साल लाखों पर्यटक आते है। इसी कारण से उदयपुर सिटी में प्रत्येक वर्ग के पर्यटकों के लिए बहोत सारी होटल्स आयी हुवी है।

उदयपुर में मध्यम से ले कर लक्सुरियस होटल्स आयी हुवी है जो प्रति दिन 700 से लेकर 15000 तक के रूम चार्जिस ले कर बहोत ही अच्छी सुविधा प्रदान करती है।

में निचे कुछ लिंक दे रहा हूँ जिसकी मदद से आप डिस्काउंट रेट्स में आपकी जरूरियात कके अनुसार रूम धुंध सकते हो।

Note : मुझे निचे दी गयी कोई भी होटल्स की लिंक से किसी भी प्रकार की आय नहीं हो रही। यहाँ सिर्फ में उसे आप की अनुकूलता के लिए दे रहा हूँ।

Places to Visit in Udaipur - उदयपुर में घूमने लायक जगहें

उदयपुर में सिटी पैलेस के आलावा दूसरी भी बहोत सारी जगह घूमने लायक है। में उनमे से कुछ जगहों के नाम इधर दे रहा हूँ। 

में इन सारी जगहों के बारे में अलग से एक आर्टिकल लिखूंगा। जिसकी लिंक में इधर अपडेट करदूंगा।

  • पिचोला ज़िल
  • सहेलियों की बाड़ी
  • मॉनसून पैलेस (सज्जन गढ़ महल)
  • लेक पैलेस
  • जग मंदिर
  • फतेह सागर झील
  • कुंभलगढ़ का किला
  • बागोर की हवेली

इनमें से मैंने कुंभलगढ़ फोर्ट जहाँ पर ध ग्रेट वॉल ऑफ़ चाइना के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दीवाल बनी हुवी है उसके बारे में और मॉनसून पैलेस के बारे में एक एक आर्टिकल विस्तार से लिखा हुवा है आप उसे निचे दी गई लिंक पर जाके पढ़ सकते है।

ज्यादा पढ़ें : कुंभलगढ़ फोर्ट

Udaipur to Kumbhalgarh fort - उदयपुर से कुंभलगढ़ फोर्ट कैसे पहुंचे?

उदयपुर से कुंभलगढ़ फोर्ट करीब 86 किमी की दूरी पर आया हुवा महाराणा कुंभा द्वारा 15 वीं शताब्दी में बना हुवा एक विशाल महल परिसर है जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया हुवा है।

अगर आप उदयपुर फोर्ट के साथ साथ मेवाड़ शाशकों का एक और बड़ा महल देखना चाहते हो तो आप को उदयपुर से प्राइवेट कार,टैक्सी या यहाँ के लोकल व्हीकल( बोलेरो,ईको कार) द्वारा सड़क मार्ग से ही जाना पड़ेगा.

उदयपुर से कुंभलगढ़ फोर्ट तक पहुँचने के लिए सीधी कोई भी बस या ट्रैन सुविधा नहीं है।

Udaipur Fort

Conclusion - निष्कर्ष

Udaipur Fort – यह आर्टिकल मैंने अपने खुद के अनुभव और मेरे दोस्तों के अनुभव से लिखा हुवा है।

अगर आप उदयपुर फोर्ट के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को उदयपुर फोर्ट के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

अगर आप को यह आर्टिकल में दी गयी जानकरी उपयोगी लगी हो तो एक लाइक करना न भूलें और अपने दोस्तों में जरूर से शेयर कीजिये। 

और मेरी इस वेबसाइट को नोटिफिकेशन बेल दबाके जरूर से सब्सक्राइब कर लीजिये जिससे आगे आने वाले ऐसे और भी कई आर्टिकल का नोटिफिकेशन आप को मिल सके और मुझे और ज्यादा अच्छे आर्टिकल लिखने की प्रेरणा मिले।

Note : आर्टिकल में दी गयी टिकट की किंमत समय समय पर बदल सकती है। मैंने यहाँ मौजूदा किंमत दी है जिसे में समय समय पर अपडेट करता रहूँगा। 

फिरभी आप दी गयी किंमत को लगभग किंमत मान कर चलें।

मेरी दूसरी एक वेबसाइट www.Besttravelproducts.in है जिसमे घूमने जाने की लिए जरुरी सारी चीजें मिलती है जो एक Amazon एफिलिएट वेबसाइट है। 

अगर आप चाहे तो उसे एक बार विसिट कर सकते है।

आशा करता हूँ की आप को आर्टिकल में दी गई जानकारी यहाँ पर घूमने आने के समय जरूर से मदद करेगी। 

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

My name is Dharmesh. I would like to travel different known as well as unknown places and same will be share with you in this website for make your journey more easy and enjoyable.

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